ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 28 नवम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 29 नवम्बर 2023

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मार्गशीर्ष माह कृष्ण पक्ष वार बुधवार द्वितीया तिथि 01:57 PM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथी स्वामी : द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र म्रृगशीर्षा 01:59 PM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी : मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है। व्यक्ति मृगशिरा नक्षत्र में जन्म लेते हैं उनपर मंगल का प्रभाव देखा जाता है
📢 योग : साध्य योग 08:54 PM तक, उसके बाद शुभ योग
प्रथम करण : गर – 01:56 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 02:06 ए एम, नवम्बर 30 तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:42:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:18:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:46 ए एम से 05:37 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:12 ए एम से 06:29 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:41 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:38 पी एम से 06:03 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:40 पी एम से 06:57 पी एम
💧 अमृत काल : 04:35 ए एम, नवम्बर 30 से 06:15 ए एम, नवम्बर 30
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:30 ए एम, नवम्बर 30
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:29 ए एम से 01:59 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/ फ़िलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, नेशनल स्क्वायर डांसिंग डे, इस्डल वुमन डे, इलेक्ट्रॉनिक ग्रीटिंग्स डे, रॉकफेलर सेंटर क्रिसमस ट्री लाइटिंग, पैकेज प्रोटेक्शन डे, (परमवीर चक्र से सम्मानित) गुरबचन सिंह सालारिया जयन्ती, कवि एवं समाचार प्रसारक ओंकारनाथ श्रीवास्तव पुण्य तिथि, भारत में समकालीन फैशन उद्योग के अग्रणी रोहित खोसला जन्म दिवस, जेआरडी टाटा जन्म दिवस, अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी हैं। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🌷 Vastu tips 🌸
पुरानी या टूटी हुई मूर्तियां
ऐसा माना जाता है कि घर में देवी-देवताओं की पुरानी या टूटी हुई मूर्तियां रखने से नकारात्मक ऊर्जा आती है। साथ ही घर में आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ता है। इसलिए कभी भी घर में पुरानी या टूटी हुई मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। ऐसा करने से दुर्भाग्य बढ़ता है और धन-सम्पदा में कमी आती है। ऐसे में यदि आपके घर में खंडित मूर्तियां हैं तो इनको पवित्र नदियों में विसर्जित कर नई मूर्तियों को मंदिर में स्थापिक करना चाहिए।
बंद घड़ी: ज्योतिष आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, घर में रुकी हुई घड़ी रखना वास्तु शास्त्र के अनुसार अशुभ माना जाता है। अगर आपके घर में बंद घड़ी पड़ी है तो उसे निकाल देना चाहिए। इस तरह की चीज जीवन में कई तरह की रुकावटें पैदा करती है। साथ ही घर में कलह बढ़ती है।
टूटे बर्तन: टूटे बर्तन घर में रखना भी शुभ नहीं माना जाता है। अगर आपके घर में टूटे या चटखे बर्तन हों, तो समय से पहले सफाई में उनको भी घर से बाहर करना बेहतर होगा। तभी खुशियां आपके द्वार पर दस्तक दे सकती हैं।
टूटा फर्नीचर: घर में रखा हुआ टूटा-फूटा फर्नीचर बुरा प्रभाव डालता है। इसको हमेशा सही स्थिति में ही रखना चाहिए। अगर आप चाहते हैं कि मां लक्ष्मी आपके घर में वास करें, तो घर में रखा हुआ टूटा-फूटा फर्नीचर आपको घर से बाहर जरूर कर देना चाहिए।
टूटा कांच: कांच की टूटी-चटखी चीजों से घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है। साथ ही खुशियां और धन की हानि भी होती है। इसलिए घर में टूटा कांच या शीशा कभी नहीं रखना चाहिए। इसलिए सफाई में आप अपने घर से टूटे-चटख़े कांच और मिरर को सबसे पहले बाहर करें।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मंत्र जप में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है?
