धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 10 जून 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 10 जून 2024
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – ग्रीष्म ऋतु
🌤️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 04:15 PM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी तिथि के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 09:39 PM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। तथा पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति जी है।
⚜️ योग – ध्रुव योग 04:47 PM तक, उसके बाद व्याघात योग
प्रथम करण : विष्टि – 04:14 पी एम तक
द्वितीय करण : बव – 04:45 ए एम, जून 11 तक बालव
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:14:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:46:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:02 ए एम से 04:42 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:22 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:53 ए एम से 12:49 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:40 पी एम से 03:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:17 पी एम से 07:38 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:19 पी एम से 08:19 पी एम
💧 अमृत काल : 02:54 पी एम से 04:36 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, जून 11 से 12:41 ए एम, जून 11
सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:23 ए एम से 09:40 पी एम
❄️ रवि योग : 05:23 ए एम से 09:40 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏼‍♀️ आज का उपाय-शिव मंदिर में छैने से बनी मिठाई चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – व्रत/मुहूर्त-सर्वार्थसिद्धि योग/मूल प्रारम्भ/रवियोग, उमा चतुर्थी (बंगाल उड़ीसा), गुरु अर्जुन देव शहिद दिवस, विनायक चतुर्थी, राष्ट्रीय बॉलपॉइंट पेन दिवस है, राष्ट्रीय खटमल निवारण दिवस, राष्ट्रीय काली गाय दिवस, राष्ट्रीय अंडा रोल दिवस, राष्ट्रीय जड़ी बूटी, मसाला दिवस, ऑटोक्रोम ल्यूमिएर रंगीन फोटोग्राफी आविष्कार दिवस, गोपीनाथ बोरदोलोई जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी, दामोदर मेनन प्रमुख स्वतन्त्रता सेनानी, हिन्दी चलचित्र गायक रूपकुमार राठौर, कवि शिवदीन राम जोशी जन्म दिवस
✍🏼 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🏝️ Vastu tips 🗽
पेड़-पौधे लगाने से वहले वास्तु के इन नियमों का रखें ध्यान
घर के अंदर कमरों में किसी भी प्रकार का पौधा लगाना वास्तु शास्त्र के अनुसार शुभ नहीं माना जाता है। लोग अक्सर घर के अंदर बेडरूम, ड्राइंगरूम, सेंट्रल हॉल और सीढ़ियों पर गमले लगा लेते हैं। कमरों में रखे पौधों में चीटियां, कीट-पतंग आदि का प्रकोप होता है जिसे वास्तु की दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता है और यह निगेटिविटि को आमंत्रित करने जैसा है। इन पौधों को घर के बाहर गार्डन में लगाना ही उचित है।
घर के कमरों में सजावट के तौर पर प्लास्टिक और फाइबर के पौधे रखने से भी नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है, जो कलह का कारण बनता है। जिस वजह से परिवार के सदस्यों में सुख-शांति नहीं रहती है।
वहीं वास्तु के अनुसार घर में कांटे वाले पेड़-पौधे जैसे कि कैक्टस और नागफनी नहीं लगाना चाहिए, यह पेड़ घर में लगाने से कलह को बढ़ावा देते हैं और परिवार पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
खुद के प्रति ईमानदार रहें आज सब कुछ सोशल मीडिया पर है और ये एक ऐसी जगह है जहां हमें लगता है कि हमें छोड़कर हर किसी की जिंदगी परफेक्ट है। इस प्रकार, हम उनसे जलन की भावना रखते हैं और इस प्रोसेस में हम अपनी रियल पहचान को भूलकर उनकी कॉपी करने लगते हैं। हालांकि, भगवान कृष्ण हमें सिखाते हैं कि किसी और की लाईफ को कॉपी करके और उससे कंपेयर करने से अच्छा जो हमारे पास है, उसमें खुशी से जीना सीखें।
अपने गुस्से पर काबू रखें आपको हमेशा अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए, जिससे आपके नेचर में स्वीटनेस बनी रहेगी, क्योंकि गुस्सा करने से आपके काम ही खराब नहीं होते, बल्कि रिश्‍तेदार और कलीग्स संग रिलेशन भी खराब हो सकते हैं।
🌿 आरोग्य संजीवनी ☘️
बार-बार मुंह में छाले क्यों हो जाते हैं और इसे कैसे ठीक करें?
