धार्मिक

मानव जीवन प्रभु की अमूल्य कृपा है : जयंती किशोरी

श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस निकली शोभायात्रा
रिपोर्टर: विपिन शर्मा
कुण्डाली।श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन को लेकर ग्राम में आज भव्य एवं श्रद्धामयी शोभायात्रा निकाली गई। यह आयोजन स्वर्गीय श्रीमती कृष्णा बाई एवं स्वर्गीय श्री टेबलसिंह जी मढ़रया की पुण्यस्मृति में मुख्य यजमान केशरबाई एवं देवी सिंह सतेरिया (बड़ारी) के द्वारा कराया जा रहा है।
इस पावन अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा का वाचन राष्ट्रीय धर्म प्रचारक सुश्री जयंती किशोरी जी शर्मा, श्रीधाम वृंदावन के श्रीमुख से किया जा रहा है। कथा का आयोजन पूरे सप्ताह प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु अमृतमयी कथा का रसपान करेंगे।
कथा के शुभारंभ से पूर्व आज ग्राम में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बैंड-बाजे, डीजे एवं घोड़ा-रथ पर सवार कथा प्रवक्ता सुश्री जयंती किशोरी जी के साथ श्रद्धालु भक्तगण चलते नजर आए। ग्राम की कन्याओं एवं महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर शोभायात्रा में भाग लिया, वहीं बड़ी संख्या में ग्रामवासी भी सहभागी बने।
शोभायात्रा के दौरान श्रीमद् भागवत पुराण एवं कथा प्रवक्ता का जगह-जगह पुष्पमालाओं, चंदन एवं अक्षत से श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया। शोभायात्रा राम मंदिर से प्रारंभ होकर पटेल मोहल्ला, मुख्य बाजार, न्यू मार्केट, सोनी मोहल्ला, पंडित मोहल्ला, हनुमान मंदिर एवं बस स्टैंड होते हुए कथा स्थल एचपी पेट्रोल पंप के सामने, ग्राम कुण्डाली पहुंची, जहां शोभायात्रा का समापन हुआ।
इस अवसर पर समस्त सतेरिया परिवार, समाजजन, ग्रामवासी एवं आसपास के ग्रामों से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
प्रथम कथा दिवस पर अपने भावपूर्ण उद्बोधन में सुश्री जयंती किशोरी जी शर्मा ने श्रद्धालुओं को जीवन का गूढ़ संदेश देते हुए कहा कि मानव जीवन प्रभु की अमूल्य कृपा है। यह जीवन हमें केवल सांस लेने के लिए नहीं, बल्कि सत्कर्म करने, दान और सेवा के मार्ग पर चलने, एक-दूसरे के दुःख–सुख में सहभागी बनने तथा प्रेम और करुणा का भाव अपनाने के लिए प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि इस संसार में जन्म लेने वाले प्रत्येक प्राणी के लिए मृत्यु अटल सत्य है—यहां कोई भी सदा के लिए नहीं ठहरता। किंतु जो मनुष्य अपने जीवन को प्रभु भक्ति से जोड़ लेता है, वही अपने जीवन को सार्थक बना लेता है। यह देह नश्वर है, समय के साथ नष्ट हो जाती है, लेकिन प्रभु भक्ति शाश्वत है। वही भक्ति मनुष्य को आत्मिक शांति प्रदान करती है और सच्चे अर्थों में अमरता की अनुभूति कराती है।

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