मंत्र जाप मे सब से महत्वपूर्ण चीज दो है एक स्थान दूसरा समय आप इसको नहीं साध सकते तो आप साधक भी नहीं बन सकते । क्यूंकी साधक वही जो साध सके अब बात साधना क्या है मंत्र का रट्ट मारना जाप नहीं कहा लता । जाप के लिए आप को स्थान तय करना हो वो कहीं भी हो सकता है आप घर भी समय भी फिक्स करना होगा जैसे सुबह 8 बजे मतलब 8 बजे एक मिनिट पहेल नहीं एक मिनिट बाद नहीं ये दोनों चीजें साधक के बस मे होती वो पाबंध नहीं हो सकता तो कुछ नहीं कर सकता । एक स्थान एक आसान आसान पर अपने आप को नियत समय पर नियत समय अंतराल मे अपने स्थिर रखना ही साधना है जब आप अपने को स्थिर कर लेते है तो मंत्र जाप मे सफलता पाई जा सकती है अन्यथा आप को लोग मिल जाएँगे फलने मंत्र से फलने साधना से लाभ नहीं हुआ अनुभव नहीं हुआ उसके पीछे का करना यही की उन्होने मंत्र पा लिया साधना का विधान पा लिया पर मूल भूत जानकारी प्राप्त न होने के कारण अपना श्रम और समय दोनों नष्ट कर दिया । रटता मारना मंत्र जाप नहीं है । लोग बोलते है जाप के करते समय मन मे बहुत विचार आते है मन स्थिर नहीं होता पहली बात ये ध्यान मे रखना आवश्यक अगर आपने मन पर काबू पा ही लिया है तो मंत्र जाप की फिर आवश्यकता क्या है । मन को आप अपना काम करने दे आप जो काम वो आप करें धीरे धीरे मंत्र जैसे जैसे फलीभूत होने लगता है मन शांत होने लगता है जिसके लिए आप को अतरिक्त कोई श्रम नहीं करना होता ।
इस का उधारण है जाप करते वक़्त लोगो को अक्सर नींद आने लगती है आसान छोड़ते ही नींद गायब हो जाती है इसका अर्थ यही है की आप का मन शांत हुआ दिमाग शांत हुआ आप को नींद आने लगी ।
🩺 आरोग्य संजीवनी 🩸
युवा बने रहने के लिए आपकी क्या खुराक है और कौन से जीवन शैली बताईए ?
आयुर्वेद के अनुसार युवा बने रहने के लिए एक दिन में 400 ग्राम और अधिकतम 500 ग्राम अन्न, भोजनादि पर्याप्त होते हैं।
युवा का उल्टा शब्द वायु होता है। शरीर में जितनी प्राणवायु यानि गहरी श्वास जायेगी। आप उतने ही युवा बने रह सकते हैं।
कम खाने भोजन जल्दी पचता है और शरीर में रस, रक्त, मज्ज़ा और अस्थि, हड्डी, सप्तधातु आदि का नवीन निर्माण होता है। शरीर मुलायम रहता है
हर काम दम लगाने से दम से दाम, धन, मिलते हैं। फिर मन प्रसन्न रहता है। अंतर्मन पर विश्वास बढ़ता है।
स्वस्थ रहने के लिए सदैव सम रहें। विषम होने से उम्र कम होने लगती है और बुढ़ापा जल्दी आता है। जमकर महंत करें,
🔱 गुरु भक्ति योग 🔱
ॐ नमः शिवाय का अर्थ
ॐ ब्रह्मांड से पहले, कंपन और शुद्ध अस्तित्व से शून्य था। कंपन से ‘ओम’ की ध्वनि निकली और फिर ब्रह्मांड का निर्माण हुआ।
नमः इसका अर्थ है झुकना
शिवाय: इसका अर्थ है शिव या आंतरिक स्व। सामान्य तौर पर ॐ नमः शिवाय का अर्थ है ‘मैं शिव को नमन करता हूं’। एक तरह से इस मंत्र का अर्थ है अपने आप को नमन करना क्योंकि शिव सभी में अपनी चेतना के रूप में विराजमान हैं।
ॐ नमः शिवाय का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ओम नमः शिवाय मंत्र आपके अहंकार और शत्रुओं को शांत करता है, यह आपको सही रास्ता दिखाता है और आपके मन से चिंता को कम करता है। मान्यता यह भी है कि यह मंत्र नकारात्मक ग्रहों के हानिकारक प्रभावों को कम करने में भी सहायक है।
ऐसे में इस मंत्र का जाप करना एक वरदान की तरह है, जो लोग इसका जाप प्रतिदिन करते हैं उन्हें इसके अद्भूत परिणाम देखने को मिलते हैं। अगर आप इस मंत्र का जाप करना चाहते हैं, तो सोमवार के दिन से इसकी शुरुआत करें, क्योंकि सोमवार का दिन पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित है।
मंत्र से होने वाले फायदे
जो व्यक्ति ओम नमः शिवाय मंत्र का नियमित रूप से जाप करता है, उसे धन लाभ होता है। शत्रुओं को परास्त करते हैं।
इस मंत्र के जाप से संतान सुख मिलता है।
ये महामंत्र आपकी अनेक तरह की तकलीफ को भी दूर कर सकता है।
इस मंत्र के जाप से जीवन चक्र समझना बहुत आसान है। इसका जाप मोक्ष की प्राप्ति के लिए भी की किया जाता है।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।
शास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है। इस तिथि के जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है। इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं। इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई तभी करते हैं जबकि उससे अपना भी लाभ हो। ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है।

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