धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 20 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 20 अक्टूबर 2025
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126_

🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास प्रारंभ
🌑 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 03:44 PM तक उपरांत अमावस्या
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त 08:16 PM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है, जबकि इसका देवता सविता (सूर्य का एक रूप) है। तथा नक्षत्र का राशि स्वामी बुध है।
⚜️ योग – वैधृति योग 02:34 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
प्रथम करण : शकुनि – 03:44 पी एम तक
द्वितीय करण : चतुष्पाद – 04:47 ए एम, अक्टूबर 21 तक नाग
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:24:00
🌅 सूर्यास्तः- सायः 05:46:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:44 ए एम से 05:34 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:09 ए एम से 06:25 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:28 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:59 पी एम से 02:45 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:46 पी एम से 06:12 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:46 पी एम से 07:02 पी एम
💧 अमृत काल : 01:40 पी एम से 03:26 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 21
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
🪔 पर्व एवं त्यौहार – शुभ दीपावली/ नरक चतुर्दशी/ अभ्यंग स्नान/ काली पुजा (बंगाल)/ चन्द्रोदय सुबह 05. 24/ सोमवती अमावस्या दोपहर 03.44 से/ राष्ट्रीय एकता दिवस, राष्ट्रीय चिकन दिवस, वफ़ल दिवस, विश्व सांख्यिकी दिवस, भारतीय हस्तियों में क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग जन्म दिवस, किसान कल्याण राज्य मंत्री सुदर्शन भगत जन्म दिवस, प्रसिद्ध पार्श्वगायक कुमार सानू जन्म दिवस, पश्चिम बंगाल के भूतपूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।।
🏘️ Vastu tips 🏚️
घर की बालकनी का सही वास्तु वास्तु के अनुसार घर की बालकनी में आपको तुलसी का पौधा या फिर मनी प्लांट लगाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इन पौधों को बालकनी में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है।
*बालकनी में आप सजावट की चीजें और बैठने का हल्का फर्नीचर भी रख सकते हैं। *बालकनी में अगर पानी के बर्तन में आप धातु का एक कछुआ रख दें तो आपके जीवन की कई आर्थिक परेशानियां दूर हो सकती हैं।
*आपको गलती से भी कभी बालकनी में कांटेदार पौधे नहीं रखने चाहिए। *बालकनी की सफाई नियमित रूप से करनी चाहिए और यहां जूते चप्पल रखने से भी आपको बचना चाहिए।
*इन नियमों का पालन करके आपको सकारात्मक ऊर्जा जीवन में प्राप्त कर सकते हैं। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ 🌿 प्राकृतिक और घरेलू उपाय *गुनगुना पानी पिएँ (सुबह उठते ही) नींबू और थोड़ा शहद मिलाकर पिएँ। इससे आँतों की गति बेहतर होती है।
*फाइबर (रेशेदार भोजन) बढ़ाएँ साबुत अनाज, दलिया, ओट्स, सलाद, फल (जैसे पपीता, सेब, अमरूद), और हरी सब्जियाँ। रोज़ाना कम से कम 25–30 ग्राम फाइबर ज़रूरी है। *पानी पर्याप्त मात्रा में पिएँ दिन में 2.5–3 लीटर पानी धीरे-धीरे पिएँ। सोने से पहले और सुबह उठकर पानी ज़रूर पिएँ।
*रोज़ाना व्यायाम करें हल्की वॉक या योगासन (विशेष रूप से पवनमुक्तासन, भुजंगासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन) इससे आँतों की गति स्वाभाविक होती है। *टाइम फिक्स करें रोज़ाना एक ही समय पर शौच की कोशिश करें, भले पहले दिन सफलता न मिले। शरीर धीरे-धीरे उसी टाइम पर रूटीन बना लेता है।
*रात को सोने से पहले उपाय 1–2 चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी से लें। या फिर इसबगोल भूसी 1–2 चम्मच गुनगुने दूध या पानी के साथ लें। अगर गैस ज़्यादा बनती है तो अजवाइन या हींग पानी भी फायदेमंद है। 🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
आयुर्वेद अनुसार उपचार

