गौरझामर के सभी हिन्दू मंदिरो के सार्वजनिक ट्रस्ट बनाने की मांग

रिपोर्टर ; कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । हिन्दुस्तान में अति प्राचीन हिन्दु मंदिर ही हिन्दुओ के हाथो गुलाम बने होने से हिन्दु धर्म को आगे बढने से रोका जा रहा है इससे सनातन हिन्दू धर्म का विकास अवरुद्ध है इसके बहुत से उदाहरण आपको सागर जिले के गौरझामर में मिल जावेगे । बता दें की गौरझामर मे सनातन हिन्दू धर्म के अति प्राचीन दो हिन्दु मंदिर है जिनमे एक श्रीराम मंदिर जो नयापुरा मे करन्जुआ नदी के राजाघाट तट पर स्थित है जबकि दूसरा श्रीराधा-कृष्ण मंदिर इतवारा बाजार के पास गुगवारा मार्ग पर है यह दोनो हिन्दु मंदिर काफी पुराने व वैभवशाली है इन मंदिरो की देख रेख वावकर व शेण्डे परिवारो के व्दारा की जा रही है। इन दोनो मंदिरो की अलग अलग पचासो एकड कृषि भूमि गौरझामर चरगुआ जनकपुर मिर्जापुर में है जिनकी खेती मंदिर के मुहत्तमकार करते आ रहे है ये मंदिर काफी बडे होने के कारण सनातन हिन्दु धर्माम्बल्बियो की शान व पहचान है गौरझामर की धार्मिक आस्था मान सम्मान से जुडे ये मंदिर अस्सी के दशक तक श्रृध्दालुओ के लिये आस्था और भक्ति के केंद्र बने रहे। लोग अच्छे से दर्शन पूजा अर्चना आरती भजन कीर्तन व प्रसाद का वितरण करते थे लेकिन इनके मुहत्तमकारो के निधन के बाद से शैली पूरी तरह बदल गई दुखद व चिंता का विषय तो यह है की हिन्दुओ के इन प्राचीन हिन्दु मंदिरो पर हिन्दू पुजारियो ने ही मंदिर के वैभव पूजा अर्चना आदि को और बढाने सनातन धर्म को ऊचाईयो पर ले जाने की बजाय इन पुजारी मुहत्तमकारो ने पूजा करते करते इन मंदिरो व इनसे लगी कृषि भूमि पर अपना कब्जा जमा लिया और मंदिर की चलाचल सम्पत्ति को अवैध रुप से खुर्दबुर्द करने लगे, यही हाल बस सटेंड के पास स्थित श्रीदेव दत्तात्रेय ट्स्टी मंदिर का है जिसका विधिवत सार्वजनिक ट्रस्ट होते हुए लगाये गये पुजारी ही मंदिर सम्पत्ति को कानूनी दांवपेच मे उलझाकर हडपने मे लगे हुए है सूत न कपास जुलाहो मे लठालाठी वाली कहावत दत्तमंदिर पर सटीक बैठती है दान वीर श्रीमति रानी बहु लोधी ने यह सपने मे भी नही सोचा होगा की उनके व्दारा वर्ष 1942 मे दान मे दी गई चार एकड वेशकीमती कृषि भूमि व ट्रस्टी मंदिर को पुजारी विश्वनाथ शेण्डे की तीसरी मंदिर की विरासत व मंदिर की अस्मिता व वैभव को आगे बढाने व सनातन हिन्दू धर्म की पताका को लहराकर ऊंचाईयों पर ले जाने के स्थान पर मंदिर का हृ।स करने , उसको नष्ट करने व इसकी वेशकीमती अचल सम्पत्ति को हडपने के कुचक्र रचने लगेगे।।देखा जा रहा है कि गौरझामर मे हिन्दु धर्म की बनिस्पत अन्य धर्म बहुत आगे निकल गये और हिन्दु धर्म और उसके विशाल मंदिर धन सम्पत्ति चलाचल वैभव मे समृद्ध होने के बाद भी हिन्दु ही हिन्दु पुजारियो की कुत्सित मानसिकता धनलोलुपता के शिकार है पुजारी ही धर्म के मंदिर मे बैठकर अधर्म कर रहे है उन्हे लूटने खसोटने हडपने मे लगे हुए है जिस डाल पर वह बैठे है उसी पर आरा चला रहे है यह कैसी विडम्बना है गौरझामर मे हिन्दू धर्म को आज सर्वोच्च शिखर पर होना चाहिए था वह सबसे नीचे दबा कुचला व पिछडा हुआ है इसका कारण है हमारे सनातन हिन्दु धर्म के प्राचीन श्रीराम मंदिर राजाघाट नयापुरा गौरझामर, व श्रीराधा कृष्ण मंदिर इतवारा बाजार गुगवारा मार्ग गौरझामर है जिनमे आज ताले लगे हुए है यहां न किसी भी प्रकार की पूजा अर्चना आरती भजन कीर्तन अनुष्ठान हो रहे है और नही किसी श्रृध्दालु तक को दर्शन करने दिया जा रहा है ये विशाल मंदिर आज उपेक्षित श्री बिहीन पडे किसी क्रांतिकारी पहल की प्रतिक्षा कर रहै हे इसके लिये क्षेत्रिय विधायक जनप्रतिनियो पत्रकारो व बुध्दिजीवियो को जागने व आगे आने की आवश्यकता है।


