श्रीमद भागवत कथा रूपी अमृत गंगा में गोते लगा रहे श्रद्धालु

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । ओम शांति दुर्गा उत्सव समिति कुआं के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा रूपी अमृत गंगा में श्रद्धालु भक्ति की डुबकी लगा रहे हैं। कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास बाल ब्रह्मचारी संत शिरोमणि जी महाराज ने भगवान की विभिन्न लीलाओं एवं धार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के दौरान राजा परीक्षित, कलियुग के प्रभाव, शमीक ऋषि और तक्षक नाग के श्राप से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया।
*राजा परीक्षित और कलियुग के प्रभाव का प्रसंग*
कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित, पांडवों के वंशज और अर्जुन के पौत्र थे । एक बार शिकार करते समय वे प्यास से व्याकुल होकर शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे । उस समय ऋषि गहन ध्यान में लीन थे और राजा की पुकार का उत्तर नहीं दे सके । इसे अपना अपमान समझकर राजा परीक्षित ने क्रोध में आकर एक मृत सर्प ऋषि के गले में डाल दिया ।
जब शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि को इस घटना की जानकारी मिली, तो उन्होंने क्रोधित होकर राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु हो जाएगी ।
*श्राप के बाद राजा परीक्षित को हुआ पश्चाताप*
कथा में बताया गया कि श्राप की जानकारी मिलने पर राजा परीक्षित को अपनी भूल का एहसास हुआ । उन्होंने सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर जीवन के अंतिम समय को भगवान की भक्ति और ज्ञान प्राप्ति में लगाने का निर्णय लिया । इसके बाद वे गंगा तट पर पहुंचे, जहां अनेक ऋषि-मुनियों के बीच शुकदेव जी महाराज का आगमन हुआ । राजा परीक्षित ने उनसे जीवन, मृत्यु, धर्म और मोक्ष से जुड़े प्रश्न पूछे । शुकदेव जी ने उन्हें श्रीमद्भागवत की कथा सुनाकर भक्ति, वैराग्य और आत्मज्ञान का मार्ग बताया ।
*क्रोध और अहंकार से बचने का दिया संदेश*
कथा व्यास बाल ब्रह्मचारी संत शिरोमणि जी महाराज ने इन प्रसंगों के माध्यम से बताया कि मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना चाहिए । क्रोध और अहंकार में लिया गया निर्णय जीवन में गंभीर परिणाम ला सकता है । वहीं, पश्चाताप के साथ ईश्वर की भक्ति और सद्कर्मों के मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है ।
श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, सदाचार और आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा मिल रही है । ओम शांति दुर्गा उत्सव समिति कुआं के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन से पूरे ग्राम में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है । श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं ।



