
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• *जय श्री हरि* •••✦
🔮 अश्विन माह में पूर्णिमा 2026: तिथि व समय………..
अश्विन पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा भी कहते हैं जो इस साल 26 अक्टूबर 2026, सोमवार को पड़ेगी। इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और भगवान चंद्र देव की पूजा की जाती है। पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है।सुख-समृद्धि, शांति और अच्छी सेहत का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त विधि-विधान से पूजा करते हैं।
🌝 *अश्विन पूर्णिमा 26 अक्टूबर 2026, सोमवार_*
⏭️ *पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 25 अक्टूबर 2026 की सुबह 11 बजकर 57 मिनट से,_*
⏭️ *पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर 2026 की सुबह 09 बजकर 42 मिनट तक_*
🤷🏻 *शरद पूर्णिमा 2026 का धार्मिक महत्व*
अश्विन पूर्णिमा 2026 या शरद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। यह दिन माता लक्ष्मी, और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा एवं चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा से जुड़ा है।_*
माता लक्ष्मी और कोजागरी पूर्णिमा: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अश्विन पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और सबसे पूछती हैं, “को जागर्ति?” यानी “कौन जाग रहा है?” भक्त रातभर जागकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, इसलिए इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।_*
रास रचाते हैं भगवान श्रीकृष्ण: हिंदू धर्मग्रंथों में ऐसा वर्णिंत है कि शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के साथ रास रचाते हैं जिसे प्रेम, भक्ति और भक्त-भगवान के संबंध का प्रतीक माना जाता है।_*
चंद्रमा की रोशनी में खीर रखना: शरद पूर्णिमा के संहभ अवसर पर भक्त चावल की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं। ऐसा करने से चंद्र देव का आशीर्वाद मिलता है और फिर अगले दिन इस खीर का भोग भगवान को लगाया जाता है।_*
🙇🏻♀️ *अश्विन पूर्णिमा 2026: पूजा विधि*
अश्विन पूर्णिमा 2026 पर माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा का विधान है। ऐसे में, आप इस विधि से पूजा कर सकते हैं।_*
सुबह जल्दी उठकर स्नान करके पूजा स्थान की सफाई करें। घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और पूजा सामग्री तैयार करें।_*
एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर माता लक्ष्मी और विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और फिर उन्हें फूल, कुमकुम, अक्षत, धूप और मिठाई आदि सामग्री अर्पित करें।_*
इसके बाद, श्रीसूक्त या लक्ष्मी जी के बीज मंत्र “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” का 108 बार जाप करें।_*
संध्या के समय चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को जल में अक्षत, चीनी आदि मिलाकर अर्घ्य दें। साथ ही, उनसे सुख, शांति और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।_*
इसके पश्चात दूध और चावल की खीर बनाएं। इसे एक बर्तन में रातभर चाँद की रोशनी में रखें और अगली सुबह भगवान को भोग लगाएं, फिर इसे प्रसाद रूप में बाँटें।_*
कुछ भक्त अश्विन पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की पूजा, मंत्र जाप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं।



