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Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 10 अप्रैल 2026
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। *शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
*शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । *शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 11:15 PM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 11:27 AM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। इस नक्षत्र के वैदिक देवता जल (अपः) और राशीश बृहस्पति (गुरु) हैं।
⚜️ योग – शिव योग 06:30 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग
प्रथम करण – बालव 10:21 AM तक
द्वितीय करण – कौलव 11:16 PM तक, बाद तैतिल
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:53:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:22:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04:50 ए एम से 05:36 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या – प्रातः 05:13 ए एम से 06:21 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त – कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त – दोपहर 02:48 पी एम से 03:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:00 पी एम से 07:22 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या – शाम 07:01 पी एम से 08:09 पी एम
💧 अमृत काल – प्रातः 09:44 ए एम से 11:29 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:18 ए एम, अप्रैल 11 से 01:03 ए एम, अप्रैल 11
💥 ज्वालामुखी योग – शाम 07:20 पी एम से 12:59 ए एम, अप्रैल 11
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – कालाष्टमी/ इष्टि/ विंछुड़ो/ गण्ड मूल/ आडल योग/ ज्वालामुखी योग/ आर्य समाज स्थापना दिवस, ASPCA स्थापना दिवस, भारत पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई जयन्ती, राष्ट्रीय भाई-बहन दिवस, भारतीय राजनीतिक मणि शंकर अय्यर जन्म दिवस, भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अरुंधति रेड्डी जन्म दिवस, विश्व होम्योपैथी दिवस, राष्ट्रीय अपने कुत्ते को गले लगाओ दिवस, राष्ट्रीय युवा एचआईवी और एड्स जागरूकता दिवस, ऑर्थोडॉक्स गुड फ्राइडे, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी राम सिंह पठानिया जयन्ती, भारतीय उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला जन्म दिवस, (परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक) मेजर धनसिंह थापा जयन्ती, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे जन्म दिवस, जल संसाधन दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ जगजीत सिंह लायलपुरी जन्म दिवस, स्वतंत्र भारत के प्रथम कृषि मंत्री डॉ. पंजाबराव देशमुख पुण्य तिथि
✍🏼 *तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। 🗼 *_Vastu tips* 🗽
एक आदर्श घर का नक्शा है। यहां पर व्यक्ति की सुविधा के लिए पूजा घर ठीक ईशान कोण पर न रखकर थोड़ा सा आगे रखा गया है आदर्श वास्तु के लिए पूजा घर ईशान कोण में होना चाहिए।
*मुख्य द्वार इसे पूर्व दिशा में है, जिसे वास्तु में सबसे शुभ माना जाता है। यह सुबह की सकारात्मक ऊर्जा और सूर्य की किरणों को घर में लाता है। *पूजा घर इसे ईशान कोण में जगह दी गई है। यह ईश्वर और पवित्रता का कोना है, जो घर में सुख-शांति सुनिश्चित करता है।
*रसोई घर इसे आग्नेय कोण में बनाया गया है। यह अग्नि का कोना है, जो परिवार के स्वास्थ्य और पोषण के लिए महत्वपूर्ण है। *मास्टर बेडरूम इसे नैऋत्य कोण में रखा गया है। यह कोना स्थायित्व और मजबूती का प्रतीक है, जो परिवार के मुखिया के लिए आदर्श है।
