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10 अक्टूबर 2025 कब है करवा चौथ? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त, परंपरा और व्रत विधि एवं कथा

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री Զเधॆ कृष्णा
🔮 10 अक्टूबर 2025 कब है करवा चौथ? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त, परंपरा और व्रत विधि एवं कथा
🔘 HEADLINES
🔹 कार्तिक माह में करवा चौथ व्रत किया जाता है।
🔸 इस व्रत को निर्जला किया जाता है।
🔹 इससे अखंड सुहाग की प्राप्ति होती है।
🔸 करवा चौथ का पर्व बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
🔹 करवा चौथ व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद तोड़ा जाता हैं।
🔸 करवा चौथ व्रत सुहागिन महिलाएं रखती हैं।
✍🏼 आज पति-पत्नी के आपसी प्रेम और समर्पण का महापर्व करवा चौथ है। करवा चौथ के दिन बिना कुछ खाए-पीए निर्जला व्रत रखने का महत्व होता है। सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु, सुखी जीवन, सौभाग्य और समृद्धि की कामना के लिए दिनभर उपवास रखते हुए रात के समय चंद्रमा के दर्शन कर व्रत तोड़ती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। यह सुहागिनों के सबसे बड़े त्योहार में से एक है। सुहागिनों के लिए करवा चौथ व्रत का इंतजार सालभर रहता है। जिसमें महिलाएं इस दिन 16 श्रृंगार करके पूरे दिन पानी पीए रहती हैं। शाम को माता करवा की पूजा और कथा सुनती हैं फिर रात को चांद के निकलने पर अर्ध्य देते हुए पति के हाथों से पानी पीकर व्रत तोड़ती हैं। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से कि करवा चौथ व्रत का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहुर्त और चांद के निकलने का समय आदि के बारे में सबकुछ..
⚛️ करवा चौथ शुभ मुहूर्त
करवा चौथ का व्रत शुक्रवार 10 अक्टूबर 2025
चतुर्थी तिथि आरंभ- 9 अक्टूबर 2025 को रात 10:54 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त- 10 अक्टूबर 2025 को शाम 07:38 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत शुक्रवार 10 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा.
🔯 करवा चौथ पूजा मुहूर्त
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:57 बजे से शाम 07:11 बजे तक.
🍜 करवा चौथ सरगी का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 40 मिनट से 05 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ऐसे में ब्रह्म मुहूर्त के दौरान सरगी में शामिल चीजों का सेवन कर ससकते हैं।
🌙 करवा चौथ व्रत शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय समय

आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, 09 अक्टूबर को देर रात 10 बजकर 54 मिनट पर कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शुरू होगी। साथ ही इसकी समाप्ति 10 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 38 मिनट पर होगी। ऐसे में 10 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा।
चंद्रोदय समय – शाम 07 बजकर 42 मिनट पर।* ✡️ करवा चौथ पर शुभ संयोग
इस बार करवा चौथ पर सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है. साथ ही चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेंगे. इस संयोग में करवा माता की आराधना करने से वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याएं समाप्त होंगी, और रिश्तों में मिठास बनी रहेगी. ये व्रत जीवन साथी के लिए समर्पण, प्रेम और त्याग का भाव दिखाता है.
महिलाएं पति के सुखी जीवन, सौभाग्य, अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए दिनभर निराहार और निर्जल रहती हैं. इस रिश्ते में जब तक एक-दूसरे के बीच विश्वास है, तब तक प्रेम बना रहता है. अगर जीवनसाथी पर अविश्वास का भाव जाग जाता है तो ये रिश्ता टिक नहीं पाता है.
📖 करवा चौथ व्रत विधि :-
करवा चौथ की आवश्यक संपूर्ण पूजन सामग्री को एकत्र करें।* व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें- ‘मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये। पूरे दिन निर्जला रहें।
दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इसे वर कहते हैं। चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है।
आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। हलुआ बनाएं। पक्के पकवान बनाएं।
पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं।
गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं। चौक बनाकर आसन को उस पर रखें। गौरी को चुनरी ओढ़ाएं। बिंदी आदि सुहाग सामग्री से गौरी का श्रृंगार करें।
जल से भरा हुआ लोटा रखें।
वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें।
रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं।
गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें। पति की दीर्घायु की कामना करें
नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥’
करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें।
कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें।
तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा या टोंटीदार करवा अलग रख लें।
रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
इसके बाद पति से आशीर्वाद लें। उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें।
पूजन के पश्चात आस-पड़ोस की महिलाओं को करवा चौथ की बधाई देकर पर्व को संपन्न करें।
🙇🏻 व्रत खोलने की परंपरा
*
जब चंद्रमा निकल आता है, तब छलनी में दीपक रखकर चंद्रमा को देखें. उसके बाद उसी छलनी के माध्यम से अपने पति का चेहरा देखें और उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करें. अंत में पति के हाथों से जल ग्रहण करके और मिठाई खाकर व्रत को पूर्ण करें.
