मध्य प्रदेश

बंद पड़ी गौशाला में तीन दिन तक पड़ा रहा तेंदुए का शव, वन विभाग बेखबर

ग्रामीणों के जानकारी देने के 24 घंटे बाद मौके पर पहुंचा वन अमला
रायसेन । सांची जनपद के अंतर्गत आने वाले गीदगढ़ गांव की बंद पड़ी हुई गौशाला में तीन दिन पुराना तेंदुए का शव मिलने के मामले में वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ग्रामीणों ने बताया कि तेंदुआ तीन से गौशाला में मरा हुआ पड़ा रहा और विभाग को इसकी भनक तक नही लगी। और तो और उनके द्वारा सूचना देने के बाद भी विभाग के कर्मचारी 24 घंटे बाद मौके पर पहुंचे।
गौरतलब है कि रायसेन जिले के सांची विकासखंड अंतर्गत ग्राम गीदगढ़ में स्थित बंद पड़ी गौशाला में एक तेंदुए का दो से तीन दिन पुराना शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। शव से तेज बदबू आने पर ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची। तेंदुए की मौत का कारण अभी अज्ञात है, पोस्टमार्टम आने के बाद ही हो सकेगा खुलासा। बताया जा रहा है कि विभाग को एक दिन पहले ही शव की सूचना मिल गई थी, इसके बावजूद करीब 24 घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इस दौरान शव सड़ने लगा और बदबू पूरे क्षेत्र में फैल गई। मामले की गंभीरता देखते हुए वन विभाग ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम कराया और अंतिम संस्कार किया। तेंदुए की उम्र लगभग चार वर्ष बताई जा रही है। इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौके पर पहुंचीं डीएफओ प्रतिभा शुक्ला ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर दिया।
अब तक 30 मवेशियों पर कर चुका हैं हमला
पश्चिम वन क्षेत्र के ग्राम कायमपुर, नरखेड़ा, कुल्हाड़िया, गीदगढ़ और सत्ती गांव सहित आसपास क्षेत्र में तेंदुए के बढ़ते आतंक से भी ग्रामीण परेशान और भयभीत हैं। गांव में तेंदुआ लगातार मवेशियों को अपना शिकार बना रहा है। पिछले एक साल में तेंदुआ अब तक 30 मवेशियों पर हमला कर चुका है। कुछ दिन पूर्व भी एक ग्रामीण के घर के पीछे बंधे गाय के बछड़े पर तेंदुए ने हमला किया था। यह घटना रात करीब 2 बजे की थी। तेंदुए के हमले से बछड़ा गंभीर रूप से घायल हो गया था और जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए उसकी मौत हो गई थी। बताया कि एक साल पहले भी उनके एक अन्य बछड़े को तेंदुआ अपना शिकार बना चुका है। यह दूसरी बार था जब उनके मवेशी पर तेंदुआ ने हमला किया। गांव के लोग तेंदुए के डर से रातों में बाहर निकलने से डरते हैं। एक साल से तेंदुए के हमले की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और मवेशियों को बचाया जा सके।

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