कृषि

कृषकों के लिए फसल संबंधी आवश्यक सलाह

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । अचानक मौसम बदलाव के कारण रबी फसलों में निम्न प्रकार से नुकसान देखा गया, जिसमें चना, मसूर, मटर, अलसी इत्यादि में पानी एवं तेज हवा के कारण फसलों का गिर जाना एवं फूलों का झड़ जाना इत्यादि जिसके कारण गिरी हुई फसल में ज्यादा नमी के कारण फफूंद जनित रोगों का आक्रमण होने की संभावना रहेगी। नियंत्रण के लिए फफूंदनाशक जैसे- थायोफेनेट मिथाइल+ कासूगामाइसिन 400 मि.ली./एकड़ की दर से छिड़काव करें एवं Fosetyl-AI80 WP फफूंदनाशक 250 ग्राम/एकड़ का छिड़काव कर सकते हैं।
किसान भाईयों को सलाह देते हुए कहा इस पानी के गिरने से गेंहूं की फसल में फायदा है, जहां-जहां पर चना एवं मटर में इल्ली की समस्या आ रही है, वहां पर किसान भाई इमामेक्टिन बेज्जोएट कीटनाशक 80-100 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव कर सकते हैं, मसूर में लाल पत्ती रोग जिसे हम (गेरूआ या रस्ट) बोलते हैं, उसके नियंत्रण हेतु निम्न कासूगामाइसेन+कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव किया जा सकता हैं।
वर्तमान में 01 से 3 फरवरी को बारिश की संभावना है, जो फसले कटाई की अवस्था में आ गई हैं जैसे- मटर या देशी वटरी की कटाई एक हफ्ते तक ना करें एवं जो फसले खलिहान में रखी है, उनको बारिश से बचाने का उपाय किए जाए।

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