🗣️ *व्रत के दौरान बचने योग्य बातें* 👉🏼 *काले और सफेद रंग न पहनें: ये रंग इस दिन अशुभ माने जाते हैं.
👉🏼 *धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें: कैंची, सुई या चाकू जैसी वस्तुओं का इस्तेमाल व्रत के लाभ में कमी ला सकता है. 👉🏼 *सफेद वस्तुएं दान न करें: चावल, दूध या दही जैसी सफेद वस्तुएं न दें. इसके बजाय केसर, सिंदूर, लाल चुनरी या सुगंध दान करना शुभ माना जाता है.
💁🏻 *पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सुझाव*
👉🏼 *सरगी का सेवन करें: व्रत की शुरुआत सुबह के सरगी से होती है. इसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और पानी शामिल होते हैं. बिना सरगी के व्रत अधूरा माना जाता है. 👉🏼 *शुभ रंग पहनें: करवा चौथ के दिन लाल, पीला या गुलाबी रंग शुभ माने जाते हैं. यह व्रत में सकारात्मक ऊर्जा लाता है.
👉🏼 *करवा माता की पूजा: व्रत कथा पढ़ें और करवा माता के सामने अर्घ्य दें. पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए प्रार्थना करना आवश्यक है. 📑 *करवा चौथ की पौराणिक कथा*
श्री गणेशाय नमः !
एक साहूकार था जिसके सात बेटे और एक बेटी थी कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को साहूकार की सभी बहू और बेटी और और उनकी पत्नी ने व्रत रखा जब सातों भाई भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से खाना खाने को कहा क्योंकि वह अपनी बहन को बहुत प्यार करते थे सातों भाई अपनी बहन पर जान छिड़कने थे वह उसको भूखा नहीं देख पाए इसलिए उसको खाना खाने के लिए बोला लेकिन बहन बोली नहीं भाई आज तो करवा चौथ का व्रत है जब चांद निकलेगा मैं उसको अरग देकर ही भोजन ग्रहण करूंगी यह सुनकर भाई व्याकुल हो उठे क्योंकि वह अपनी बहन को भूख से व्याकुल देख परेशान हो गए उन्होंने गांव की एक पहाड़ी पर दीपक जलाकर और छलनी में दिखाया वह बोले बहन चांद निकल आया है तुम चंद्रमा को अरग दे दो तो उसने अपनी भाभियों से कहा चलो भाभी चंद्रमा निकल आया है चलो चांद को अरग दे कर पूजा करें व्रत खोलें तो सभी भाभियों बोली नहीं नहीं यह तो आपका चांद निकला है हमारा चांद अभी नहीं निकला आप अरग हो गया दे दो हम बाद में दे देंगे यह सुनकर बहन सावित्री ने उस दिए को चंद्रमा समझकर अरग को दे दिया और भोजन करने बैठ गई जैसे ही पहला निवाला तोड़ा तो उसको छींक आ गई और दूसरा निवाला तोड़ा तो बाल निकल आया तीसरे निवाले पर ससुराल से बुलावा आ गया जैसे भी बैठी हो चली आओ मां उसको विदा करने के लिए बक्से बक्से से कपड़े निकलने लगी तो बक्से से काले सफेद कपड़े निकलने लगे तब मां घबरा गई और बोली बेटी रास्ते में जो भी छोटा-बड़ा मिले उसके पैर छूती जाना और जो कोई भी पूर्ण सुहागन होने का आशीर्वाद दे तो वही अपने पल्ले में गांठ बांध लेना वह बोली ठीक है मां ऐसा कह कर वह अपनी ससुराल के लिए जाने लगी रास्ते में जो कोई भी उसे मिला उसने कहा सुखी रहो खुश रहो पीहर का सुख पाती रहो ऐसे ही चलते चलते वह अपने ससुराल जा पहुंची तो उसने देखा कि दरवाजे पर छोटी ननंद खेल रही थी
