ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 06 सितम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 06 सितम्बर 2023

06 सितम्बर 2023 दिन बुधवार को भादपद मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। क्योंकि आज अर्द्धरात्रि में अष्टमी भी आ जाएगी और रोहिणी नक्षत्र भी मिल रही है, इसलिए स्मार्त भक्तों के लिए आज ही अष्टमी अर्थात भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी मनायी जाएगी। आप सभी सनातनी स्मार्त भक्तों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – भाद्रपद कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 03:38 PM तक उपरांत अष्टमी
✍🏼 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र कृत्तिका 09:20 AM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र के स्वामी सूर्य और राशि के स्वामी शुक्र हैं।
🔔 योग – हर्षण योग 10:25 PM तक, उसके बाद वज्र योग
प्रथम करण : बव – 03:37 पी एम तक
द्वितीय करण : बालव – 03:50 ए एम, सितम्बर 07 तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:51:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:17:00
🎆 ब्रह्म मुहूर्त : 04:30 ए एम से 05:16 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:53 ए एम से 06:01 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:25 पी एम से 03:16 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:37 पी एम से 07:00 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:37 पी एम से 07:46 पी एम
💧 अमृत काल : 06:54 ए एम से 08:31 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:57 पी एम से 12:42 ए एम, सितम्बर 07
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
❄️ रवि योग : 06:01 ए एम से 09:20 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में कांस्य पात्र चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/श्रीकृष्ण प्रकटोत्सव (स्मार्त)/ जयन्ती योग/ कालाष्टमी/ भगवान श्रीकृष्‍ण जन्मोत्सव/ बाबा साहेब आंबेडकर की पुण्यतिथि, बड़ौदा की राजकुमारी इंदिरा राजे स्मृति दिवस, परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक मेजर धनसिंह थापा शहीद दिवस, भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी देवांग गांधी जयंती, श्री हरचरण सिंह बरार स्मृति दिवस, राष्ट्रीय पोषाहार दिवस (सप्ताह)
✍🏼 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु के मुताबिक, लाल रंग से संबंधित चीजों को घर की दक्षिण दिशा में रखना चाहिए । ऐसा करने से वास्तु के शुभ परिणाम मिलते हैं। क्योंकि लाल रंग का संबंध अग्नि तत्व से है और दक्षिण दिशा का संबंध भी अग्नि तत्व से ही है। इसलिए दक्षिण दिशा में लाल रंग से संबंधित चीजें रखना अच्छा होता है। दक्षिण दिशा में लाल रंग की चीज़ें रखने से घर की मंझली कन्या को हर तरह से फायदा मिलता है। आंखों की रोशनी सही बनी रहती है और उनसे संबंधित किसी तरह की परेशानी नहीं होती।
वास्तु शास्त्र के अनुसार हरे रंग से संबंधित चीजों को पूर्व या फिर दक्षिण-पूर्व दिशा,यानि कि आग्नेय कोण में रखना अच्छा होता है। साथ ही घर में हरी घास के छोटे-से बगीचे को भी इऩ्हीं दिशाओं में बनाना चाहिए। हरे रंग और इन दोनों दिशाओं का संबंध काष्ठ तत्व, यानि कि लकड़ी से है, इसलिए पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में हरे रंग की चीजें रखना शुभ फलदायी है। पूर्व दिशा में हरे रंग की चीज़ें रखने से घर के बड़े बेटे के जीवन की गति हमेशा बढ़ती रहती है। उसके पैर मजबूत होते हैं। वहीं आग्नेय कोण में हरे रंग की चीजें रखने से बड़ी बेटी को फायदा होता है। उसका लगातार विकास होता है और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
40 की उम्र में कैसे रहें फिट और मजबूत पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में 40 की उम्र के बाद ज्यादा समस्याएं होने लगती हैं। शरीर में पोषण की कमी के कारण कमर दर्द, घुटनों में दर्द या हड्डियों में दर्द की समस्या होती है। ऐसे में आप 40 की उम्र के बाद कैल्शियम से भरपूर चीजें डाइट में शामिल करें। अपनी डाइट में दूध, दही, फल और पनीर को जरूर शामिल करें।