मुंह के छाले का बार-बार होना ! यह तो लक्षण है रोग नहीं।
यह पेट की गर्मी से होता है। चिकित्सा आरम्भ लिवर से। लिवर फंक्शन टेस्ट (रक्त जांच) करायें, गङबङी निकले तो चिकित्सा लें ठीक करें।
यदि समस्या लिवर सही होने से ही खत्म तो बात खत्म। यदि नहीं तो आगे की कारवाई उम्र अनुसार। 18 साल से कम तो त्रिकटु चूर्ण, 18 से 60 तो अविपत्तिकर चूर्ण तथा टंकण भस्म, यदि 60 से ऊपर तो आजमोदादि चूर्ण तथा टंकण भस्म। सही डोज निर्धारण तो चिकित्सक द्वारा ही करायें।
कभी-कभी ये दोनों कर लिया, अन्य लक्षण बता रहे सफलतापूर्वक काम हुआ पर छाले की समस्या नहीं खत्म हुई। एक जगह और प्रयास करें – पेट का अल्ट्रासाउंड करायें। कुछ निकला तो तद्नुसार चिकित्सा लें।
थोङा परेशान करने वाला है मुंह के छाले की समस्या पर सही डायग्नोसिस तथा सही चिकित्सा से जङ से ठीक होता है।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌹
आचार्य श्री गोपी राम की यह नीति सफलता की कूंजी से कम नहीं मानी जाती है। यहां तक की लोग अपने जीवन की सफलता का मार्ग उनकी नीतियों के माध्यम से तय करते हैं। उन्होंने अपने जीवन के हर पहलू पर ज्ञान बांटा।
यद्दूरं यद्दुराराध्यं यच्च दूरे व्यवस्थितम्।
तत्सर्व तपसा साध्यं तपो हि दुरतिक्रमम्।।
आचार्य श्री गोपी राम ने अपनी इस नीति में कहते हैं कि जो चीज आपसे बहुत दूर है, जो कठिनता से आराधना करने वाला है और जो बहुंत ऊंचाई पर है। वह सब कुछ तप के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है, क्योंकि तप में बहुत बल होता है और एक तपस्वी के लिए कोई भी कार्य करना कठिन नहीं होता है।
मनुष्य को मिलता है तप का फल
आचार्य श्री गोपी राम ने अपनी इस नीत के माध्यम से यही कहना चाहते हैं कि तप करने से मुश्किल कार्य आसान हो जाते हैं। तप से हर जीच प्राप्त की जा सकती है लेकिन तप है क्या? माला लेकर जाप करना, एक पांव के दम पर खड़े रहना या फिर एक हाथ को ऊपर खड़ा कर लेना ये सब तप की श्रेणी में नहीं आते हैं। तप का सही अर्थ है मुश्किल परिस्थितियों का डट कर सामना करना, भूख-प्यास, दुःख सुख, हानि-लाभ, जीवन-मरण में एक जैसा रहना और विपदा आने पर अपने धर्म को नहीं छोड़ना। ये सब जीवन के तप हैं और यह मनुष्य को किसी चीज के लायक बनाता है।
तप करना इसलिए भी है जरूरी
किसी भी चीज को पाने या सफलता को प्राप्त करने के लिए तप करना पड़ता है। अगर आप किसी चीज को आसानी से प्राप्त कर लेंगे तो उसकी कीमत नहीं समझ पाएंगे। संसार में जितने भी महान लोग हुए हैं उन्होंने अपने तप के बल से ही जीवन में सफलता प्राप्त की है और अपने लक्ष्य तक पहुंचे हैं। बिना तप के व्यक्ति जीवन में कोई भी मुकाम हासिल नहीं कर सकता है। क्योंकि सफलता जीवन में आसानी से नहीं प्राप्त होती है। आचार्य आगे कहते हैं कि तप के द्वारा ही व्यक्ति जीवन में उच्च पद को प्राप्त करता है और समाज में सम्मान पाता है। जो लोग जीवन में बैठे-बैठ सब कुछ पाने की कल्पना करते हैं वह मरने के बाद अपने कर्मों का फल भोगते हैं और अंत में उसका पश्चाताप करते हैं।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।

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