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महाशिवरात्रि 15 फरवरी को, जान लें पूजा का मुहूर्त, विधि, मंत्र, कथा, आरती समेत संपूर्ण जानकारी

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री Զเधॆ कृष्णा
⚜️ महाशिवरात्रि 15 फरवरी को, जान लें पूजा का मुहूर्त, विधि, मंत्र, कथा, आरती समेत संपूर्ण जानकारी
🔘 HEADLINES
▪️ फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर मनाई जाती है महाशिवरात्रि।* ▪️ भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए खास है यह तिथि।*
▪️ साधक को मिलता है सुख-समृद्धि का आशीर्वाद।
👉🏼 हिंदू धर्म में फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर की जाने वाली महाशिवरात्रि की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. इस दिन भगवान शिव के साधक अपने आराध्य देवता का पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. मान्यता के अनुसार इसी पावन तिथि पर देवों के देव महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. भोले के भक्तों की मान्यता है कि जो कोई व्यक्ति महाशिवरात्रि पर विधि-विधान से शिवपूजा, जप, तप और व्रत करता है, उस पर शिव और पार्वती दोनों की कृपा बरसती है. आइए आचार्य श्री गोपी राम से विस्तार से जानते हैं कि महाशिवरात्रि व्रत की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि के बारे में…..
📅 महाशिवरात्रि 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि इस बार 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा.
💮 महाशिवरात्रि 2026 चार प्रहर पूजन का समय

आचार्य श्री गोपी राम के मुताबिक, महाशिवरात्रि की रात यदि कोई जागकर प्रहर के अनुसार पूजा करना चाहता है, तो प्रहर का समय इस प्रकार रहेगा.
प्रथम प्रहर 15 फरवरी को शाम 6 बजकर 37 मिनट से शुरू होगा.* दूसरा प्रहर 15 फरवरी की रात 9 बजकर 45 मिनट से आरंभ होगा.*
तीसरा प्रहर 15 फरवरी की मध्यरात्रि के बाद 12 बजकर 53 मिनट से शुरू होगा.* चौथा प्रहर 15 फरवरी की रात के बाद, 16 फरवरी की सुबह 4 बजे से प्रारंभ होगा यानी इसका समय सुबह 3 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा. ⚛️ पूजा विधि और ध्यान रखने योग्य बातें
महाशिवरात्रि पर महादेव को प्रसन्न करना बहुत सरल है, बशर्ते आपकी भक्ति सच्ची हो। इस दिन शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करने की परंपरा है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से कुछ बातें और भी महत्वपूर्ण हैं:* जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, शहद और दही अर्पित करें।*
बिल्व पत्र का महत्व: ‘त्रिदलं त्रिगुणाकारं’ – तीन पत्तियों वाला बेलपत्र महादेव को अर्पित करने से तीन जन्मों के पाप कट जाते हैं।* धतूरा और आंकड़े के फूल: महादेव को वह चीजें प्रिय हैं जो संसार त्याग देता है। धतूरा और आक के फूल उनके वैरागी स्वरूप को समर्पित किए जाते हैं।*
मंत्र जाप: ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप न केवल मन को शांत करता है बल्कि आपके आसपास एक सुरक्षा कवच भी बनाता है।
विशेष सावधानी: पूजा के दौरान मन की शुद्धि सबसे ऊपर है। इस पावन दिन पर झूठ, गुस्से और नकारात्मकता से पूरी तरह दूर रहें। महादेव केवल जल से नहीं, बल्कि शुद्ध भावों से प्रसन्न होते हैं।* 💧 महाशिवरात्रि 2026 का पारण कब किया जाएगा?
चूंकि, 15 फरवरी की रात महाशिवरात्रि की होगी, इसलिए पारण 16 फरवरी को किया जाएगा. 16 फरवरी को सुबह 6 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक पारण का समय रहेगा. आप इस अवधि के बीच कभी भी महाशिवरात्रि के व्रत का पारण कर सकते हैं.
✡️ महाशिवरात्रि 2026 निशीथ काल का समय

महाशिवरात्रि पर निशीथ काल 15 फरवरी की रात में, अर्थात 16 फरवरी की तिथि की शुरुआत में पड़ेगा. यानी इसका समय 16 फरवरी को रात 12 बजकर 09 मिनट से लेकर अर्धरात्रि 1 बजकर 01 मिनट तक रहेगा. यह अवधि पूजा, जप, अभिषेक और साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ और शुभ मानी जाती है.
📑 महाशिवरात्रि 2026 पूजन विधि
महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है. लोग जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा करते हैं. कई श्रद्धालु अपने घरों में भी रुद्राभिषेक कराते हैं और पूरे विधि-विधान से शिव परिवार की आराधना करते हैं. मान्यता है कि बेलपत्र अर्पित करने से विशेष कृपा मिलती है और धन से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं.
जो लोग मंदिर नहीं जा पाते, वे घर पर ही छोटा शिवलिंग स्थापित कर पूजा कर सकते हैं. शास्त्रों में बताया गया है कि घर के लिए बहुत बड़ा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए. अंगूठे के ऊपरी हिस्से से बड़ा शिवलिंग घर में स्थापित करना उचित नहीं माना जाता. सोना, चांदी, पीतल, पत्थर या मिट्टी का शिवलिंग शुभ माना जाता है. स्फटिक और पारद का शिवलिंग भी घर में रखा जा सकता है, लेकिन स्टील, लोहे या एल्युमिनियम से बने शिवलिंग की पूजा से बचना चाहिए. शिवलिंग के साथ गणेश जी, माता पार्वती, कार्तिकेय और नंदी की छोटी प्रतिमा भी रखना शुभ माना जाता है.
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📖 करें इस मंत्र का जाप
पूजा के दौरान ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जप करना बहुत शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इस मंत्र के जाप से डर और चिंता कम होती है और जीवन में शांति आती है. सच्चे मन से की गई शिव भक्ति महाशिवरात्रि को और भी फलदायी बना देती है.
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🤷🏻‍♀️ महा शिवरात्रि की कहानी और महत्व
महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे विशेष त्योहारों में से एक है। महाशिवरात्रि का बहुत महत्व है । यह भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह के साथ-साथ उनसे जुड़ी कई अन्य महत्वपूर्ण बातों का उत्सव है। लोग इस दिन को “भगवान शिव की रात” कहते हैं, जो उनके दिव्य प्रेम का प्रतीक है। भगवान शिव पुरुष का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मन या चेतना है, और देवी पार्वती प्रकृति का प्रतिनिधित्व करती हैं। जब वे एक साथ आते हैं, तो ऊर्जा और जीवन का सृजन होता है।_*
महाशिवरात्रि से जुड़ी एक कथा यह भी है कि सृष्टि की रचना के दौरान भगवान ब्रह्मा की सहायता से भगवान शिव महाशिवरात्रि की आधी रात को रुद्र रूप में प्रकट हुए थे । यह भी कहा जाता है कि इस रात भगवान शिव ने रुद्र तांडव नामक एक दिव्य नृत्य किया था। सृष्टि, संरक्षण और संहार का यह नृत्य उन्होंने अपनी पहली पत्नी सती के निधन की खबर सुनने के बाद किया था।
महाशिवरात्रि से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण कथा यह है कि जब देवता समुद्र मंथन कर रहे थे, तब उन्हें एक ऐसा विष मिला जो सब कुछ नष्ट कर सकता था। संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने विष पी लिया और सबकी जान बचाई। इसी कारण महाशिवरात्रि का त्योहार उनके भक्तों द्वारा ब्रह्मांड को बचाने के लिए उन्हें धन्यवाद देने का समय है।

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