सिहोरा जिला आंदोलन में बढ़ता आक्रोश, आश्वासन के चार दिन बाद भी सरकार की चुप्पी बरकरार

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । शनिवार को उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से हुई वार्ता के बाद आंदोलनकारियों को उम्मीद थी कि उपमुख्यमंत्री, सिहोरा विधायक, भाजपा जिलाध्यक्ष जैसे लोगो के आश्वासनों के बाद मुख्यमंत्री की ओर से बुलावा आएगा, या सरकार की तरफ से सिहोरा जिला को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय घोषित होगा । लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी न तो कोई आश्वासन मिला और न ही किसी स्तर से बातचीत की पहल हुई। इस खामोशी ने आंदोलनकारियों के आक्रोश को और तेज कर दिया है। आर पार की लड़ाई का संकल्प ले चुके सिहोरा वासी अब सरकार के बुलावे के इंतजार के साथ आंदोलन के लिए भी तैयारी करने लगे है।
पुराने बस स्टैंड पर बुधवार को भी क्रमिक अन्न सत्याग्रह जारी रहा है । आज सत्याग्रह पर बैठे सत्याग्रहियों में शिशिर पांडे, जगदीश वंशकार, प्रेमचंद चौधरी, नत्थू पटेल, पुरुषोत्तम गुप्ता, कृष्णकुमार कुररिया, संतोष पांडे, प्रदीप दुबे, रामजी शुक्ला और केदार परौहा शामिल रहे।
लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अब निर्णय में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सप्ताह भर से ज्यादा समय से चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन के बाद भी सरकार का मौन रवैया जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
समिति ने घोषणा की है कि मशाल जुलूस, विशाल रैली तथा पुनः आमरण सत्याग्रह जैसे उग्र चरण अब प्रारंभ किए जाएंगे।
समिति सदस्यों ने कहा कि सिहोरा की जनता वर्षों से जिला बनने की मांग कर रही है। हर बार की तरह आश्वासन और प्रतीक्षा नहीं चलेगी। अब निर्णायक जवाब सरकार को देना होगा। लंबे समय से सत्ता को हर स्तर पर समर्थन और मांग के समर्थन में संपूर्ण सिहोरा की एकजुटता के प्रदर्शन के बाद भी सरकार की बेरुखी अत्यंत दुखद है।
आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो लड़ाई और तेज होगी। निर्णय अब सरकार को लेना होगा, अन्यथा जनता अब पुनः दुगने आक्रोश के साथ सड़क पर उतरने को तैयार है।



