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शनि प्रदोष व्रत, जानें शिव पूजन शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व महत्व

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
–••●☆सब शिव है☆●••—-*
🔮 शनि प्रदोष व्रत, जानें शिव पूजन शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व महत्व
🥏 महत्वपूर्ण जानकारी
♦️ शुक्ल पक्ष प्रदोष व्रत, शनि प्रदोष व्रत
♦️ शनिवार, 04 मार्च 2023
♦️ प्रदोष व्रत प्रारंभ : 04 मार्च 2023 को सुबह 11 बजकर 43 मिनट पर
♦️ प्रदोष व्रत समाप्ति : 05 मार्च 2023 को दोपहर 02 बजकर 7 मिनट पर
📚 हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ माना गया है। हर महीने दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं जिसमें एक शुक्ल पक्ष और एक कृष्ण पक्ष। शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। प्रदोष व्रत का पूजन प्रदोष काल में करना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं कि जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष साथ-साथ होते हैं तो शिव पूजन बेहद शुभफलदायी होता है। ज्योतिष आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती व शनि ढैय्या से पीड़ित जातकों को शनि प्रदोष व्रत करने से शनि प्रकोप से राहत मिलती है। इस बार शनि प्रदोष व्रत 04 मार्च 2023 को है।
📆 शनि प्रदोष व्रत 2023 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 4 मार्च 2023 को सुबह 10 बजकर 13 मिनट पर होगा और इसका समापन 5 मार्च 2023 को दोपहर 12 बजकर 37 मिनट पर हो जाएगा। प्रदोष काल में पूजा के कारण यह व्रत 4 मार्च 2023, शनिवार के दिन रखा जाएगा। बता दें कि इस दिन पूजा मुहूर्त संध्या 06 बजकर 35 मिनट से रात्रि 08 बजकर 54 मिनट तक ही रहेगा। खास बात यह है कि इस दिन अत्यंत शुभ योग अर्थात रवि योग का निर्माण हो रहा है, जिसकी शुरुआत शाम 05 बजकर 11 मिनट से होगी और 05 मार्च को सुबह 05 बजकर 07 मिनट पर होगा। शास्त्रों में बताया गया है कि इस शुभ योग में पूजा-पाठ करने से साधक को विशेष लाभ मिलता है।
✍🏼 शनि प्रदोष व्रत महत्व
धर्म-ग्रंथ एवं वेद-पुराणों में बताया गया है कि भगवान शिव अपने भक्तों से जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत का दिन अत्यंत लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि शनि प्रदोष व्रत के दिन पूजा-पाठ करने से और व्रत का पालन करने से साधक के सभी पाप दूर हो जाते हैं। साथ ही कई प्रकार के ग्रह दोष भी समाप्त हो जाते हैं। इस दिन विधिवत भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा करने से धन-धान्य एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
⚛️ प्रदोष व्रत की पूजा विधि
👉🏻 त्रयोदशी के शुभ दिन सुबह सबसे पहले उठकर घर की साफ-सफाई करें।
🪶 इसके बाद स्नान आदि करें।
👉🏻 स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
🪶 फिर घर के मंदिर की साफ-सफाई करें।
👉🏻 इसके बाद मंदिर में भगवान शिव के समक्ष एक दीपक जलाएं।
🪶 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त इस दिन व्रत भी रखते है। अगर हो सके तो आप भी व्रत का संकल्प लें।
👉🏻 इसके बाद भगवान शिव को गंगाजल से अभिषेक करें और फिर बाद में अपने पूरे घर को भी गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
🪶 भगवान शिव को फूल अर्पित करें।
👉🏻 जैसे कि आप जानते है कि किसी भी शुभ कार्य करने से पहले गणेश भगवान की पूजा की जाती है, तो इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ गणेश भगवान की पूजा करना भी बेहद शुभ माना जाता है।
🪶 इसके बाद भगवान को भोग लाएं।
👉🏻 अंत में भगवान की आरती करें।
🪶 इस दिन हो सके तो अधिक से अधिक भगवान का ध्यान और मंत्रों का जाप करें।
👉🏻 ध्यान रहे कि पूजा के समय भगवान शिव के लिए बेल पत्र जरूर चढ़ाएं। क्योंकि भगवान शिव को यह अति प्रिय है।
🤷🏻‍♀️ प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत को हिंदू धर्म में बहुत शुभ व पवित्र माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों के सभी दुख दूर होते है और साथ ही उन्हें मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत को रखने से लंबी आयु और घर की सुख-शांति में वृद्धि होती है। इसके अलावा इस व्रत को करने से कई तरह के रोगों से भी मुक्ति मिलती है। यह भी कहां जाता है कि एक प्रदोष व्रत का फल दो गायों के दान के बार होता है।
🗣️ प्रदोष व्रत की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार पत्नी के शाप के कारण चंद्र देव भगवान को क्षय रोग लग गया। इस रोग से मुक्ति पाने के लिए सभी देवी-देवताओं ने चंद्र देव को भगवान शिव की पूजा व तपस्या करने को कहां। चंद्र देव ने सभी की बात को मानकर भगवान शिव की तपस्या की। जिससे भगवान शिव प्रसन्न होकर चंद्र देव को क्षय रोग से मुक्ति दी। यह भी कहां जाता है कि त्रयोदशी के दिन ही भगवान शिव ने चंद्र देव को पुनर्जीवित किया था। तब से ही इस दिन को प्रदोष कहा जाता है। इसलिए इस दिन व्रत व विधि-विधान के साथ पूजा करने से सभी रोगों व दुखों से मुक्ति मिलती है।

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