Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 03 नवम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 03 नवम्बर 2025
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ *दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं । *सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
*सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है। *जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
*सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126_
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 02:06 AM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 03:05 PM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह है। इस नक्षत्र के देवता अहिर्बुध्न्य हैं, जो भगवान विष्णु के एक अंश हैं।
⚜️ योग – हर्षण योग 07:39 PM तक, उसके बाद वज्र योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 03:40 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 02:05 ए एम, नवम्बर 04 तक गर
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:35:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:34:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:51 ए एम से 05:43 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:17 ए एम से 06:34 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:26 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:34 पी एम से 06:00 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:34 पी एम से 06:52 पी एम
💧 अमृत काल : 10:41 ए एम से 12:09 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 04
❄️ रवि योग : 03:05 पी एम से 06:35 ए एम, नवम्बर 04
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : रवि योग/ वैकुंठ चतुर्दशी का उपवास/ पंचक जारी/ योगेश्वर द्वादशी/ सोम प्रदोष व्रत/ राष्ट्रीय गृहिणी दिवस, राष्ट्रीय सैंडविच दिवस, विश्व जेलिफ़िश दिवस, अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिज़र्व दिवस, ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ स्थापना दिवस, भारतीय इतिहासकार रमेशचंद्र मजूमदार जन्म दिवस, अभिनेता पृथ्वीराज कपूर जन्म दिवस, फिल्म संगीतकार लक्ष्मीकांत जन्म दिवस, अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी जन्म दिवस, मानव स्वास्थ्य दिवस, भारतीय शहीद परमवीर चक्र’ से सम्मानित सोमनाथ शर्मा स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस (सप्ताह)
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🗽 Vastu tips ⛲
बेडरूम की दीवारों और पर्दों के रंग भी रिश्तों पर असर डालते हैं। हल्के गुलाबी, क्रीम, या हल्के पीले रंग का प्रयोग शुभ माना जाता है। बहुत गहरे या नीले रंगों से बचना चाहिए क्योंकि ये मन में नकारात्मकता और उदासी ला सकते हैं।
*कमरे की सजावट से बनती है सकारात्मक ऊर्जा आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, शादीशुदा जोड़े का बेड लकड़ी का होना चाहिए। लोहे या स्टील का बेड नेगेटिव एनर्जी को आकर्षित करता है। साथ ही, डबल बेड में दो अलग-अलग गद्दे नहीं रखने चाहिए। एक ही गद्दे का उपयोग करने से रिश्तों में एकता और सामंजस्य बना रहता है। *चित्र और फोटो भी करते हैं मन पर असर बेडरूम में कभी भी युद्ध, हिंसा या दुख दर्शाने वाली तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए। इनसे मनोवैज्ञानिक रूप से नकारात्मक ऊर्जा आती है। इसकी जगह प्रेम, शांति और खुशहाली दिखाने वाली तस्वीरें लगाएं। पति-पत्नी की मुस्कुराती हुई फोटो दक्षिण दिशा की दीवार पर लगाना शुभ माना गया है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
*कभी ऐसा वक्त आया है जब सब कुछ उलझा हुआ लगे? नौकरी में मन नहीं लगता, घर में शांति नहीं रहती, रिश्तों में दूरी बढ़ जाती है —और अंदर से बस एक सवाल उठता है — “भगवान, आखिर मेरे साथ ही क्यों?” ऐसे समय में ज्यादातर लोग हार मान लेते हैं या घबरा जाते हैं। *लेकिन असली समाधान वहीं शुरू होता है, जहाँ हम भीतर झाँकना शुरू करते हैं।
*भगवान हमें कभी नहीं छोड़ते — वो बस चाहते हैं कि हम थोड़ा रुकें, थोड़ा सोचें और थोड़ा भीतर उतरें। अगर आपकी ज़िंदगी में इस समय कुछ भी सही नहीं चल रहा है, *तो ये आध्यात्मिक उपाय आपको दिशा, शांति और नई शुरुआत दे सकते हैं। घर में दीप जलाएं — और मन में विश्वास
*हर शाम एक दीपक जलाइए। भले ही एक छोटी सी बात लगे, लेकिन यह आपके मन की रोशनी जगाता है। *जिस घर में रोज़ दीप जलता है, वहाँ नकारात्मक ऊर्जा टिकती नहीं।
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
चंद्रप्रभा वटी ठीक करती है किडनी सम्बन्धी रोग किडनी के खराब होने पर मूत्र की उत्पत्ति बहुत कम होती है जो शरीर में अनेक रोग उत्पन्न करता है एवं मूत्राशय में विकृति होने पर मूत्र आने पर जलन, पेडू में जलन, मूत्र का रंग लाल होना या अधिक दुर्गन्ध होना इन सब में चन्द्रप्रभा वटी अति उपयोगी है। इससे गुर्दों की कार्यक्षमता बढ़ती है जो शरीर को साफ करते हैं। बढ़े हुए यूरिक एसिड और यूरिया आदि तत्वों को यह शरीर से बाहर निकालती है। अगर आप किडनी रोगों से पीड़ित हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेकर चंद्रप्रभा वटी का उपयोग करें.
