धार्मिक

सुख शांति उन्नति को देने वाली है भगवती दुर्गा पुराण: मनीषी

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । श्रीराम बाबा जी महाराज के पावन पुण्य स्मरण में चल रही हनुमान बाग मंदिर नया बस स्टैंड में देवी पुराण कथा के चतुर्थ दिवस में पुराण मनीषी पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा – माँ कुष्माण्डा की आराधना करने से कष्टों का निवारण होता है। जीवन के सभी दु:खों का अन्त होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब देवी माँ ने ब्रह्माण्ड की रचना की थी। अत: ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। इनका निवास सूर्यमण्डल के भीतर के लोक में है। वहाँ निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। इनके शरीर की कान्ति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान हैं। महापुरुषों के अनुसार माँ की उपासना भवसागर से पार उतारने के लिए सर्वाधिक सुगम और श्रेयष्कर मार्ग माना जाता है। जैसा कि दुर्गा सप्तशती के कवच में भी लिखा गया है कि वह देवी जिनके उदर में त्रिविध तापयुक्त संसार स्थित है वह “कुष्माण्डा” हैं। देवी कुष्माण्डा इस चराचार जगत की अधिष्ठात्री हैं। सुख, समृद्धि, उन्नति और अपूर्व शान्ति की ओर ले जाने वाली है माँ की आराधना। अत: अपनी लौकिक, पारलौकिक उन्नति चाहने वालों को इनकी उपासना में सदैव तत्पर रहना चाहिए। आराध्य का स्मरण ही सुमिरन है और सुमिरन आराध्य के प्रति श्रद्धानिष्ठ बनने की सतत् प्रक्रिया है। इस आराधन प्रक्रिया को जो जितने मनोयोग से करता है, वह उतने ही आत्म- संतोष की अनुभूति करता है। आत्म-संतोष की यह संजीवनी उसे तनावमुक्त रखने के साथ शान्त-सुखद जीवन जीने और कार्यक्षेत्र में सफल होने की ऊर्जा प्रदान करती है।

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