ट्रेनों में नहीं हैं जगह पाव रखने की, आम जनता के लिए सफर करना कठिनाईयो भरा

रेल्वे द्वारा बनाई सुविधाओं से आम नागरिक दूर
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
लखनऊ। पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न प्रकार की ट्रेनों की हालत दिनों दिन बिगड़ती हुई नजर आ रही हैं। एक ओर इंडियन रेल्वे द्वारा वन्दे भारत ट्रेनों की सौगात से सुविधाओं को सफल कहने के वादे करता है। तो वहीं दूसरी तरफ आम जनता के लिए ये ट्रेनें एक सपने जैसा ओझल रह कर विलुप्त हो जाती हैं।
हमारी मीडिया की टीम द्वारा जब उत्तर प्रदेश के कानपुर सेंटल प्लेटफार्म नंबर 2 पर लखनऊ से चलकर जबलपुर गाड़ी संख्या 15206/15205 चित्रकूट एक्सप्रेस गाड़ी में लम्बी दूरी तय करने वाले आम नागरिकों के लिए मुसीबत भरा रहा। जहां एसी से लेकर स्लीपर कोच के डिब्बों में यात्रियों की संख्या अधिक मात्रा में दिखी। तो दूसरी तरफ कुल जनरल सफर करने वाले डिब्बों की संख्या कुल 4 में सिमट कर रह गई। रोजाना चलने वाली ये ट्रेन में आन जनता को बैठना तो दूर की बात लोगों को चढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ा। एक ओर आम जनता के बजट और लम्बी दूरी के लिए सफर करने में कठिनाई का सामना करना तो वहीं कम मात्रा में जनरल डिब्बों की संख्या से बच्चे, बूढ़े, महिलाओं को अधिक मात्रा में परेशानी देखने को मिली।
जब इस परेशानी को लेकर हमारे रिपोर्टर द्वारा वह उपस्थित रेल्वे कर्मचारियो से संपर्क करना चाहा तो उन्होंने जवाब देने से कतराते नजर आये।
स्कूलों की छूटिया और विवाह शादी के चलते जब यात्रियों की संख्या अधिक मात्रा में बढ़ जाती हैं तो रेल्वे बोर्ड के चेयर मैंन को उचित सुविधाओं को देकर आम जनता को के सफर को सुरक्षा प्रदान करने हेतु प्रयास करना चाहिए। जिससे इस प्रकार की भीड़ भाड़ से साधारण लोगों को सुरक्षा सुविधा हो सकें। क्या इस समस्याओं का समाधान रेल्वे करेगा? या फिर जनरल में सफर करने वाले यात्रियों को परेशान होना पड़ेगा।
पूर्व में लगे होते थे जनरल के 6-6 डिब्बे, आज हालत कुछ और – पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा चलाई जाने वाली गाड़ी संख्या 15206/15205 चित्रकूट एक्सप्रेस गाड़ी में जहां पूर्व में निर्धारित 6- 6 डिब्बे लगाकर चलाया जाता था। वहीं आज 4 जनरल डिब्बों की संख्या से ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को अधिक कठिनाइयों का सामना करते हुए देखा जा रहा हैं।