*मूत्र सम्बन्धी विकारों मे यह वटी पेशाब की परेशानियों और वीर्य विकार की काफी लाभकारी तथा प्रसिद्ध दवा है। मूत्र आने पर जलन, रुक–रुक कर कठिनाई से मूत्र आना, मूत्र में चीनी आना, मूत्र में एल्ब्युमिन जाना, मूत्राशय की सूजन तथा लिंगेन्द्रिय की कमजोरी इससे शीघ्र ठीक हो जाती है।
🪙 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ जब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लिया था, तो उनकी ऊँचायी 75,000 किलोमीटर और चौड़ायी 40,000 किलोमीटर थी। पृथ्वी के आकार के हिसाब इतना कद होना ज़रूरी था। क्योंकि इस समय पृथ्वी का आकार भी 40,000 किमी के आसपास है। *ऐसी पौराणिक मान्यता है कि वराह अवतार में उन्होंने पृथ्वी को ब्रह्माण्ड के एक गर्भोदक नाम के सागर से उठाया था, जिसे काज्मिक ओसियन भी कहा जाता है, जिसे एक करोड़ योजन चौड़ा बताया गया है।
*इसका अर्थ यह है कि यह सागर 1.5 करोड़ किमी चौड़ा है। इस तरह इस सागर में 1 हज़ार पृथ्वी समा सकती थीं। इतना विशाल महासागर है यह, हम तो केवल कल्पना कर सकते हैं। *ये वही महासागर है। जहाँ पृथ्वी से अन्नत कोटि दूर भौतिक भगवान महाविष्णु शयन करते हैं। उस हिस्से को, जिस हिस्से में वो रहते हैं। उसे क्षीर सागर कहते हैं। इसलिये भगवान विष्णु को गर्भोदकशायी भगवान विष्णु यानी गर्भोदक सागर में सोने वाले भगवान विष्णु कहा जाता है।
*इसके अलावा सवाल यह भी है कि भगवान ने वराह का ही रूप क्यों बनाया? किसी और जानवर का भी तो रूप बना सकते थे? वह क्यों नहीं…? *इसका भी कारण था। क्योंकि वराह जंगली सूअर से मिलता जुलता प्राणी है। यह प्राणी अक्सर कीचड़ में रहता है और इसे अन्दर तक मिट्टी खोदने की आदत होती है। वह मिट्टी या पानी के अन्दर की चीज़ों को अपनी थूथनी से खोदकर उसे ढूँढ सकता है। उसके सूंघने की क्षमता भी अधिक होती है।
*यही कारण था कि वे वराह ही बने और सागर की चट्टानों के नीचे तलहटी में छुपे हिरण्याक्ष के पास पृथ्वी को सूंघते हुये पहुँच गये और उन चट्टानों को खोदकर उसे खोज निकाला। फिर पृथ्वी को मुक्त किया। *भूगोल यानी जियोग्राफी को तब भी भारत में भूगोल ही कहा जाता था, जिसका अर्थ भू यानी पृथ्वी और गोल का अर्थ गोल ही होता है। यानी भारत को पहले ही पता था कि पृथ्वी गोल है।
*दक्षिण भारत में कई ऐसे हज़ारों वर्ष पुराने मन्दिर हैं, जहाँ वराह देव की मूर्ति है। उसमें पृथ्वी गोल ही है। वहीं 16 वीं शताब्दी में तो पश्चिम के रोमन कैथोलिक चर्च ने गैलीलियो को इसलिये कैद दे दी कि उन्होंने इस सिद्धान्त का समर्थन किया कि पृथ्वी गोल है और सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है! ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः…🙏🚩 •••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤•••• ⚜️ *त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
*_आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

