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प्रदेश से एक्सपोर्ट होने वाले गेहूं पर मंडी टैक्स नहीं लगाया जायेगा : मुख्यमंत्री

भोपाल। मध्य प्रदेश के गुणवत्तापूर्ण गेहूं के निर्यात और मध्यप्रदेश के किसानों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से निर्यातकों के साथ नई दिल्ली में केंद्रीय उद्योग मंत्री पीयूष गोयल एवं निर्यातकों की महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। मध्यप्रदेश गेहूं के उत्पादन का अब केंद्र है। गत 2 वर्षों से मध्यप्रदेश सरकार लगभग 1 करोड़ 29 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी कर रही हैं। गेहूं की गुणवत्ता बहुत अच्छी है। प्रदेश के शरबती को तो गोल्डन ग्रेन कहा जाता है। मध्यप्रदेश के गेहूं की MPWheat के नाम से हर जगह साख है। हमारे पास गेहूं के भण्डार भरे हैं। एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए हमने कुछ निर्णय लिये हैं। प्रदेश से एक्सपोर्ट होने वाले गेहूं पर मंडी टैक्स नहीं लगाया जायेगा। भोपाल में एक्सपोर्ट सेल के जरिए निर्यातकों को हर सुविधा उपलब्ध करायेंगे। प्रदेश में एक लाइसेंस पर कोई भी कंपनी या व्यापारी कहीं से भी गेहूं खरीद सकेगा। मंडी में ऑनलाइन नीलामी की प्रकिया उपलब्ध है, एक्सपोर्टर किसी स्थानीय व्यक्ति से पंजीयन करवा कर गेहूं खरीद सकेंगे। गेहूं की वैल्यू एडिशन और गुणवत्ता प्रमाणीकरण के लिए प्रदेश की प्रमुख मंडियो में इंफ्रास्ट्रक्चर, लैब की सुविधाएं निर्यातकों को उपलब्ध करवाई जायेंगी।
प्रमुख मंडियों में एक्सपोर्ट हाउस के लिए यदि निर्यातकों को स्थान की आवश्यकता होगी तो अस्थाई तौर पर रियायती दरों पर मुहैया करवायेंगे। निर्यातक को गेहूं की ग्रेडिंग करना पड़ी तो इसके खर्च की प्रतिपूर्ति की जायेगी। रेलवे ने भरोसा दिया है कि रैक की भी दिक्कत नहीं आने दी जायेगी। निर्यातक किसी भी पोर्ट से अपना गेहूं निर्यात कर सकते हैं। निर्यातकों ने जो सुविधा मांगी, वह सब हमने देने का प्रयास किया है। मुझे विश्वास है कि इन फैसलों से निर्यात बढ़ेगा और मध्यप्रदेश के हमारे किसानों को फायदा होगा। इस पूरी प्रक्रिया में तुर्की और मिस्र के संबंधित राजदूत गेहूं का निर्यात बढ़ाने में मदद करेंगे।

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