Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 10 जुलाई 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 10 जुलाई 2023
10 जुलाई 2023 दिन सोमवार को शुद्ध श्रावण मास के कृष्ण पक्ष कि अष्टमी तिथि है। अर्थात आज शुद्ध श्रावण मास का प्रथम सोमवार व्रत है। आज के दिन भगवान शिव का दर्शन-पूजन करने से प्रदोष व्रत के समान फल मिलता है। आज सायंकाल में उमामहेश्वर के पूजन का अनन्त गुना फल बताया गया है। क्योंकि आज कालाष्टमी व्रत है और आज श्रवण मास का सोमवार व्रत भी है। आज मंगला गौरी का दर्शन और पूजन का भी अनन्त गुना फल बताया गया है। आप सभी सनातनियों को श्रावण सोमवार व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : श्रावण मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 06:44 PM तक उपरांत नवमी
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी तिथि के देवता हैं रुद्र।इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र रेवती 06:59 PM तक उपरांत अश्विनी
🪐 नक्षत्र स्वामी : रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है।
📢 योग – अतिगण्ड योग 12:33 PM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
⚡ प्रथम करण : बालव 07:17 AM तक, बाद
✨ द्वितीय करण : कौलव 06:44 PM तक, बाद तैतिल
🔥 गुलिक काल : – सोमवार का शुभ (गुलिक काल) दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह -7:30 से 9:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:15:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:45:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:09 ए एम से 04:50 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:30 ए एम से 05:30 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:41 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:22 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 04:38 पी एम से 06:12 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, जुलाई 11 से 12:47 ए एम, जुलाई 11
🌨️ सावन महीने का पहला सोमवार – 10 जुलाई
☀️ सुकर्मा योग – 10 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर कल सुबह 10 बजकर 52 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शिव मंदिर में आम भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – व्यापार मुहूर्त/वाहन क्रय, श्रावण सोमवार, गोपीनाथ बोरदोलोई जयंती, सुनील गावस्कर जन्मोत्सव, राजनाथ सिंह जयन्ती, बेगम परवीन सुल्ताना जयंती, कर्नल धर्मवीर सिंह जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी गोपीनाथ बोरदोलोई जन्म दिवस, राष्ट्रीय बिल्ली दिवस, राष्ट्रीय पिना कोलाडा दिवस, राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस, बहामास स्वतंत्रता दिवस, पंचक समाप्ति 18.58
✍🏼 विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🗺️ Vastu Tips 🗽
आईना यानी शीशा आपको हर किसी के घर में आसानी से मिल जाएगा। क्योंकि सुबह से लेकर रात को सोने तक कई बार लोग खुद को शीशे में देखते हैं और अपने आप को निहारते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार यही शीशा आपके लिए मुसीबत बन सकता है? जी हां, वास्तु शास्त्र में शीशे की दिशा और दशा का बहुत महत्व बताया गया है।
ऐसे में वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानिए भोजनकक्ष यानी डाइनिंग रूम में आईना लगाने के बारे में। भोजनकक्ष में आईना लगाना बहुत ही अच्छा माना जाता है और वो भी बड़ी आकृति का। भोजनकक्ष की दिवार पर लगे बड़े-बड़े आईने ऊर्जा के अद्भुत स्त्रोत होते हैं। यह भाग्य के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
अगर भोजनकक्ष में ठीक डाइनिंग टेबल के सामने बड़ा-सा आइना लगा हो तो उसमें खाने के दौरान देखने पर खाने के दोगुने होने का आभास होता है जिससे भूख तो अधिक लगती ही है साथ ही घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और उनमें खुशी का संचार बढ़ता है। इसके अलावा अगर आपका किचन पश्चिम मुखी है तो आप पीछे की तरफ, यानी पूर्व दिशा की दिवार पर एक गोल शीशा लगाएं। इससे आपके किचन में जो भी वास्तु सम्बन्धी समस्या है वो दूर हो जाएगा।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
हाई यूरिक एसिड में चाय की रिपोर्ट के अनुसार यूरिक एसिड की समस्या में दूध के चाय नुकसानदेह साबित होती है लेकिन ब्लैक टी और ग्रीन टी का सेवन हाई यूरिक एसिड की समस्या में फायदेमंद है। माचा टी भी यूरिक एसिड को घटाती है और आपकी हड्डियों और ज्वाइंट्स के लिए फायदेमंद होती है। माचा चाय यूरिक एसिड के क्रिस्टल को तोड़कर बाहर करती है, साथ ही प्यूरिन को पिघलाने में भी मददगार साबित होती है। ऐसे में अगर आपको यूरिक एसिड में चाय का सेवन करना है तो ग्रीन टी या माचा टी का सेवन करें।
हाई यूरिक एसिड में कॉफी हाई यूरिक एसिड की समस्या में आप कॉफी का सेवन कर सकते हैं। कई रिपोर्ट्स में इसके फायदे बताए गए हैं लेकिन इसके लिए ब्लैक कॉफी फायदेमंद है न कि दूध वाली कॉफी। कॉफी में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में बने प्यूरीन केमिकल को तोड़ते हैं। कॉफी पीने से बढ़ा हुआ यूरिक एसिड शरीर से बाहर निकल जाता है। इसके लिए आप दिन में 1 से 2 कप ब्लैक कॉफी ले सकते हैं। कॉफी में कैफीन और पॉलिफिनॉल्स होता है जो गाउट की समस्या कम करता है।
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
आंतों में जमी गंदगी को कैसे साफ करें?
