इंदौर जलकांड के बाद दमोह प्रशासन सतर्क: कलेक्टर ने नगरीय निकायों को दिए सख्त निर्देश

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह। मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल के कारण 16 लोगों की मौत और 3 हजार से अधिक नागरिकों के बीमार होने की गंभीर घटना के बाद अब प्रशासन भी सतर्क नजर आने लगा है। इसी क्रम में दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने जिले के समस्त नगरीय निकायों को नल-जल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी कोई भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना दोहराई न जा सके।
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि नगरीय क्षेत्रों में जल आपूर्ति से जुड़ी हर व्यवस्था की तत्काल और गंभीर समीक्षा की जाए। निर्देशों के अनुसार सभी नगरीय निकायों को जल आपूर्ति पाइप लाइनों का तुरंत निरीक्षण, क्षतिग्रस्त और लीकेज वाली पाइप लाइनों की शीघ्र मरम्मत, तथा कहीं भी दूषित जल की आशंका पाए जाने पर तत्काल जल सप्लाई बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।
इसके साथ ही कलेक्टर ने पेयजल की नियमित सैम्पलिंग और प्रयोगशाला जांच, फिल्टर प्लांट, पानी की टंकियों और जल शोधन संयंत्रों की नियमित साफ-सफाई, निर्धारित मापदंडों के अनुरूप जल शोधन प्रक्रिया अपनाने तथा इसकी नियमित प्रमाणिक रिपोर्ट प्रशासन को प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं।
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने स्पष्ट किया कि इंदौर में घटी घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, और दमोह जिले में किसी भी कीमत पर नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि हाल ही में इंदौर जलकांड को लेकर कांग्रेस द्वारा जबेरा विधानसभा क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया गया था और सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए गए थे। ऐसे समय में दमोह प्रशासन द्वारा जारी किए गए यह निर्देश इस बात के संकेत हैं कि जिले में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी नगरीय निकायों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।




