धार्मिक

विश्व प्रसिद्द विशाल शिव मंदिर भोजपुर में महाशिवरात्रि पर लगा मेला

रिपोर्टर : राजेश रजक
रायसेन । विश्व प्रसिद्ध विशाल शिवलिंग मन्दिर भोजपुर पर सुबह 7 बजे से लगा भक्तो का मेला।लाखो की संख्या में भक्तो ने किया  शिव अभिषेक, प्रशासन ने और पुरातत्व विभाग ने किए पुख्ता इंतेजमात। 10 बी शताव्दी का प्राचीन विश्व का सबसे बड़ा विशाल शिवलिंग मन्दिर हैं । आज सुवह से विश्व प्रसिद्द शिवलिंग मंदिर भोजपुर में भक्तो का ताँता लगा हुआ हैं 10 बी सदी में राजा भोज के समय का विश्व का सवसे बड़ा शिवलिंग मंदिर हैं ।
रायसेन जिले के भोजपुर का भोजेश्वर मंदिर 11 सदी से 13 वीं सदी की मंदिर वास्तुकला का एक अद्वितीय उदाहरण है।  अगर यह मंदिर पूर्णरूप से निर्मित होता तो पुराने भारत का अपनी तरह का एक आश्चर्य होता है। मंदिर का पूरी तरह भरा हुआ नक्काशीदार गुम्बद और पत्थर की संरचनाएं, जटिल नक्काशी से तैयार किये गए प्रवेश द्वार और उनके दोनों तरफ उत्कृष्टता से गढ़ी गई आकृतियाँ देखने वालों का स्वागत करती हैं। मंदिर की बालकनियों को विशाल कोष्ठक और खंभों का सहारा दिया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारों और ढाँचे को कभी बनाया ही नहीं गया। मंदिर को गुंबद के स्तर तक बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया मिट्टी का रैम्प अभी तक दिखाई पड़ता है, जो हमें इमारत निर्माण कला (चिनाई) में पुरातन बुद्धिमत्ता का स्वाद चखाता है।भोजपुर, बलुआ पत्थर की रिज जो मध्य भारत की विशेषता है, पर स्थित 11 वीं सदी का एक शहर है। यह मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। बेतवा नदी पुनः बनाए गए इस प्राचीन शहर के पास बहती है जो भोजपुर पर्यटन में पुरानी दुनिया के आकर्षण का समावेश करती है। कोरोना काल के बाद भी श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ हैं वहीँ प्रशासन भी पुख्ता इंतेजामात किये हैं 
आज से तीन दिवसीय भोजपुर महोत्वसव का शुभारम्भ आज से ही शुरू किया जावेगा / 11 मार्च से 13 मार्च तक चलेगा / लोक संगीत ,नृत्य का आयोजन किया जावेगा /भोजपुर और उसके आसपास के पर्यटक स्थल भोजेश्वर मंदिर को पूर्व के सोमनाथ के नाम से भी जाना जाता है जो भारत की उन अद्भुत संरचनाओं वाली इमारतों में से एक है, जिसे एक बार ज़रूर देखा जाना चाहिए।  इस प्राचीन शहर के दैत्य जैसे बांधों के अवशेष आपको आश्चर्य में डाल देंगे। ‘अधूरा’ होने का तथ्य ही इस प्राचीन शहर को अनूठी गुणवत्ता प्रदान करता है, उन चट्टानी खदानों में जाना बहुत ही रोमांचकारी होता है जहाँ आप हाथ से तराशे गए पत्थर के मूर्ति शिल्प को देख सकते हैं जो कभी एक पूरे मंदिर या महल का रूप नहीं ले पाए। हर दूसरे ऐतिहासिक पर्यटन स्थल पर आप प्राचीन शहर के खंडहरों का निरीक्षण कर सकते हैं पर यहाँ वास्तव में वो शहर है जो कभी पूरा ही नहीं किया गया।यहाँ भक्तो की कतार सुवह से लगी हुई हैं मंदिर में देश दुनिया से भक्त आतें हैं और यहाँ आकर शिव भक्ति में लींन  हो जातें /हजारो की संख्या में भकरो का ताता लगा हुआ हैं /यह एक ऐतिहासिक धरोहर के साथ ,धार्मिक प्रचीन धरोहर हैं ।

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