श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
तेजगढ़। दमोह जिले के ग्राम तेजगढ़ के बाजार प्रांगण में नामदेव परिवार के तत्वावधान में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिवस कथा व्यास पंडित मुकेश मिश्रा महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण सुदामा की मित्रता का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे और पूरा पंडाल भक्ति रस में डूबा नजर आया।
कथा व्यास मिश्रा ने बताया कि श्रीकृष्ण और सुदामा ने महर्षि सांदीपनि के आश्रम में साथ शिक्षा ग्रहण की थी। गुरुकुल जीवन के दौरान दोनों की मित्रता अत्यंत गहरी थी। एक प्रसंग में गुरु माता द्वारा जंगल से लकड़ियां लाने भेजे जाने पर तेज वर्षा में दोनों पूरी रात पेड़ के नीचे भीगते रहे। उनकी गुरु भक्ति और सच्ची मित्रता से गुरु अत्यंत प्रसन्न हुए।
मिश्रा जी ने आगे कहा कि समय बीतने पर श्रीकृष्ण द्वारका के राजा बन गए, जबकि सुदामा अत्यंत गरीब ब्राह्मण जीवन व्यतीत करने लगे। घर में भोजन तक की कमी होने पर सुदामा की पत्नी ने उन्हें अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका जाने का आग्रह किया। गरीबी के बावजूद सुदामा संकोच करते रहे, लेकिन पत्नी के आग्रह पर वे थोड़े से चावल कपड़े में बांधकर द्वारका पहुंचे।
कथा में वर्णन किया गया कि जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण को अपने मित्र सुदामा के आने का समाचार मिला, वे दौड़कर द्वार पर पहुंचे और उन्हें गले लगा लिया। भगवान ने स्वयं उनके चरण धोए और अत्यंत प्रेमपूर्वक उनका सम्मान किया। सुदामा द्वारा लाए गए चावल को भी भगवान ने बड़े प्रेम से ग्रहण किया।
कथा व्यास पंडित मुकेश मिश्रा ने कहा कि सच्ची मित्रता कभी अमीरी-गरीबी नहीं देखती। भगवान प्रेम और भक्ति से प्रसन्न होते हैं, दिखावे से नहीं। निस्वार्थ भाव और सच्चा मन ही जीवन का सबसे बड़ा धन है।
कार्यक्रम के मुख्य यजमान श्रीमती शीला नामदेव-श्री मदन नामदेव, अनीता-दीनदयाल एवं सारिका-मुकेश नामदेव रहे। कथा आयोजन में द्वारका-चंदा एवं स्वर्गीय भरत नामदेव सहित ग्रामवासियों का सराहनीय सहयोग मिल रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।


