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Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 17 जनवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग
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शनिवार 17 जनवरी 2026
17 जनवरी 2026 दिन शनिवार को माघ मास के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि है। आप रात्रि व्यापिनी रटन्तीकलिका का पूजन बंगाल में किया जाता है। आज सूर्योदय से पहले प्रत्येक सनातनियों को यमतृपण अवश्य करना चाहिए। आप ग्रहों का कुछ ऐसा संयोग हो रहा है कि यदि आज शिव मंदिर जाएं तो इससे दरिद्रता स्वयं ही दुर भाग जाएगी। इसलिए आज मंदिर अवश्य जाएं और मंदिर जाकर पहला घी का दिप शिवमन्दिर में जलाएं। दूसरा विल्ववृक्ष के जड़ में और तीसरा दिपक आंवले के निचे अवश्य जलाना चाहिए। इससे आपकी कोई भी विशिष्ट मनोकामना हो पूरी अवश्य हो जाएगी। अगर आज ग्रहदोषों की शान्ति कर्म आदि करवाया जाए, तो सफलता की गारंटी होती है। साथ ही आज शिवलिंग के उपर पहले पञ्चामृत और बाद में सहद का लेपन अवश्य करें। और दूसरा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति हेतु आज आंवले की जड़ में घी के दिपक में एक चुटकी हल्दी डालकर जला देवें। बिटिया की शादी में विलंब हो रहा हो तो नहीं होगा। अर्थात शीघ्र ही विवाह का योग बन जाएगा। आप सभी सनातनियों को “रटन्तीकलिका के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। *शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शनिवार माघ माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 12:03 AM तक उपरांत अमावस्या
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मूल 08:12 AM तक उपरांत पूर्वाषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मूल नक्षत्र के देवता निरिती देव जी और स्वामी केतु हैं। जिसके स्वामी गुरु हैं।
⚜️ योग – व्याघात योग 09:17 PM तक, उसके बाद हर्षण योग
प्रथम करण विष्टि 11:16 AM तक
द्वितीय करण : शकुनि 12:04 AM तक, बाद चतुष्पद
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:54:30
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:29:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:27 ए एम से 06:21 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त – 12:10 पी एम से 12:52 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त – 02:17 पी एम से 02:59 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 05:45 पी एम से 06:12 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या – 05:48 पी एम से 07:09 पी एम
💧 अमृत काल – 05:01 ए एम से 06:45 ए एम, जनवरी 18
🗣️ निशिता मुहूर्त – 12:04 ए एम से 12:58 ए एम, जनवरी 18
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रटन्तीकलिका पावन व्रत” भद्रा/ गण्ड मूल/ आडल योग/ विडाल योग/ शबे मिराज/ अमावस्या प्रारम्भ उ. रात्रि 00.03/ प्रसिद्ध मार्क्सवादी नेता ज्योति बसु स्मृति दिवस, भारतीय अभिनेता एम.जी. रामचंद्रन जन्म दिवस, साहित्यकार रांगेय राघव जन्म दिवस, गीतकार पटकथा लेखक जावेद अख्तर जन्म दिवस, राष्ट्रीय उत्तम दर्जे का दिवस, लेखक महावीर सरन जैन जन्म दिवस, राष्ट्रीय अवैध शराब विक्रेता दिवस, यदुवंश गौरव सम्राट कृष्णदेव राय जयन्ती, विश्व जलपक्षी दिवस, राष्ट्रीय क्लासी दिवस, पोपाय® द सेलर मैन दिवस, राष्ट्रीय बूटलेगर दिवस, राष्ट्रीय हॉट बटरड रम दिवस, बाबू गुलाबराय जयन्ती, अभिनेत्री सुचित्रा सेन स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय), राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह 11 जनवरी- 17 जनवरी तक
✍🏼 *तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।। 🗼 *_Vastu tips* 🗽
पीस लिली: शांति-सुकून देने वाला पौधा पीस लिली अपने सुंदर सफेद फूलों के साथ घर की शोभा बढ़ाती है। यह पौधा वातावरण से हानिकारक तत्वों को अवशोषित कर हवा की गुणवत्ता सुधारता है। इसे लिविंग रूम या बेडरूम में रखना शुभ माना जाता है, जिससे घर में सुकून और पॉजिटिविटी बनी रहती है।
*एलोवेरा: सेहत-शुद्ध वातावरण का मेल एलोवेरा हवा को साफ रखने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। यह विषैली गैसों को सोखने में मदद करता है। इसकी पत्तियों से निकलने वाला जेल त्वचा और बालों के लिए उपयोगी होता है। बालकनी या बेडरूम में इसे रखना लाभकारी माना जाता है। *मनी प्लांट: धन का प्रतीक ज्यादातर घरों में मनी प्लांट लगा होता है, जिसे वास्तु में समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह पौधा हवा में मौजूद हानिकारक गैसों को कम करने में मदद करता है और वातावरण को ताजा बनाता है। इसे घर की उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अदरक पानी के फायदे
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पाचन में सुधार- अदरक पानी से पेट की समस्या जैसे- गैस, कब्ज और अपच में राहत मिलती है।
*वजन घटाने में मदद- अदरक से फैट बर्न होता है और आपको वजन घटाने में मदद मिलती है।
*इम्युनिटी बढ़ाए- अदरक पानी की तासीर गर्म होती है जिसकी वजह से यह सर्दी-खांसी की समस्या में राहत दिलाता है और इंफेक्शन को कम करता है। *सूजन और दर्द में राहत- अदरक में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं।
*ब्लड सर्कुलेशन बेहतर- अदरक पानी से आपका ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। *अदरक पानी कितने दिन पीना चाहिए?
