धार्मिक

झिरमिला में भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। सिलौंडी के समीपवर्ती ग्राम झिरमिला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ सुनाया गया । कथावाचक पंडित रमाकांत पौराणिक जी ने भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी के दिव्य प्रेम और विवाह की महिमा का वर्णन किया ।
उन्होंने बताया कि नारद जी एवं अन्य लोगों के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, गुण, पराक्रम और वीरता की प्रशंसा सुनकर रुक्मिणी ने मन ही मन भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार कर लिया था । वे श्रीकृष्ण के अतिरिक्त किसी अन्य से विवाह नहीं करना चाहती थीं ।
कथावाचक ने बताया कि रुक्मिणी के भाई रुक्मी, श्रीकृष्ण से शत्रुता रखते थे और अपनी बहन का विवाह चेदिराज शिशुपाल से कराना चाहते थे । पिता भीष्मक भी रुक्मी के आग्रह पर इस विवाह के लिए तैयार हो गए थे । विवाह की तैयारियां प्रारंभ हो चुकी थीं, लेकिन रुक्मिणी ने एक ब्राह्मण दूत के माध्यम से श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर अपनी व्यथा व्यक्त की ।
पत्र में रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण से आग्रह किया कि वे देवी दर्शन के समय मंदिर पहुंचकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करें, अन्यथा वे प्राण त्याग देंगी । रुक्मिणी का संदेश प्राप्त होते ही श्रीकृष्ण अपने भाई बलराम के साथ विदर्भ पहुंचे और मंदिर में पूजा कर रही रुक्मिणी का हरण कर लिया ।
इसके बाद रुक्मी, शिशुपाल एवं जरासंध सहित कई राजाओं ने श्रीकृष्ण का पीछा किया, लेकिन युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण विजयी हुए और रुक्मिणी को लेकर द्वारिका पहुंचे, जहां विधि-विधान से दोनों का भव्य विवाह संपन्न हुआ ।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए । इस अवसर पर रामनारायण विश्वकर्मा, अश्वनी कुमार विश्वकर्मा, आशा बाई विश्वकर्मा, सरस्वती बाई विश्वकर्मा माता जी, समस्त विश्वकर्मा परिवार, गोविंद काछी सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे ।

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