शरीर को डिटॉक्स करने के लिए आप रोजाना कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीने की आदत डालें। अपनी एक अलग बोतल बना लें और दिनभर मॉनिटर करते हुए पानी पिएं।
बढ़ती उम्र के साथ मेटाबॉलिज्म स्लो होने लगता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने खानपान पर ध्यान दें और सीमित मात्रा में भोजन करें तथा ओवरइटिंग से बचें। ध्यान रखें कि आपकी डाइट में फाइबर की मात्रा खूब हो। इससे आपके पेट भरा रहेगा और आप ओवरइटिंग से बच जाएंगे।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
लिवर डिटॉक्स में मददगार लिवर डिटॉक्स करने के लिए आप चिरायता का पानी पी सकते हैं। ये डिटॉक्सीफाइंग तरीके से काम करता है औ लिवर सेल्स के काम काज को तेज करता है। इससे लिवर का काम तेज होता है जिससे शरीर में टॉक्सिन जमा नहीं होते। इसके अलावा इसका सेवन फैटी लिवर की समस्या में कारगर तरीके से काम करता है। तो, अगर आप हेल्दी लिवर चाहते हैं तो हफ्ते में 2 बार चिरायता का पानी पिएं।
स्किन से जुड़ी बीमारियों में फायदेमंद स्किन से जुड़ी बीमारियां जैसे किसी इंफेक्शन या ज्यादा दाने निकलने पर भी चिरायता का पानी पीना फायदेमंद है। ये एंटी बैक्टीरियल है जो कि खून को साफ करता है और फिर दाने और एक्ने को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा ये आपकी स्किन के टैक्सचर को भी बेहतर बनाने में भी मददगार है। तो, इन तमाम कारणों से पिएं चिरायता का पानी।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
माखन मिश्री खाने के फायदे: जन्माष्टमी आ रही है और लोग तरह-तरह के भोग और पकवानों की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में उनका भोग, माखन मिश्री आता है। भारत में आपको नॉर्मली ये दोनों ही चीजें कई जगहों पर खाने को मिल जाएंगी। पर कभी आपने सोचा है कि ये दोनों फूड कॉम्बिनेशन सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है। तो, आपको बता दें कि माखन, जिसे मक्खन कहते हैं ये असल में ओमेगा 3 और कुछ हेल्दी फैट से भरपूर है। तो, मिश्री में हीलिंग गुण है जो कि डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा इन दोनों का एक सेवन आपको सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है।
माखन मिश्री खाने के फायदे-इन 4 विटामिन से भरपूर आपको हैरानी हो सकती है लेकिन अकेले मक्खन में 3 विटामिन होते हैं। विटामिन ए, के और ई। तो, मिश्री में विटामिन बी12 होता है। इसकी वजह से आप सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से बच सकते हैं। जैसे कि पहले तो ये आपके नसों और टिशूज को नमी से भरता है और इनके कामकाज को बेहतर बनाता है। इसके बाद ये आंखों की सेहत के लिए अच्छा है और शरीर के तमाम अंगों के काम काज को बेहतर बनाता है।
हड्डियों के लिए फायदेमंद अगर आप माखन-मिश्री खाते हैं तो ये दोनों आपकी हड्डियों के लिए फायदेमंद हैं। पहले तो, इनमें से एक मक्खन आपकी हड्डियों खासकर कि जोड़ों के बीच नमी बढ़ता और दूसरा, मिश्री वात की समस्या को कम करने में मददगार है। इसके अलावा इनके एंटीऑक्सीडेंट्स हड्डियों की हीलिंग और नरिशिंग में मददगार है जिससे आप हड्डियों में दर्द जैसी समस्याओं से बच सकते हैं।
शरीर में खून बढ़ाता है मिश्री में आयरन की अच्छी मात्रा होती है और मक्खन में कुछ ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स जो कि शरीर में खून की कमी को दूर कर सकते हैं। जब आप इन दोनों को खाते हैं ये आपके शरीर में खनिज तत्वों की कमी को दूर करता है और फिर हीमोग्लोबिन को बढ़ावा देता है। इससे शरीर में खून की मात्रा बनी रहती है और आपको कमजोरी नहीं होती।
ब्रेन बूस्टर है मक्खन, ब्रेन बूस्टर है क्योंकि इसमें ओमेगा-3 और कुछ हेल्दी फट्स हैं जो कि आपकी मेमोरी को बूस्ट करने में मदद कर सकते हैं। ये असल में आपकी ब्रेन के लिए एक हीलर की तरह काम करता है और इनके काम काज को बेहतर बनाता है। साथ ही मिश्री का विटामिन-बी 12 शरीर के साथ ब्रेन के संवाद को बेहतर बनाता है और फिर आपको कई अन्य समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है।
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⚜️ सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।

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