धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 05 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 05 मार्च 2025
आप सभी सनातनियों को “श्रीस्कन्द षष्ठी व्रत” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : बुधवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 12:51 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र कृत्तिका 01:08 AM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी : कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य और राशि के स्वामी शुक्र हैं।
⚜️ योग – वैधृति योग 11:07 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
प्रथम करण : तैतिल – 12:51 पी एम तक
द्वितीय करण : गर – 11:47 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:13:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:48:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:03 ए एम से 05:53 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:28 ए एम से 06:42 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:16 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:21 पी एम से 06:46 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:23 पी एम से 07:37 पी एम
💧 अमृत काल : 10:53 पी एम से 12:23 ए एम, मार्च 06
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:08 ए एम, मार्च 06 से 12:57 ए एम, मार्च 06
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
❄️ रवि योग : 06:42 ए एम से 01:08 ए एम, मार्च 06
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें। 👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को हरे वस्त्र भेंट करें।* 🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ श्री स्कन्द षष्ठी व्रत/ गोरुपिणी षष्ठी (बंगाल)/ स्वतंत्रता सेनानी सुशीला दीदी जन्म दिवस, कार्यकर्ता शिवराज सिंह चौहान जन्म दिवस, लेबर पार्टी के संस्थापक पृथ्वी सिंह पुण्यतिथि, निरस्त्रीकरण और अप्रसार जागरूकता के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस, भूजल सप्ताह (5 से 11 मार्च) ✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है। 🏘️ _Vastu tips 🏚️
साफ-सुथरा होना चाहिए बेड कई लोग बिस्तर में ही खाना पीना खाते हैं और गंदगी फैलाकर उसी में सो जाते हैं। ऐसा बिल्कुल न करें। साथ ही बेडशीट को भी एक-दो दिन में समय-समय बदलते रहें। गंदा बिस्तर अशांति का कारण बन सकता है और इससे रात में बुरे सपने आते हैं, जिससे नींद में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
दिशा का रखें ध्यान
वास्तु शास्त्र में दिशा को महत्व दिया गया है। बेहतर नींद के लिए सबसे जरूरी है कि आपका बेड सही दिशा में होना चाहिए।बेडरूम में लगा बिस्तर उत्तर पूर्व दिशा की ओर नहीं होना चाहिए
बेड के सामने न लगाएं शीशा बेडरूम में बहुत बड़े आकार का शीशा नहीं होना चाहिए। यह भी अनिद्रा की वजह बनते हैं। साथ ही बेड के ठीक सामने भी आइना नहीं होना चाहिए। इससे पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव उत्पन्न होता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
महत्वपूर्ण बातें
पौष्टिक आहार: अपने आहार में पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें, जैसे कि फल, सब्जियां, साबुत अनाज, और लीन प्रोटीन।
पानी पीना: दिनभर में पर्याप्त पानी पीना चाहिए।* *नियमितता: अपने आहार को नियमित बनाएं, ताकि आपका शरीर सही तरीके से काम कर सके।
व्यक्तिगत आवश्यकताओं का ध्यान रखना: अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं का ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि यदि आप मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं।