प्रोबायोटिक्स का सेवन करें
आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए अपनी डाइट में प्रोबायोटिक्स बढ़ा दें। इसके लिए आप दही और छाछ का सेवन करें। इनमें होने वाले बैक्टीरिया आपके पाचन को भी दुरुष्त करेंगे।
सेब का जूस सेब को खाने के अलावा आप इसका जूस भी पी सकते हैं। सेब का जूस पीने से आंतों में फसा मल आसानी से साफ हो जाता है। अगर आप रोजाना सेब का जूस पिएंगे तो इससे शरीर में टॉक्सिंस भी नहीं जमा होंगे।
पानी पिएं काम में व्यस्त होने के कारण लोग कम पानी पीते हैं या गलत समय पर पानी पीते हैं। पाचन अच्छा रखने के लिए दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए।
फाइबर युक्त खाना पाचन को अच्छा करने के लिए फाइबर युक्त खाना खाएं। संतरा, अमरुद, नाशपाती, आम और सेब ऐसे फल हैं जिनमें फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, इन्हें खाने से आंतों का स्वास्थ अच्छा होगा और पाचन तंत्र भी मजबूत होगा।
कई बार भोजन खाएं कभी ही एक बार में ज्यादा खाना नहीं खाना चाहिए बल्कि सुपाच्य कम कम भोजन दिन में कई बार करना चाहिए। ऐसा करने से पाचन मजबूत होता है और पेट भी अच्छे से साफ होता है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
भगवान शिव का अति प्रिय मास सावन शुरू हो चुका है। इस पूरे महीने भक्तगण महादेव की उपासना में लीन रहते हैं। हिंदू धर्म में सावन माह का काफी महत्व है। कहते हैं इन दिनों भोलेनाथ मां पार्वती के साथ धरती पर भ्रमण करने आते हैं। ऐसे में जो भी भक्त पूरे सावन माह सच्चे मन से शिव की आराधना करते हैं उनकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। सावन में किए गए पूजा के फल में शिव शंकर कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर, शादीशुदा लोगों को सुखी दांपत्य जीवन, निसंतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद देते हैं। सावन में नियमित रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। लेकिन शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कई बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है वरना आपको शुभ फलों की प्राप्ति नहीं होगी।
शिवलिंग कितने बजे जल चढ़ाना चाहिए?
यूं तो भगवान की भक्ति किसी भी समय की जा सकती है लेकिन पूजा सही समय पर की जाए तो शीघ्र फलों की प्राप्ति होती है। ऐसे ही शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए के लिए एक समयसीमा तय की गई है, जिसमें भक्त उन्हें जल अर्पित कर के शुभ फलों को प्राप्त कर सकते हैं। कहते हैं शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए प्रात:काल 5 बजे का समय काफी उत्तम बताया गया है। सुबह 5 बजे से लेकर सुबह 11 बजे तक शिवलिंग पर जल चढ़ाया जा सकता है। वहीं शाम के वक्त शिवलिंग पर जल भूलकर भी अर्पित नहीं करें वरना आपको पूजा का फल नहीं मिलेगा।
शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय इन बातों का रखें ध्यान
शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए
शिवलिंग पर केवल जल चढ़ाएं उसमें कोई भी सामग्री न मिलाएं
शिवलिंग पर जल हमेशा तांबे के लोटे से ही अर्पित करें (लोहे या स्टिल बर्तन का प्रयोग न करें)
कभी भी पूर्व दिशा की ओर मुंह करके जल न चढ़ाएं।
उत्तर दिशा की ओर मुख करके शिवजी को जल अर्पित करना शुभ माना गया है
शिवलिंग पर खड़े होकर नहीं बल्कि बैठकर ही जल चढ़ाएं
तांबे के बर्तन से शिवलिंग पर दूध भूलकर भी अर्पित न करें
सावन सोमवार का महत्व
मान्यताओं के मुताबिक, सावन महीने के सोमवार के दिन जो व्यक्ति विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा करता है और व्रत करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। वहीं जिन कन्याओं को अच्छे वर की चाहत है या जो महिलाएं अपने पति के साथ अपने रिश्ते को मजबूत बनाए रखना चाहती हैं, उन्हें यह व्रत जरूर करना चाहिए। वैसे तो साल भर भगवान शिव की भक्ति की जाती है लेकिन सावन मास में भगवान शिव की पूजा करने से मनचाही इच्छा जल्द ही पूरी होती है। साथ ही सावन में नित्य रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए। शिवलिंग पर जल चढ़ाने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।


