महाशिवरात्रि? शुभ मुहूर्त पूजा विधि एवं शुभ योग

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 महाशिवरात्रि? शुभ मुहूर्त पूजा विधि एवं शुभ योग
🔘 HIGHLIGHTS
🔹 हर साल फाल्गुन महीने में महाशिवरात्रि मनाई जाती है।
🔹 इस दिन भगवान शिव संग मां पार्वती की पूजा की जाती है।
🔹 फाल्गुन महीने में ही रंगों का त्योहार होली मनाई जाती है।
📚 हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का त्यौहार प्रमुख व्रत-पर्व में से एक माना जाता है। पूरे देश में शिवरात्रि की खास धूम देखने को मिलती है। काशी समेत देश के अलग-अलग राज्यों में महाशिवरात्रि के दिन शिव बारात निकाली जाती है। बता दें कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन भक्तगण उपवास रखकर महादेव और मां गौरी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा करने से उन्हें मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। बता दें कि महाशिवरात्रि की पूजा दिन के साथ ही रात में भी की जाती है। ब्रह्म मुहूर्त की तरह ही महाशिवरात्रि की रात्रि पहर की पूजा भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। तो आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से महाशिवरात्रि के दिन रात्रि चार प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
⚛️ पूजा का मुहूर्त: महाशिवरात्रि पर रात्रि के चार प्रहरों में पूजा का आयोजन किया जाता है। जिसमें हर प्रहर की विशेष पूजा विधि होती है। महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजा का विशेष महत्व होता है। आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इस साल यह पूजा 27 फरवरी की मध्य रात्रि 12:27 बजे से रात 1:16 बजे तक की जाएगी। इसके अलावा महाशिवरात्रि पर 26 फरवरी को रात्रि के प्रथम प्रहर की पूजा का समय शाम 6:43 बजे से रात 9:47 बजे तक, द्वितीय प्रहर की पूजा रात 9:47 बजे से 27 फरवरी की 12:51 बजे तक एवं तृतीय प्रहर की पूजा 27 फरवरी को रात 12:51 बजे से सुबह 3:55 बजे तक होगी। वहीं, महाशिवरात्रि के चतुर्थ प्रहर की पूजा 27 फरवरी की सुबह 3:55 बजे से 6:59 बजे तक होगी।
💧 व्रत पारण का समय: व्रत के पारण समय की बात करें तो 27 फरवरी को शिवरात्रि पारण का समय सुबह 06:48 से 08:54 बजे का है।
💮 पूजा-विधि: स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें। शिव परिवार सहित सभी देवी-देवताओं की विधिवत पूजा करें। अगर व्रत रखना है तो हाथ में पवित्र जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें। फिर संध्या के समय घर के मंदिर में गोधूलि बेला में दीपक जलाएं। फिर शिव मंदिर या घर में भगवान शिव का अभिषेक या रुद्राभिषेक करें। भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, मदार पुष्प, शहद, गंगाजल, धतूरा,अक्षत, चंदन, फल, नैवैद्य आदि अर्पित करें। भोग लगाएं। महाशिवरात्रि व्रत की कथा सुनें। फिर घी के दीपक से पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आरती करें। अंत में ॐ नमः शिवाय का मंत्र-जाप करें। अंत में क्षमा प्रार्थना भी करें।
☀️ महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा
बता दें कि महाशिवरात्रि की पूजा रात्रि के समय एक या चार बार की जा सकती है। रात्रि के चार प्रहर होते हैं और हर प्रहर में शिव पूजा की जा सकती है। महाशिवरात्रि के दिन प्रथम प्रहर रात्रि पूजा शाम 06 बजकर 43 मिनट से रात 09 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। दूसरा प्रहर रात्रि पूजा रात 09 बजकर 31 मिनट से 27 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। तीसरा प्रहर रात्रि पूजा 27 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 51 मिनट से भोर 3 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। वहीं चौथा प्रहर रात्रि पूजा 27 फरवरी को भोर 3 बजकर 55 मिनट से सुबह 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।
👉🏼 महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर क्या अर्पित करें:
▪️ दूध: दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है जिसे शिवलिंग पर अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है।
▪️ दही: दही शुक्र का प्रतीक हैं इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन में समृद्धि आती है।
▪️ शहद: शहद को सूर्यदेव का प्रतीक माना जाता है और इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से तेज और यश की प्राप्ति होती है।
▪️ घी: घी को अग्नि का प्रतीक माना जाता है जिसे शिवलिंग पर अर्पित करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
▪️ गंगाजल: गंगाजल को मोक्ष का प्रतीक माना जाता है और भगवान शिव का इससे जलाभिषेक करने से सभी पाप नष्ट होते हैं।
▪️ बेल पत्र: बेल पत्र भगवान शिव का प्रिय माना जाता है और इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।_
▪️ धतूरा: धतूरा भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है और इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से शत्रुओं का नाश होता है।
▪️ फूल: फूल प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है और इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
▪️ चावल: चावल अन्न का प्रतीक माना जाता है और इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
🪐 महाशिवरात्रि पर बन रहे हैं 2 राजयोग
💁🏻 इस साल महाशिवरात्रि के दिन शश और मालव्य राजयोग बनेगा।इसमें शश राजयोग का निर्माण न्याय व दंड के देवता शनि देव तो दैत्यों के गुरू शुक्र ग्रह मालव्य राजयोग बनाएंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्तमान में धन, वैभव, ऐश्वर्य के दाता शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में विराजमान है, जिससे मालव्य राजयोग का निर्माण हुआ है।वही शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान है, जिससे शश राजयोग बना है।
💫 शश राजयोग को पंचमहापुरुष योगों में से एक माना जाता है। जब शनि लग्न भाव से या चंद्र भाव से केंद्र भाव पर हो यानि शनि देव यदि किसी कुंडली में लग्न अथाव चंद्रमा से 1, 4, 7 या 10वें स्थान में तुला, मकर या कुंभ राशि में विराजमान हो तो ऐसी कुंडली में शश योग का निर्माण होता है। इस राजयोग से धन और शौहरत में वृद्धि होती है।व्यक्ति राजाओं जैसी जिंदगी जीता है।
✡️ मालव्य राजयोग शुक्र से संबंधित है, जिस भी जातक की कुंडली में शुक्र लग्न से अथवा चन्द्रमा से केन्द्र के घरों में स्थित है अर्थात शुक्र यदि कुंडली में लग्न अथवा चन्द्रमा से 1, 4, 7 अथवा 10वें घर में वृष, तुला अथवा मीन राशि में स्थित है तो कुंडली में मालव्य राजयोग बनता है। अगर शुक्र ग्रह पर सूर्य या गुरु की दृष्टि पड़ रही है तो इस राजयोग का फल व्यक्ति को कम प्रदान होगा। क्योंकि सूर्य और गुरु का शुक्र के साथ शत्रुता का भाव है।
llॐll⚜️”ॐ नमः शिवाय”⚜️llॐll