*अदरक पानी कितने दिनों तक पीना चाहिए, यह आपके शरीर और जरूरतों पर निर्भर करता है। आप किस उद्देश्य से इसे पीना चाहते हैं वह भी एक बड़ा कारक हो सकता है। 🫘 *आरोग्य संजीवनी* 🍯 संयमित आहार-विहार के साथ त्रिफला का सेवन करने वाले व्यक्तियों को हृदयरोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, नेत्ररोग, पेट के विकार, मोटापा आदि होने की संभावना नहीं होती। यह कोई 20 प्रकार के प्रमेह, विविध कुष्ठरोग, विषमज्वर व सूजन को नष्ट करता है। अस्थि, केश, दाँत व पाचन-संस्थान को बलवान बनाता है। इसका नियमित सेवन शरीर को निरामय, सक्षम व फुर्तीला बनाता है। यदि गर्म पानी के साथ सोते समय एक चम्मच ले लिया जाए तो क़ब्ज़ नही रहता। *त्रिफला पाचन और भूख को बढ़ाने, लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि करने और शरीर में वसा की अवांछनीय मात्रा को हटाने में सहायता के लिए इस्तेमाल किया जाता है।मुँह में घुलने पर त्रि‍फला का उपयोग रक्त के जमाव और सिर दर्द को दूर करने के लिए किया जाता है। इसके अन्य फ़ायदों में रक्त शर्करा के स्तरों को बनाए रखने में मदद करना और त्वचा के रंग और टोन में सुधार लाना शामिल हैं।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ महर्षि वेदव्यास महर्षि पराशर के कानीन पुत्र थे। कानीन पुत्र उन्हें कहा जाता था जो विवाह से पूर्व किसी कन्या के गर्भ से जन्म लेता था, जैसे कि कर्ण। वेदव्यास की माता का नाम सत्यवती था जो भीष्म की भी माता थी। *सत्यवती मछुवारों के सरदार की पुत्री थी जो पथिकों को नौका में नदी पार करवाती थी। वो अभूतपूर्व सौंदर्य की स्वामिनी थी। मछलियों का व्यापार करने में कारण सत्यवती के शरीर से मछली की गंध आती रहती थी जिस कारण उनका नाम “मत्स्यगंधा” भी पड़ गया।
*एक बार पराशर ऋषि सत्यवती के नाव में बैठे। बीच नदी में उसे देख पराशर ऋषि के मन मे काम का भाव उत्पन्न हुआ जिसे उन्होंने सत्यवती को बताया। किन्तु सत्यवती ने उनसे कहा कि वो विवाहित नही है। तब पराशर ऋषि ने कहा कि वो सदैव अक्षतयोनि ही रहेगी, अर्थात उनका कौमार्य कभी भंग नही होगा और वो सदा युवती ही बनी रहेगी। ऐसा ही वरदान आगे चल कर महर्षि व्यास ने द्रौपदी को भी दिया था। उसके अतिरिक्त पराशर मुनि ने सत्यवती के शरीर से मछली की गंध समाप्त कर दी और उसे एक दिव्य गंध प्रदान की जो 1 योजन तक फैली रहती थी। तब से वो “दिव्यगन्धा” कहलाई। *पराशर ऋषि ने योगबल से नदी में कोहरा उत्पन्न कर सत्यवती के साथ समागम किया। उनके वरदान के कारण सत्यवती पुनः कन्या बन गयी। आगे चल कर उन्हें एक पुत्र प्राप्त हुआ जिसका वर्ण काला था। लोकापवाद के डर से सत्यवती और उसके पिता ने उसे एक द्वीप पर छोड़ दिया। इसीलिए उनका नाम “कृष्णद्वैपायन व्यास” पड़ा। आगे चलकर वे अपने पिता के समान ही महान ऋषि बने और महाभारत की रचना भी की।
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।।

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