गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी पर जानिए महत्व, पूजा विधि एवं पूजन के शुभ मुहूर्त
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री लक्ष्मी
📚 गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी पर जानिए महत्व, पूजा विधि एवं पूजन के शुभ मुहूर्त
🔘 HIGHLIGHTS
🔹 गीता जयंती का दिन हिंदू धर्म में बहुत महत्व रखता है।
🔹 इस तिथि पर मोक्षदा एकादशी का व्रत भी रखने का विधान है।
🔹 इस साल गीता जयंती 11 दिसंबर 2024 को मनाई जाएगी।
👉🏼 11 दिसम्बर 2024: मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं क्योंकि इसी दिन श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध में कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। इसलिए इसी दिन गीता जयंती मनाई जाती है। इस साल 2024 को गीता जयंती की 5161वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। इस बार यह गीता जयंती 11 दिसंबर 2024 बुधवार को है। मान्यतानुसार इस दिन उपवास करने से मन पवित्र तथा शरीर स्वस्थ होता है।पापों से छुटकारा मिलता है तथा जीवन में सुख-शांति आती है।
⚛️ गीता जयंती शुभ मुहूर्त
द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने मोक्षदा एकादशी पर अर्जुन को मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाने वाली गीता का उपदेश दिया था।इसलिए इस तिथि को गीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी 11 दिसंबर को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी की शुरुआत 11 दिसंबर को देर रात 03 बजकर 42 मिनट से होगी और इसका समापन 12 दिसंबर को रात 01 बजकर 9 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार गीता जंयती 11 दिसंबर को मनाई जाएगी।
💧 अमृत काल: प्रात: 09:34 से 11:03 बजे के बीच।
🐃 गोधूलि मुहूर्त: शाम को 05:22 से 05:50 के बीच इसके बाद 06:47 तक पूजा कर सकते हैं।
✡️ गीता जयंती 2024 की तिथि, समय और शुभ योग
हर साल मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है, जिसे मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है।
एकादशी तिथि का प्रारंभ- 11 दिसंबर 2024 को सुबह 3 बजकर 42 मिनट से
एकादशी तिथि का समापन- 12 दिसंबर 2024 को सुबह 1 बजकर 09 मिनट तक रहेगा
ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, गीता जयंती 11 दिसंबर 2024 को मनाई जाएगी।
🤷🏻♀️ गीता जयंती पूजन नियम
सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें। भगवान श्रीकृष्ण के सामने व्रत का संकल्प लें। मंदिर को साफ करें और भगवान कृष्ण की एक मूर्ति रखें। उनका पंचामृत से अभिषेक करें। उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें और गोपी चंदन का तिलक लगाएं। पीले फूलों की माला अर्पित करें। देसी घी का दीया जलाएं। भगवान कृष्ण के वैदिक मंत्रों का जाप करें। भगवान को धनिया की पंजीरी, पंचामृत व केसर की खीर का भोग लगाएं।
भोग में तुलसी पत्र अवश्य डालें। भगवत गीता के श्लोक का पाठ करें। इसके अलावा भगवान कृष्ण के मंदिरों में दर्शन के लिए जाएं। इस दिन तामसिक चीजों से पूरी तरह परहेज करें।
💁🏻♀️ ऐसे करें भगवान श्रीकृष्ण और गीता जी की पूजा
▪️ सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
▪️ सबसे पहले, तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें अक्षत और फूल डालें। सूर्य देव को अर्घ्य दें और मंत्रों का जाप करें।
▪️ फिर, फूलों और रंगोली से सजी एक साफ चौकी पर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गंगाजल से प्रतिमा को स्नान कराएं।
▪️ भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र के साथ भगवद्गीता ग्रंथ भी रखें।
▪️ श्रीकृष्ण जी और गीता जी दोनों को चंदन, रोली और कुमकुम से तिलक लगाएं। फूलों की माला पहनाएं। धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
▪️ इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और गीता जी की आरती करें। आरती के दौरान भगवान श्री कृष्ण के भजन गाएं।
▪️ सबसे अंत में, गीता जी का पाठ करें या सुनें। गीता के उपदेशों पर मनन करें।
🤷🏻 गीता जयंती का महत्व
श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व सम्पूर्ण मानव लोक के लिए प्रासंगिक है। श्रीमद्भगवद्गीता की महिमा अगाध और असीम है। इस महान ग्रंथ की उत्पत्ति का दिन भी इसके समान पावन है, इसलिए इसे एक महत्वपूर्ण दिवस माना जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाया था कि किस प्रकार यह युद्ध धर्म की स्थापना के लिए जरूरी है। उन्होंने अर्जुन को धर्म की परिभाषा भी समझाई। एक मनुष्य रूप में अर्जुन के मन में उठने वाले सभी प्रश्नों का उत्तर श्री कृष्ण ने दिए। उसी का विस्तार भगवत गीता में समाहित है, जो आज मनुष्य जाति को उनके कर्तव्य एवं अधिकार का बोध करवाता है।



