पुरानी पेंशन की घोषणा नहीं होने से कर्मचारी नाराज, 13 मार्च को भोपाल में करेंगे प्रदर्शन

रायसेन। आज मध्य प्रदेश के बजट में कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा नहीं होने से प्रदेश के कर्मचारियों में निराशा है कर्मचारियों को उम्मीद थी की राजस्थान सरकार एवं अन्य सरकारों द्वारा पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा कर देने के बाद मध्य प्रदेश में भी पुरानी पेंशन लागू कर दी जाएगी , किंतु आज मध्यप्रदेश के बजट में वित्तमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने पुरानी पेंशन पर कोई विचार नहीं करना बताया. जबकि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों के लिए आज जारी बजट में पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा कर दी गई।
उक्त जानकारी देते हुए पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष परमानंद डेहरिया एवं प्रांतीय संगठन सचिव अजीत श्रीवास्तव ने बताया कि बजट से मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को काफी उम्मीद थी किंतु बजट सत्र में पेंशन संबंधी कोई घोषणा नहीं की गई जिससे प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों में रोष व्याप्त हो गया है और यह आक्रोश आने वाली 13 मार्च को भोपाल में दिखेगा।
ज्ञात रहे कि मध्यप्रदेश में 1 जनवरी 2005 से मध्यप्रदेश के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बंद करके नई पेंशन योजना लागू कर दी गई है जिसके तहत कर्मचारियों के कुल वेतन का 10% अंशदान कर्मचारी का तथा 12% अंशदान शासन की ओर से मिलाकर शेयर मार्केट में लगा दिया जाता है जिससे कर्मचारियों का भविष्य शेयर मार्केट पर निर्भर हो गया है। रिटायरमेंट के समय कुल जमा राशि का 60% कर्मचारी को नगद दिया जाता है जिस पर आयकर भी लगता है तथा शेष 40% राशि के ब्याज से कर्मचारियों को पेंशन दी जाती है। इस नई पेंशन योजना के तहत रिटायर होने पर कर्मचारी को ₹600 से लेकर 1200 रुपए प्रतिमाह तक पेंशन मिलती है जो उनके जीवन यापन के लिए बहुत ही कम है। जिससे वृद्धावस्था में सेवानिवृत्ति के पश्चात कर्मचारी को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती है। वही पुरानी पेंशन योजना यदि लागू कर दी जाती है तो कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के समय मिल रहे अंतिम वेतन का आधा पेंशन के रूप में मिलता है तथा समय-समय पर महंगाई भत्ता भी बढ़ता है जिससे रिटायरमेंट के पश्चात कर्मचारी आसानी से अपना जीवन यापन कर सकते हैं।
पुरानी पेंशन योजना सरकारी कर्मचारियों के लिए बंद कर दी गई किंतु माननीय सांसदों और विधायकों के लिए अभी भी पुरानी पेंशन योजना ही लागू है यदि कोई जनप्रतिनिधि 1 दिन के लिए भी विधायक अथवा सांसद बनता है तो उसे पुरानी परिवार पेंशन दी जाती है जबकि आजीवन सरकार की सेवा करने वाले कर्मचारी से यह हक छीन लिया गया है। इतना ही नहीं रक्षा सेवा में लगे बीएसएफ और सीआरपीएफ के जवानों को भी पुरानी पेंशन का लाभ नहीं दिया जा रहा जो कतई न्यायोचित नहीं है।
संघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश के पेंशन विहीन अधिकारियों कर्मचारियों से अपील की है कि 13 मार्च को भोपाल के नेहरू नगर स्थित कलियासोत ग्राउंड मैं अवश्य पहुंचे एवं पुरानी पेंशन बहाली की मांग को मजबूती प्रदान करें।



