धार्मिकमध्य प्रदेश

श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह महारास और कंस वध की कथाओं से भावविभोर हुए श्रद्धालु

भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं बल्कि मानव जीवन को भक्ति प्रेम करुणा और सरलता से भगवत प्राप्ति का मार्ग पर ले जाने वाली दिव्य प्रेरणा हैं : पंडित रेवाशंकर शास्त्री
सिलवानी। ग्राम पंचायत सिगपुरी उचेरा में यादव परिवार के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस श्रद्धा भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। कथा व्यास पंडित रेवा शंकर शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण एवं संगीतमय वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।छठे दिवस कथा में श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह का प्रमुख प्रसंग सुनाया गया जिसे लक्ष्मी और नारायण के अटूट प्रेम का प्रतीक बताया गया। पंडित शास्त्री महाराज ने कहा कि जो भक्त ईश्वर प्रेम में लीन होकर श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह में सहभागी बनते हैं उनके जीवन की अनेक समस्याएं स्वत समाप्त हो जाती हैं। भागवत कथा में श्री कृष्णा और रुक्मणी विवाह हुआ कथा के दौरान महारास के पांच अध्यायों का विशेष वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि ये पांच अध्याय श्रीमद्भागवत के पंच प्राण हैं, जिनमें जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का दिव्य संदेश निहित है। महारास प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बांसुरी वादन से गोपियों के आह्वान और प्रेममयी लीला का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन और दुष्ट कंस वध महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण, कालियवन वध कालिया दमन लीला मुचकुंद को भगवान के चतुर्भुज रूप के दर्शन उद्धव गोपी संवाद द्वारका नगरी की स्थापना एवं बलराम रेवती विवाह के प्रसंगों का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
पंडित रेवा शंकर शास्त्री महाराज ने कहा कि कालिया दमन लीला अहंकार के नाश का प्रतीक है वहीं मुचकुंद को प्राप्त दर्शन सच्ची भक्ति का प्रतिफल हैं। उद्धव गोपी संवाद के माध्यम से उन्होंने प्रेम को सर्वोच्च साधना बताते हुए कहा कि गोपियों का निष्काम प्रेम स्वयं भगवान को भी वश में कर लेता है।
कथा आयोजन सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर बालमुकुंद यादव बाबूजी एवं महेंद्र पाल यादव सरपंच प्रतिनिधि के तत्वावधान में किया जा रहा है। छठवें दिवस कथा श्रवण के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे। कथा के समापन पर श्रीमद्भागवत कथा की आरती की गई जिसमें समस्त श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर क्षेत्र में सुख शांति और समृद्धि की कामना की।

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