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कब तक होंगी डॉक्टरो की पूर्ति, अस्पताल की आ व्यवस्था को लेकर किया निरीक्षण

नरेंद्र मोदी विचार की महिला शाखा प्रदेश महामंत्री का अथक प्रयास,
शासकीय अस्पताल की सफाई व्यवस्था डगमगाई, वेतन सहित डॉ ने होने से आम जनता परेशान, कलेक्टर से लेकर सीएचएमओ नहीं दे रहे ध्यान
सिहोरा स्वास्थ्य सिविल अस्पताल का मामला अति गम्भीर

ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। जबलपुर के ग्रामीण मुख्यालय सिहोरा में स्वास्थ्य सुविधाओं से आम जनता काफ़ी दूर हैं वहीं कम डॉक्टर के कारण मरीजों को लम्बे समय तक इलाज के इंतजार करना पड़ रह हैं। सोमवार को साप्ताहिक बाजार होने से स्थानीय मरीजों समेत आसपास ग्रामीण क्षेत्रों की संख्या अधिक हो जाती हैं। जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था डगमगा रहीं हैं। इन हालतों की जानकारी जैसे ही नरेन्द्र मोदी विचार मंच की प्रदेश महामंत्री एकता अश्विनी तिवारी को लगीं। उन्होंने पूरे सिविल अस्पताल का भ्रमण कर एक एक पहलू पर विचार विमर्श करते हुए तत्कालीन व्यवस्था में सुधार हेतु उचित बात रखीं। ज्ञातव्य हो कि सिहोरा शासकीय सिविल अस्पताल में 15 डाक्टरों की पदस्थापना तो हैं पर उसमें से तीन सिहोरा एवं बाकी दिवस जबलपुर में अटैच होने के कारण पीड़ित मरीज को उपचार का लाभ समय पर नहीं मिला पाता है। आज वर्तमान में एक माह से अधिक डॉ की संख्या नाम मात्र हैं। जिससे ग्रामीण इलाज हेतु परेशान होते हैं। अब सवाल हैं कि? कब तक होंगी डॉ की पूर्ति एवं अस्पताल की व्यवस्था की पूर्ति। इन सभी विषयों को लेकर नरेंद्र मोदी विचार की महिला शाखा प्रदेश महामंत्री एकता अश्विनी तिवारी का अथक प्रयास व अस्पताल का निरीक्षण किया गया।
क्या क्या मिली कमियां – साफ सफाई व्यवस्था में सुधार तो दो माह का वेतन कर्मचारियों का रुका ही पाया गया। बारिश के समय मरीजों की परेशानी काफी देखने को मिल रही हैं। आज हालात इतने जटिल और हैरान करने वाले हो गए हैं कि सिहोरा शासकीय सिविल अस्पताल में सफाई कर्मियों, आऊट सोर्स कमियों को तीन महीने से वेतन के लिए परेशान होना पड़ रहा हैं। और जिम्मेदार उच्च अधिकारी इस ओर कोई रुचि तक नहीं दिखा रहे हैं। जबकि जिले से लेकर मुख्यालय में पदस्थ अधिकारी को मालूम होने के बाद भी स्थिती खराब होती चली जा रहीं हैं।
डाक्टरों की कमी कब होंगी पूरी –
सिहोरा स्वास्थ्य सिविल अस्पताल में जहां डॉ के स्थानांतरण होने से मरीजों को स्वास्थ्य लाभ की परेशानी झेलना पड़ रही हैं। तो वहीं सफाई व्यवस्था कर्मचारी के दैनिक कार्य करने और उनका समय पर वेतन न होना बड़ा विषय है।
अभी एक माह का हुआ भुक्तान दो माह का फ़िर भी बाकी।
अस्पताल में कर्मचारियों की संख्या लगभग – अस्पताल परिसर में आउटसोर्स 40 कर्मचारी, संविदा 35 से 45 कर्मचारी, परमानेंट 65 कर्मचारियों का कार्य कर रहे हैं। जिसमें संविदा, सिस्टर, कम्प्यूटर ऑपरेटर, वार्ड बाय, चौकीदार सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। वहीं डाक्टरों की संख्या 15 से घट कर आधी हो गई हैं।
मेडिशन दवाईयों पर उठें सवाल – बीमार व्यक्तियों मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिऐ निशुल्क दवाईयां अस्पताल परिसर से प्रत्येक मरीज के अनुसार तो वितरण की जाती हैं पर सवाल ये हैं? कि 400 से अधिक प्रकार की दवाईयां मेडिकल द्वारा उपलब्ध कराई जाती हैं उसमें भी अस्पताल में दवाईयों की कमी बनी हुई हैं। जिससे गरीब असहाय व्यक्ति बाहर प्राइवेट मेडिकल से दवाई खरीदता है।
जब इस विषय पर उच्च अधिकारी सीएचएमओ, अनुविभागीय अधिकारी से संपर्क किया तो उन्होंने फोन तक उठाने की जरूरत नहीं समझी। क्या इन अधिकारी को केवल ऊंचे ऊंचे पद से मतलब हैं आम जनता सहित बीमार लोगों की कोई परवाह नहीं बनती है।
इस संबंध में बीएमओ डॉ सुनील लटीयार का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी बनी हुई हैं जिससे मरीजों की समस्या अधिक हो रही है।

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