भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जीवन यापन, मर्यादा और अनुशासन में रहने की प्रेरणा लेना चाहिए : मनोज शास्त्री
सुंदरम कालोनी में श्रीमद् भागवत कथा छटवे दिन बताया जीवन में सत्कर्म करने का महत्व
सिलवानी। बरेली रोड स्थित सुंदरम कॉलोनी में राजकुमार रघुवंशी एवं उनके परिजनो द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन गया है जिसमे कथावाचक पंडित मनोज शास्त्री (भिंड वालो) के द्वारा आयोजित की जा रही संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञं के छटवे दिवस मंगलवार को पंडित मनोज शास्त्री के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण- रुकमणी विवाह का वर्णन कर श्रद्वालुओं को भाव विभोर कर दिया। कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्वालु पहुंचे। उन्होने कहा कि भगवान कृष्ण का विवाह रुकमणी के साथ संपन्न होता है तथा वह द्वारिका में निवास करते है। दैत्य द्वारा 16100 युवतियों को बंदी बना कर रखा गया था। जिसे कि भगवान श्रीकृष्ण ने मुक्त कराया। दैत्यों से मुक्त होते ही युवतियों के द्वारा श्रीकृष्ण को पति रुप में वरण किया गया। भगवान श्रीकृष्ण ने रास लीला के माध्यम से जीवन में रसो का समावेश किया है। श्रीकृष्ण गोपियों के साथ पवित्र भावना मय प्रेम पूर्ण रास रचाते हैं, जिसमें तनिक भी वासना का समावेश नही है। सर्व प्रथम श्रीकृष्ण के द्वारा शरद पूर्णिमा को महारास रचाया गया था।
कथा वाचक ने कहा कि मनुष्य को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जीवन यापन, मर्यादा और अनुशासन में रहने की प्रेरणा लेना चाहिए । श्रीकृष्ण को लीला पुरुषोत्तम कहा गया है, उनके कहे गए वाक्यों का जीवन में अनुशरण किया जाना चाहिए। कि मर्यादाओं से जीवन यापन करो, उनकी लीला शिक्षा मिलती है भागवत कथा का मूल उददेशय है कि भगवत भक्ति से वास्तविक मोक्ष प्राप्त बताया है।
पंडित मनोज शास्त्री नेे भगवान श्रीकृष्ण की रास लीला का आनंद प्रदान करते हुए बताया कि किस प्रकार शरद पूर्णिमा की दिव्य चांदनी रात में महारास का अद्भुत चि़त्रण किया। जिसका उद्देष जीवात्मा का परमात्मा से मिलन है। सत्य धर्म को परिभाषित करते हुए उन्होने बताया कि सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नही हो सकता है। प्रत्येंक व्यक्ति को सत्य धर्म का पालन करना चाहिए। सत्य धर्म का पालन किए बगैर जीवन में सफलता को प्राप्त नही किया जा सकता हैं।



