मध्य प्रदेश

नवरात्र पर्व के लिए कई जगह तैयार की जा रहीं माता रानी की प्रतिमाएं

नवरात्र 22 से, नगर में एक दर्जन से ज्यादा जगह पर सजाए जाएंगे माता के दरबार
9 दिन भक्ति में लीन रहेगें माता रानी के भक्त

सिलवानी। नवरात्र पर्व का आगमन नजदीक आते ही तहसील भर में उत्साह और आस्था का वातावरण गहराने लगा है। श्रद्धालु मां दुर्गा के आगमन की तैयारियों में जुट गए हैं। इस पावन अवसर पर मूर्तिकार भी अपनी कला और मेहनत से ऐसी प्रतिमाएं गढ़ रहे हैं, जिनमें न केवल श्रद्धा झलकती है, बल्कि उनकी कला का अनूठा संगम भी दिखाई देता है।
गौरतलब है कि नगर के मूर्तिकार इन दिनों मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाने में लगे हुए हैं। सुबह से लेकर देर रात तक कलाकार मिट्टी गूंथते हैं, ढांचे बनाते हैं और उनमें अपनी कल्पना के रंग भरते हैं। मिट्टी की गंध और कलाकारों के चेहरे पर झलकता पसीना, दोनों मिलकर इस बात का प्रमाण देते हैं कि यह केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि आस्था की सेवा है। कलाकार मानते हैं कि देवी की प्रतिमा बनाना केवल एक कला नहीं बल्कि एक पुण्य कार्य है। नवरात्र न केवल धार्मिक उत्सव है बल्कि स्थानीय कलाकारों और कारीगरों के लिए रोजगार का बड़ा अवसर भी लेकर आता है।
नवरात्र के दौरान मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की होती है पूजा : पंडित भूपेंद्र शास्त्री बताते हैं कि शारदीय नवरात्र के दौरान जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। शारदीय माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि सोमवार 22 सितंबर को देर रात 1.23 बजे पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 23 सितंबर को देर रात 2.55 बजे पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि मान है। जिसके चलते 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। इस दिन घटस्थापना कर देवी मां दुर्गा की पूजा की जाएगी। वहीं शास्त्री के अनुसार 22 सितंबर को घटस्थापना का शुभ समय प्रातः काल 6.9 बजे से लेकर सुबह 8.6 बजे तक है। इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11.49 बजे से दोपहर 12.38 बजे के मध्य भी माता रानी के भक्त घटस्थापना कर सकते हैं।
9 दिन तक होंगे कार्यक्रम
नवरात्र के पावन अवसर पर नगर में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर माता रानी के भव्य पंडाल श्रद्धालुओं के द्वारा सजाए जाएंगे। जिसमें धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। इस दौरान श्रद्धालु सामूहिक रूप से माता रानी की भक्ति में लीन रहेंगे और पंडालों में रोजाना 9 दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन भी होंगे।

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