मध्य प्रदेश

लोगों की सेहत सुधारने वाले अस्पताल की सेहत खराब, अंधेरे में रहने को मजबूर मरीज जनरेटर पड़ा खराब

रिपोर्टर : उपेन्द्र मालवीय
ओबेदुल्लागंज । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का प्रदेश को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा रायसेन जिले के ओबेदुल्लागंज में खोखला नजर आ रहा. ओबेदुल्लागंज के शासकीय अस्पताल में रात को घंटों बिजली गायब रहती है जिसके चलते टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज होता है. मरीजों के अटेंडर अस्पताल व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं. वहीं इस मामले में बी एम ओ का कहना है ज्यादा लोड होने के चलते जनरेटर भी हीट हो जाता है जिसकी वजह से कभी कभी दिक्कत हो जाती है।
हालात जस के तस नजर आ रहे
स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी का गृह जिला होने के बाद भी यहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाए हमेशा भगवान भरोसे चल रही हैं. वर्तमान सरकार द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।
टांके टॉर्च की रोशनी में लग रहे
ताजा मामला ओबेदुल्लागंज का है. यहां की तस्वीरें देखकर आप स्वयं ही अंदाजा लगा सकते हैं कि अस्पताल की व्यवस्थाएं किस तरह की हैं. औबेदुल्लागंज के सामुदायिक अस्पताल में टार्च की रोशनी में मरीजों का इलाज किया जा रहा है. यहां तक कि माइनर ओटी में मरीज को टांके भी टॉर्च की रोशनी में ही लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा बोतल चढ़ाने से लेकर कागजी कार्रवाई तक सब यहां टॉर्च की रोशनी में चल रही है. इसका कारण है कि अस्पताल की लाइट अचानक चली गई और अस्पताल में जो जनरेटर था वह भी जवाब दे गया।
जिला अस्पताल में घंटों गायब रहती है बिजली, टॉर्च की रोशनी में किया जा रहा मरीजों का इलाज
करना पड़ता है दिक्कत का सामना
मरीजों का कहना है कि, अस्पताल की यह स्थिति कोई नई नहीं है. यहां कई दिनों से भर्ती मरीजों के अटेंडरों का कहना है कि यहां पर कई दिनों से लाइट की यही समस्या है. जब रात में लाइट चली जाती है तो समस्या और भी गंभीर हो जाती है. अस्पताल में कई तरह की गंभीर बीमारियों के मरीज भी भर्ती हैं जिनका इलाज बिना बिजली की सप्लाई के संभव नहीं होता. ऐसे में इन मरीजों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
इस संबंध में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर अमृता जीवने का कहना है कि अस्पताल में एक बड़ा जेनरेटर भी है. बिजली सप्लाई बाधित होने पर जेनरेटर से बिजली की सप्लाई की जाती है लेकिन अधिक लोड पड़ने की वजह से जनरेटर भी हीट होकर बंद हो जाता है. हम इसके बारे में ऊपर के अधिकारियों से बात करेंगे।
सवाल यह उठता है कि जब मामला मीडिया की नजर में आया तभी सीएमओ साहब को मरीजों की चिंता हुई. इससे पहले उन्होंने इस अव्यवस्था के बारे में विभाग के अधिकारियों से बात करना उचित नहीं समझा. भले ही ऐसी अवस्थाओं की स्थिति में किसी मरीज की जान ही क्यों ना चली जाए।

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