एक की मान्यता, चार जगह खोल दी शाखाएं, बीआरसी की शह पर बिना मान्यता चल रहे स्कूल

दो-दो कमरें में चल रहे स्कूल
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। हाल ही में सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू की है और शिक्षा को बेहतर करने के दावे और वादे किए जा रहे हैं लेकिन जिले की ढीमरखेड़ा तहसील में बीआरसी की शह पर कई ऐसे स्कूल संचालित किये जा रहे है जिनकी मान्यता ही नहीं है। कई ऐसे स्कूल है जो बिना मापदंड के ही संचालित हो रहे है। सवाल यह उठता है कि जब भौतिक सत्यापन किया जाता है तो आखिर कैसे ओके रिपोर्ट दी जाती है। इस मामले में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में कई ऐसे स्कूल संचालित हो रहे है जिनकी मान्यता एक स्कूल की है लेकिन संचालकों द्वारा शिक्षा विभाग की शह पर चार-चार जगह ग्रामीण क्षेत्रों में शाखाएं खोलकर स्कूल संचालित किये जा रहे है। अधिकांश स्कूल ऐसे है जो दो, तीन कमरे में संचालित हो रहे है जबकि भौतिक सत्यापन के समय कुछ और ही बताया जाता है।
नियम विरूद्ध काम, कार्यवाही से घबरा रहे जिम्मेदार राइट टू एजुकेशन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना मान्यता के स्कूल चला रहा है तो एक लाख रुपए का जुर्माना है। पकड़े जाने पर तत्काल स्कूल बंद नहीं करता तो 10 हजार रुपए की प्रतिदिन पैनाल्टी का प्रावधान है। चेतावनी देकर नियमों का पालन कराया जाता है, इसके बाद मान्यता समाप्ति की कार्रवाई बीआरसी कर सकते हैं लेकिन कोई भी बीआरसी नहीं कर रहे हैं। अंतिम कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी को करनी होती है लेकिन हाल के वर्षों में ऐसी किसी तरह की कार्यवाही शिक्षा विभाग द्वारा नहीं की गई है। मामला सामने आने पर रूपये लेकर रफा-दफा कर दिया जाता है।
वहीं शिक्षा विभाग के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ढीमरखेड़ा से 42, 32 आवेदन नवीनीकरण के लिए डीइओ ऑफिस फ ाइल भेज दी गई है। लिहाजा कई ऐसे स्कूल जो मानकों का पालन नहीं कर रहे है उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है लेकिन कार्यवाही क्या हो रही है यह देखने वाली बात है क्योंकि अधिकांश स्कूल बीआरसी के मित्र, रिश्तेदारों या सगे संबंधियों के संचालित हो रहे है और इन्ही के द्वारा कागजों में ओके रिपोर्ट दी जाती है जिसके बाद ही मान्यता की कार्यवाही आगे बढ़ती है।
कागज में खानापूर्ति, हकीकत कोसों दूर स्कूलों को मान्यता देने से पूर्व माशिमं और स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्थल निरीक्षण व दस्तावेजों की जांच के बाद मान्यता देनी होती है। इस मान्यता की प्रक्रिया में भी खानापूर्ति चल रही है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी बीआरसी कर रहे हैं। भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी बीआरसी की है। कई स्कूलों में गार्डन, फायर फाइटिंग सिस्टम, छात्र-छात्राओं का शौचालय अलग-अलग नहीं है। भवन भी पर्याप्त नहीं हैं। इसके बाद भी सभी में ओके रिपोर्ट दे दी जा रही है और वहां पर स्कूलों का संचालन भी किया जा रहा है।



