कृषि

मौसम की मार के बीच किसानों का रुझान बदला, हार्वेस्टर से कटाई बनी पहली पसंद

सिलवानी। इस वर्ष मौसम के बार-बार बदलते मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कभी तेज धूप तो कभी बारिश और ओलावृष्टि की आशंका के चलते फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है। ऐसे हालात में अब क्षेत्र के किसान पारंपरिक मजदूरों की बजाय हार्वेस्टर से फसल कटाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ब्लॉक के किसान मनोज कुमार के अनुसार इस बार गेहूं और चना का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा है। वहीं मजदूरी दरों में बढ़ोतरी ने किसानों की लागत और बढ़ा दी है। यही कारण है कि किसान अब हार्वेस्टर से कटाई कराना ज्यादा लाभकारी मान रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जहां मजदूरों से कटाई कराने पर अलग-अलग चरणों में खर्च करना पड़ता है, वहीं हार्वेस्टर से कुछ ही घंटों में कटाई और थ्रेसिंग दोनों कार्य एक साथ हो जाते हैं। इससे समय के साथ-साथ खर्च में भी कमी आती है।
मंसाराम परते और रामसिंग जैसे किसानों ने बताया कि इस साल मौसम में दो से तीन बार हुए बदलाव और लगातार बारिश के कारण फसल की पैदावार प्रभावित हुई है। ऐसे में जल्द कटाई करना जरूरी हो गया है, जिसे हार्वेस्टर के माध्यम से आसानी से पूरा किया जा सकता है।
मजदूरी महंगी, हार्वेस्टर सस्ता सौदा
इस वर्ष हाथ से कटाई कराने वाले ठेकेदार प्रति एकड़ अधिक राशि मांग रहे हैं। वहीं खुले बाजार में मजदूर 350 से 400 रुपए प्रति एकड़ तक ले रहे हैं। इसके विपरीत हार्वेस्टर से कटाई कराने पर प्रति एकड़ लगभग 1500 से 2000 रुपए तक की बचत हो रही है।
किसानों का कहना है कि हार्वेस्टर से न सिर्फ लागत कम हो रही है, बल्कि समय की भी बचत हो रही है। यही वजह है कि इस सीजन में क्षेत्र के अधिकांश किसान हार्वेस्टर से फसल कटाई की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

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