शराब ठेकेदार नहीं मान रहे नियम, बिना बिल के बेंच रहे शराब

उमरियापान शराब दुकान में एमआरपी से अधिक दाम में बिक रही शराब
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । उमरियापान देशी अंग्रेजी शराब दुकान में ठेकेदार द्वारा सरकारी नियमों की धड़ल्ले से धज्जियां उड़ा रहे है। प्रदेश सरकार ने सितंबर 2021 में शराब के साथ बिल देने का नियम शुरू किया था। लेकिन उमरियापान शराब ठेकेदार इस नियम को लेकर गंभीर नहीं है। उमरियापान शराव दुकान में शराब खरीदने पर बिल नहीं देते यदि ग्राहक मांगता है तो दुकानदार उसे खरी खोटी सुना देते हैं या बिल देने से मना कर देता है। आबकारी विभाग की अनदेखी से शराब दुकानदार मनमानी कर रहे हैं। जिससे शुरा प्रेमियों में भारी रोष है। इसके बावजूद आबकारी महकमा इससे बेखबर है।
आबकारी नियम के अनुसार प्रत्येक सरकारी ठेके के बाहर बेची जाने वाली शराब की रेट लिस्ट लगानी होती है। लेकिन उमरियापान शराब दुकान के बाहर किसी भी प्रकार की रेट लिस्ट नही लगी हुई है। ऐसे में शुरा प्रेमियों को अधिक दामों में शराब खरीदना पड़ रहा है। ग्राहकों से वसूली जाने वाली अतिरिक्त राशि ठेकेदार व अधिकारियों की जेब में जाती है।
उमरियापान शराब दुकान के बाहर किसी प्रकार रेट लिस्ट चस्पा नही है गुमराह कर रहे शराब ठेकेदार प्रिंट रेट से ज्यादा रुपए वसूल कर रहे हैं। शुरा प्रेमियों ने बताया कि कभी कोई ग्राहक बिल को लेकर सवाल खड़े करते है तो जवाब मिलता हैं,की जहां शिकायत करना हो तो कर दो हमारा कुछ नहीं होगा। शराब चाहिए तो लो, वर्ना वापस चले जाओ ।
उमरियापान शराब दुकान में ओवररेट के नाम पर हर रोज हजारों रुपये की अवैध वसूली कर रहे है। उमरियापान लाइसेंस दुकान की आड़ में ठेकेदार द्वारा गाँव गाँव में अवैध शराब की ब्रांचे खोल रखी है। ग्रामीणों द्वारा पुलिस को अवगत करवाते है लेकिन मोटे सुविधा शुल्क के चलते पुलिस सिर्फ ठेकेदारों की ही सुनती है।
खरीदी गई शराब का बिल मांगने पर दुत्कार देते है सेल्समैन
बिल मांगने पर शराब कारोबारी द्वारा बिल नहीं दिया जाता। यदि किसी ग्राहक ने बिल मांग भी लिया तो उसे बिल नहीं दिया जाता। ग्राहक फजीहत से बचने के लिए बिल की डिमांड नहीं करता। जागो ग्राहक जागो की पंच लाइन चरितार्थ हो जाए तो शराब की दुकानों पर ओवर रेट पर शराब बिकनी बंद हो जाए। लेकिन आबकारी विभाग का रवैया उदासीन होने के कारण शराब के दुकानदार इसका फायदा उठाते हैं। लगातार समाचार प्रकाशित करने के बाद भी आबकारी महकमा चैन की नींद सो रहा है। ग्रामीणों द्वारा विभागीय अधिकारियों को बार-बार अवगत करवाने के बाद भी इस और विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है। विभागीय अधिकारियों ने आंखें मूंदकर इस काम के लिए ठेकेदार को मौन स्वीकृति दे रखी है।



