लंपी वायरस की चपेट में आए मवेशी, बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं

सिलवानी में वायरस संक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही बन रही हादसों की वजह
सिलवानी। तहसील क्षेत्र में लंपी स्किन वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। बड़ी संख्या में मवेशी इसकी चपेट में हैं। यह वायरस न केवल मवेशियों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि सड़क हादसों का भी बड़ा कारण बनता जा रहा है। पीड़ित पशु एक बार सड़क पर बैठ जाएं तो फिर आसानी से उठ नहीं पाते, जिससे तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर उनकी जान चली जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर स्टेट हाइवे तक की सड़कों पर लंपी वायरस से ग्रस्त गोवंश असहाय अवस्था में बैठे दिखाई देते हैं। वाहन चालकों के हॉर्न बजाने के बावजूद ये मवेशी अपनी जगह से नहीं हटते, और परिणामस्वरूप कई बार दर्दनाक हादसे हो जाते हैं। खासकर रात के समय तेज रफ्तार और अनियंत्रित डंपर इन मवेशियों को रौंदते हुए निकल जाते हैं।
गौ सेवक कर रहे संघर्ष, प्रशासन बना मूकदर्शक
स्थानीय गौ सेवक लगातार रात भर सड़कों पर घायल और बीमार मवेशियों का इलाज कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की प्रभावी पहल नहीं की जा रही। स्टेट हाइवे से मवेशियों को हटाने और उनके इलाज के लिए जारी सरकारी आदेश केवल कागजों तक सीमित नजर आते हैं।
पशुपालकों में बढ़ रही चिंता
लंपी वायरस के कारण मवेशियों में तेज बुखार, शरीर में सूजन और लंगड़ापन जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। खुराक में कमी के चलते जानवरों में कमजोरी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में यदि मवेशी सड़क पर बैठ जाए तो उसका उठना मुश्किल हो जाता है, जिससे हादसे की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इस स्थिति से पशुपालक भी बेहद चिंतित हैं, क्योंकि बीमारी जानलेवा बनती जा रही है।
जरूरी है प्रशासन की सख्त पहल
स्थानीय लोग और गौ सेवक मांग कर रहे हैं कि प्रशासन लंपी वायरस की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाए, सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी को लेकर गंभीरता दिखाए, और रात में दौड़ते अनियंत्रित डंपरों पर कार्रवाई करे, ताकि सड़क हादसों पर लगाम लगाई जा सके।