*_उसने उसके पैर छुए तो ननंद ने उसे आशीर्वाद दिया सदा सौभाग्यवती रहो पुत्रवती रहो यह सुनकर उसने अपने पल्ले में गांठ लगा ली और अंदर गई अंदर जाकर देखा कि उसके आंगन में उसके पति का शव रखा है और उसको ले जाने की तैयारी चल रही है तो वह बहुत रोई जैसे ही उसके पति को ले जाने लगे तो वह बोली मैं उन्हें कहीं नहीं ले जाने दूंगी जब वहां मौजूद लोग नहीं माने तो साथ जाने की जिद करने लगी सबके समझाने के बाद भी जब वह नहीं मानी तो सब लोग उसकी ज़िद के आगे हार गए और बोले चलो ले चलो इसे भी साथ में वह उसके साथ श्मशान घाट तक गई जब सब लोग अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे तो उसने उसको जलाने से साफ इंकार कर दिया तो वहां पहुंचे सभी लोग कहने लगे पहले तो अपने पति को खा गई अब उसकी जिंदगी खराब कर रही है लेकिन वह नहीं मानी अपने पति के सब के पास बैठ गई और रोने लगी यह सब देखकर वहां मौजूद लोगों ने कहा यहां एक झोपड़ी बनवा दो यह अपने पति को लेकर यहां रह लेगी झोपड़ी बनवा दी गई वह अपने पति के साथ वहां रहने लगी रोज साफ सफाई करने लगी उसके कपड़े बदलती उसको स्नान कराती उसको साफ सुथरा रखती दिन में दो बार उसकी छोटी ननद खाना लाती वह हर करवाचौथ का व्रत करती चांद को अरग देती और चौथ माता की कहानी सुनती जब चौथ माता प्रकट होती और कहती करबोले बोले भाइयों की प्यारी करबोले यह घड़ी बुखारी करबोले तब वह चौथ माता से अपने पति के प्राण मांगती तब चौथ माता कहती हमसे बड़ी चौथ माता आएगी
तब तुम उनसे अपने पति के प्राण मांगना एक-एक करके सभी चौथ माता आई और यही कह कर चली गई अब अश्वन की चौथ माता तुमसे नाराज हैं कार्तिक की बड़ी चौथ माता आएंगी वही तेरा सुहाग तुझे वापस करेंगे जब वह आए तो उनके पैर मत छोड़ना और करवा चौथ वाले दिन सोलह सिंगार का सामान तैयार रखना जब कार्तिक की बड़ी करवा चौथ आई तो उसने अपनी छोटी ननंद से सोलह सिंगार का सामान मंगाया जब सास को यह बात पता चली तो वह बोली वह तो पागल हो गई है जो मांगती है दे दो तब उसने करवा चौथ का व्रत रखा ज्योति जलाई जब चौथ माता प्रकट हुई तो बोली करबोले भाइयों की प्यारी करबोले दिन में चांद देखने वाली करबोले घड़ी बुखारी करबोले उसने उनके पैर पकड़ लिया और बोली माता मुझे मेरा सुहाग वापस कर दो तब चौथ माता बोली तू तो बड़ी भूखी है सात भाइयों की प्यारी है सुहाग का तेरे लिए क्या काम तब वह बोली नहीं माता मैं आपके पैर तब तक नहीं छोडूंगी जब तक आप मेरा सुहाग वापस नहीं कर देती तब सुहाग माता ने कहा सुहाग का एक-एक सामान मांगा है उसने सुहाग का सारा सामान चौथ माता को दे दिया तब चौथ माता ने अपनी आंख से काजल निकाला नाखूनों से मेहंदी निकाली मांग से सिंदूर निकाला और उसे करवे में डालकर छोटी उंगली से उसके ऊपर छिड़क दिया जिससे उसका पति जीवित हो गया चौथ माता जाते-जाते उसकी झोपड़ी पर लात मार गई जिससे उसकी झोपड़ी महल बन गई उसका पति जीवित हो गया जब छोटी ननंद खाना लेकर आई नो तो देखा झोपड़ी की जगह महल खड़ा है वह दौड़ी- दौड़ी अपनी छोटी ननंद के पास गई और बोली बाईसा आपका भाई जीवित हो गया है सासू जी से कहो गाजे-बाजे इसे लेने आए छोटे ननंद दौड़ी-दौड़ी अपनी मां के पास गई और सारी बात बताई मां बोली उसके साथ तेरा भी दिमाग खराब हो गया है और ननद बोली नहीं मां मैंने देखा है सच में भाई जिंदा हो गए हैं सासु गाजे-बाजे के साथ अपने बेटे को लेने पहुंची बेटे को जिंदा देखकर सास बहू के पैरों पर गिर गई सास जैसे ही पैर छूने लगी तभी बहू ने सास के पैर छुए और बोली मां देखो आपका बेटा वापस आ गया है मां बोली मैंने तो अपना बेटा खो दिया था दिया तेरी भक्ति तेरे भाग्य से और तेरी तपस्या से यह पुनःजीवित हो गया माता तेरी रक्षा करें.
करवा चौथ माता की जय !

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