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फाइलेरिया जैसी बीमारियो से बचने के लिए घर घर जाकर खिलाई दवा

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत उमरियापान में फाइलेरिया बीमारी से बचाव के लिए घर घर जाकर दवा खिलाई जा रही है । आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मीना गुप्ता, आशा कार्यकर्ता कांता मिश्रा, अन्नपूर्णा सोनी ने उमरियापान में घर घर जाकर फाइलेरिया रोग से बचाव के लिए डीईसी, एलबेण्डाजाल एवं आइवर मेक्टिन की दवा खिलाई जा रहीं हैं। आशा कार्यकर्ता कांता मिश्रा ने फाइलेरिया से बचने के उपाय बताएं एवं दवा से होने वाले फायदों को भी बताया। स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ के साथ आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं ने उमरियापान के शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों में जाकर छात्र छात्राओं के अलावा स्टाफ को फाइलेरिया की दवा खिलाई जा रहीं हैं । फाइलेरिया दुनिया भर में विकलांगता और विरूपता बढ़ाने वाला सबसे बड़ा रोग है इसे एक संक्रमण के रूप में भी देखा जाता है । यह एक पैरासाइट डिजिट है जो कि धागे के समान दिखाई देने वाले निमेटोड कीड़ों के शरीर में प्रवेश करने की वजह से होते है । फाइलेरिया को फीलपाँव,श्लीपद के नाम से जाना जाता है । भारत में इसे सामान्य तौर पर हाथी पाँव के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इस रोग में व्यक्ति का पाँव हाथी के पाँव की तरह हो जाता है । इस रोग से लड़ने वालों के लिए मुफ्त उपचार प्रदान करता हैं । इस रोग की वजह से व्यक्ति के पाँव और अन्य प्रभावित अंग काफी कुरूप हो जाते हैं, जिसकी वजह से व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक दोनों समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आशा कार्यकर्ता कांता मिश्रा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अच्छी पहल चलाकर लोगों को घर घर जाकर फाइलेरिया की दवा खिलाई जा रहीं हैं और फाइलेरिया के बारे में जागरूक किया जा रहा है फाइलेरिया मुक्त की दवा भी वितरित की जा रही है । इस दौरान स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मीना गुप्ता, आशा कार्यकर्ता कांता मिश्रा, अन्नपूर्णा सोनी द्वारा घर घर जाकर फाइलेरिया की दवा खिलाई जा रहीं हैं।

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