🥝 *आरोग्य संजीवनी* 🍓 गठिया दर्द : अमरूद के पत्तों को कूटकर, लुगदी बनाकर उसे गर्म करके लगाने से गठिया की सूजन दूर हो जाती है। पुराने दस्त : अमरूद की कोमल पत्तियां उबालकर पीने से पुराने दस्तों का रोग ठीक हो जाता है। दस्तों में आंव आती रहे, आंतों में सूजन आ जाए, घाव हो जाए तो 2-3 महीने लगातार 250 ग्राम अमरूद रोजाना खाते रहने से दस्तों में लाभ होता है। अमरूद में-टैनिक एसिड होता है, जिसका प्रधान काम घाव भरना है। इससे आंतों के घाव भरकर आंते स्वस्थ हो जाती हैं। वमन या उल्टी : अमरूद के पत्तों के 10 मिलीलीटर काढ़े को पिलाने से वमन या उल्टी बंद हो जाती है। *कमज़ोरी : अमरूद के पत्तों को पीसकर उसका रस निकालकर उसमें स्वादानुसार चीनी मिलाकर नित्य पीते रहने से पुरुषो की कमज़ोरी में नहीं होता है।
श्वेत प्रदर : अमरूद की ताजी पत्तियों का रस 10 से 20 मिलीलीटर तक नित्य सुबह-शाम पीने से श्वेत प्रदर नामक बीमारी में अप्रत्याशित लाभ पहुंचाता है
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
आत्मा और जीव दोनों सौरमंडल की तरह हैं, जिसमें आत्मा एक सूर्य की तरह है तथा जीव आत्मा रूपी सूर्य के ग्रह की तरह है। जीव अपनी उर्जा आत्मा से ही प्राप्त करता है। जिस प्रकार से सूर्य के ग्रहों पर घटित होने वाली घटनाओं का सूर्य पर कोई असर नहीं पड़ता उसी तरह से जीव के दुख सुख का भी आत्मा पर कोई प्रभाव नहीं होता लेकिन फिर भी जब हमेशा आत्मा के चक्कर काटता रहता है तथा वह उसके गुरुत्वाकर्षण में बंधा रहता है। हमारी आत्मा ही हमारा शिव है। हमारी आत्मा हमारे सहस्रार चक्र में रहती है।
एक जीव स्वयं में एक नहीं बल्कि दो है। जिस प्रकार से भगवान शिव ने अपना अर्धनारीश्वर रूप दिखाया उसमें भगवान शिव और पार्वती दोनों आधे आधे संयुक्त रूप से जुड़े हुए हैं। इसी प्रकार से केवल जीव ही नहीं बल्कि जड़ तत्व भी स्त्री और पुरुष का मिला हुआ अर्धनारीश्वर स्वरूप है।
एक पुरुष के अंदर एक नारी कुंडलिनी के रूप में रहती है तथा एक नारी के अंदर एक पुरुष उसकी कुंडलिनी के रूप में रहता है। मनुष्य रूप में उसकी कुंडलिनी रूपी नारी पुरुष से बहुत दूर होती है।
कुंडलिनी के जाग्रत होने पर जहां पर एक सर्पिणी दिखाई देती है, यही सर्पिणी एक लड़की के रूप में भी दिखाई देती है। जब हम चौथे चक्र में पहुंचते हैं तो इसी लड़की के साथ सर्वप्रथम विवाह के साढ़े तीन फेरे संपन्न होते हैं। पांचवें चक्र में पांच छठे चक्र में छह तथा सातवें चक्र में सात विवाह के फेरे संपन्न होकर कुंडलिनी पूर्व रूप से जागृत होती है।
जीव के रूप में हम एक धनात्मक एनर्जी भी है इसी प्रकार से हमारी कुंडलिनी स्त्री रूप में ऋणात्मक एनर्जी भी है। इस स्त्री और पुरुष अर्थात धनात्मक और ऋणात्मक एनर्जी का मिलन जब सहस्रार चक्र में होता है तो एक बहुत तेज दिव्य प्रकाश का निर्माण होता है। यह दिव्य प्रकाश ही भगवान शिव का तेजोमय प्रकाश है। हम भगवान शिव में नहीं मिलते बल्कि हमारा मैं रूपी अहंकार समाप्त होने के बाद हममें से ही भगवान शिव प्रकट हो जाता है।
कुंडलिनी रूपी लड़की के साथ आज्ञा चक्र तक छह फेरों का विवाह मैंने स्वयं अपने साथ होते हुए देखा है लेकिन सहस्रार चक्र में पहुंचने पर समय शून्य हो जाने के कारण मेरे अंदर घबराहट इतनी अधिक पैदा हो गई कि इस घबराहट के कारण हमारी कुंडली चलना बंद हो गई तथा हमारा सहस्रार चक्र अपूर्ण रह गया तथा हमें मिली हुई सभी सिद्धियों वापस चली गई।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।

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