*जड़ी-बूटियाँ: मधुमेह के प्रबंधन के लिए बीजीआर-34, आरोग्यवर्धनी वटी, चंद्रप्रभा वटी, दारुहरिद्रा, गिलोय, विजयसार, गुड़मार और मेथी जैसी जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है। *आहार और जीवनशैली में बदलाव:परहेज: चीनी, सफेद आटा, अत्यधिक तैलीय और प्रसंस्कृत भोजन से बचें। सेवन: साबुत अनाज, जौ, चना, बाजरा और करेला, मेथी जैसे कड़वे खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें।
*व्यायाम और अन्य प्रक्रियाएं:योग और प्राणायाम: नियमित रूप से योग और गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। धूप स्नान: सुबह नंगे बदन धूप का सेवन करें। कटिस्नान और पेट की लपेट: कटिस्नान (गर्म और ठंडे पानी के स्नान) और पेट पर मिट्टी की पट्टी लगाना लाभकारी हो सकता है। *पंचकर्म: शरीर को विषमुक्त करने और दोषों को संतुलित करने के लिए पंचकर्म चिकित्सा, जैसे कि विशेष प्रकार के एनीमा, का उपयोग किया जाता
📖 गुरु भक्ति योग
पूजा-पाठ के दौरान पत्नी को सदैव ही पति के बांए तरफ क्यों बैठना पड़ता है?
पूजा-पाठ के दौरान पत्नी को सदैव ही पति के बांए तरफ क्यों बैठना पड़ता है? इस प्रश्न का सटीक उत्तर जानने के लिए पहले यह जाने की
*पत्नी वामांगी क्यों कहलाती है ? *शास्त्रों में पत्नी को वामंगी कहा गया है, जिसका अर्थ होता है बाएं अंग का अधिकारी। इसलिए पुरुष के शरीर का बायां हिस्सा स्त्री का माना जाता है।
*भगवान शिव के बाएं अंग से स्त्री की उत्पत्ति हुई है जिसका प्रतीक है शिव का अर्धनारीश्वर शरीर। *हस्तरेखा विज्ञान की कुछ पुस्तकों में पुरुष के दाएं हाथ से पुरुष की और बाएं हाथ से स्त्री की स्थिति देखने की बात कही गयी है।
*शास्त्रों में कहा गया है कि स्त्री पुरुष की वामांगी होती है इसलिए सोते समय और सभा में, सिंदूरदान, द्विरागमन, आशीर्वाद ग्रहण करते समय और भोजन के समय स्त्री पति के बायीं ओर रहना चाहिए। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती। *वामांगी होने के बावजूद भी कुछ कामों में स्त्री को दायीं ओर रहने के बात शास्त्र कहता है।
*शास्त्रों में बताया गया है कि कन्यादान, विवाह, यज्ञकर्म, जातकर्म, नामकरण और अन्न प्राशन के समय पत्नी को पति के दायीं ओर बैठना चाहिए। *पत्नी के पति के दाएं या बाएं बैठने संबंधी इस मान्यता के पीछे तर्क यह है कि जो कर्म संसारिक होते हैं उसमें पत्नी पति के बायीं ओर बैठती है। क्योंकि यह कर्म स्त्री प्रधान कर्म माने जाते हैं।
*यज्ञ, कन्यादान, विवाह यह सभी काम पारलौकिक माने जाते हैं और इन्हें पुरुष प्रधान माना गया है। इसलिए इन कर्मों में पत्नी के दायीं ओर बैठने के नियम हैं। *पत्नी ही पति के जीवन को पूरा करती है, उसे खुशहाली प्रदान करती है, परिवार का ख्याल रखती है, और उसे वह सभी सुख प्रदान करती है जिसके वह योग्य है
*पति-पत्नी का रिश्ता दुनिया भर में बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है *हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ महाभारत में भी पति-पत्नी के महत्वपूर्ण रिश्ते के बारे में काफी कुछ कहा गया है
*भीष्म पितामह ने कहा था कि पत्नी को सदैव प्रसन्न रखना चाहिये, क्योंकि, उसी से वंश की वृद्धि होती है, वह घर की लक्ष्मी है और यदि लक्ष्मी प्रसन्न होगी तभी घर में खुशियां आयेगी, इसके अलावा भी अनेक धार्मिक ग्रंथों में पत्नी के गुणों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है। *गरूड पुराण, जिसे लोक प्रचलित भाषा में गृहस्थों के कल्याण की पुराण भी कहा गया है, उसमें उल्लिखित पत्नी के कुछ गुणों की संक्षिप्त व्याख्या करेंगे
*गरुण पुराण में पत्नी केजिन गुणों के बारे में बताया गया है, उसके अनुसार जिस व्यक्ति की पत्नी में ये गुण हों, उसे स्वयं को भाग्यशाली समझना चाहिये *पत्नी के सुख के मामले में देवराज इंद्र अति भाग्यशाली थे, इसलिये गरुण पुराण के तथ्य यही कहते हैं।

सा भार्या या गृहे दक्षा सा भार्या या प्रियंवदा।

सा भार्या या पतिप्राणा सा भार्या या पतिव्रता।
*गरुण पुराण में पत्नी के गुणों को समझने वाला एक श्लोक मिलता है, यानी जो पत्नी गृहकार्य में दक्ष है, जो प्रियवादिनी है, जिसके पति ही प्राण हैं और जो पतिपरायणा है, वास्तव में वही पत्नी है. *गृह कार्य में दक्ष से तात्पर्य है वह पत्नी जो घर के काम काज संभालने वाली हो, घर के सदस्यों का आदर-सम्मान करती हो, बड़े से लेकर छोटों का भी ख्याल रखती हो।
*जो पत्नी घर के सभी कार्य जैसे- भोजन बनाना, साफ-सफाई करना, घर को सजाना, कपड़े-बर्तन आदि साफ करना, यह कार्य करती हो वह एक गुणी पत्नी कहलाती है. *बच्चों की जिम्मेदारी ठीक से निभाना, घर आये अतिथियों का मान-सम्मान करना, कम संसाधनों में भी गृहस्थी को अच्छे से चलाने वाली पत्नी गरुण पुराण के अनुसार गुणी कहलाती है, ऐसी पत्नी हमेशा ही अपने पति की प्रिय होती है।
*प्रियवादिनी से तात्पर्य है मीठा बोलने वाली पत्नी, सदैव संयमित भाषा में बात करने वाली, धीरे-धीरे व प्रेमपूर्वक बोलने वाली पत्नी ही गुणी पत्नी होती है। ऐसी स्त्री जिस घर में हो वहां कलह और दुर्भाग्य कभी नहीं आता। *शादी के बाद नए लोगों से जुड़े रीति-रिवाज को स्वीकारना ही स्त्री की जिम्मेदारी है, पत्नी को एक विशेष प्रकार के धर्म का भी पालन करना होता है,
*_विवाह के पश्चात उसका सबसे पहला धर्म होता है कि वह अपने पति व परिवार के हित में सोचे, व ऐसा कोई काम न करे जिससे पति या परिवार का अहित हो।
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा से ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।

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