*लिविंग रूम इसे उत्तर या पूर्व की ओर खुला रखा गया है, ताकि मेहमानों और परिवार के सदस्यों के लिए एक सकारात्मक माहौल रहे। *सीढ़ियां और भारी निर्माण: इन्हें दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना वास्तु सम्मत है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
ब‍िस्‍क‍िट खाने से बढ़ सकता है ब्‍लड शुगर लेवल ब‍िस्‍क‍िट में शुगर की मात्रा ज्‍यादा होती है ज‍िसे लंबे समय तक खाने के कारण आपके शरीर में ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। ब‍िस्‍क‍िट में ज्‍यादा शुगर होने के कारण अगर आप ब‍िस्‍क‍िट को लंबे समय तक खाएंगे तो रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो सकती है।
*ब‍िस्‍क‍िट से होती है कब्‍ज की समस्‍या ब‍िस्‍क‍िट को र‍िफाइंड आटे से बनाया जाता है इसल‍िए इसे खाकर कुछ लोगों को कब्‍ज की समस्‍या हो जाती है क्‍योंक‍ि ज्‍यादातर ब‍िस्‍क‍िट में फाइबर की मात्रा मौजूद नहीं होती है। *ज्‍यादा ब‍िस्‍क‍िट खाएंगे तो दांत में हो सकती है सड़न अगर आपको ब‍िस्‍क‍िट खाने की लत पड़ गई है तो ये आपके दांतों के ल‍िए हान‍िकारक हो सकता है ब‍िस्‍क‍िट में शुगर की मात्रा ज्‍यादा होती है ज‍िससे लंबे समय तक खाने के कारण इनेमल को नुकसान पहुंच सकता है और दांत में कैव‍िटी पनप सकती है इसल‍िए ब‍िस्‍क‍िट का सेवन कम से कम ही करें।
*ब‍िस्‍क‍िट में मौजूद होता है ग्‍लूटन कुछ लोगों को ग्‍लूटन से एलर्जी होती है उनके ल‍िए ब‍िस्‍क‍िट नुकसानदायक हो सकते हैं क्‍योंक‍ि कई प्रकार के ब‍िस्‍क‍िट में ग्‍लूटन मौजूद होता है। अगर आपको लग रहा है क‍ि ओट्स के ब‍िस्‍क‍िट या मल्‍टीग्रेन ब‍िस्‍क‍िट खाने से नुकसान नहीं होता तो ऐसा नहीं है क‍िसी भी तरह के ब‍िस्‍क‍िट को ज्‍यादा खाने से आपकी सेहत ब‍िगड़ सकती है। 🥒 *आरोग्य संजीवनी* 🍓 अगर आप कहते है आपको बवासीर ना हो अगर हो गयी है तो जल्दी ठीक हो जाये तो ये बाटे गांठ बांध लो। *फ़ास्ट फ़ूड, तला भुना कम से कम खाये हफ्ते में बस एक बार अगर बवासीर हो गयी है तो ठीक होने तक बिलकुल भी ना खाये।
*भोजन में सलाद की मात्रा उतनी रेके जितना की भोज। *अछि तरह चबा के खाये। जल्दी – जल्दी बलकुल ना खाय।
*भोजन के वक़्त सिर्फ भोजन करे कुछ और नहीं बात भी नहीं *भोजन का नियम बनाये उसी समय पर भोजन करे पहले या बाद में नहीं।
*भोजन करने के दौरान या 30 मिनट बड़े तक पानी ना पिए और दूध तो कतई नहीं। *रोज दोपहर को भोजन के 30 मिनट बाद छाछ पिए हो सके तो नारियल के बालो की राख डालकर।
*ऑफिस में लगातार ना बैठे रहे हो सके तो हर 1 घंटे में उठकर घूमे और सुबह 30 मिनट पार्क में या बहार या चाट पर घूमे। योग और व्यायाम करेंगे तो बहोत लाभ मिलेगा *बवासीर होने पर उपरोक्त दिए गए हल्दी की नुस्खों को जरूर अपनाये ठीक हो जायेंगे।
*अगर बवासीर गंभीर रूप धारण कर चुकी है तो नुस्खों के चक्र में पड़ कर समस्या को और ना बढ़ाये तुंरत किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाए या हमे अमर क्लिनिक पैर संपर्क करे हम सालो से गंभीर से गंभीर बवासीर का इलाज करते आ रहे है। 📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
यह बहुत ही प्रलय कारी युद्ध था जो महादेव और विष्णु के मध्य लड़ा गया था बात उस समय की है जब विष्णु जी लक्ष्मी जी से नाराज होकर कहीं चले गए थे। ये मामला शुरू होता है एक प्रश्न से। और वो प्रश्न था, “क्या आपके संपूर्ण हृदय में केवल मैं रहती हूँ? मुझे विश्वास दिलाइये?”
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विष्णु जी का विष्णु जी का जवाब था, “देवी आप तो जानती ही हैं की मेरे हृदय के आधे भाग में केवल महादेव यानि शिव विराजते हैं और शेष भाग में संपूर्ण मानव जाति जीव जंतु और आप का स्थान है फिर मैं कैसे कह दूं कि मेरी ह्रदय का संपूर्ण भाग आपके लिए ही है”।
*विष्णु जी का जवाब सुनकर लक्ष्मी जी को गुस्सा आ जाता है। उन्होंने कहा की “मेरे संपूर्ण हृदय में तो केवल आप हैं तो आपके संपूर्ण ह्रदय में मैं क्यों न हूँ अगर संपूर्ण ह्रदय में स्थान नहीं देना तो तो अपने ह्रदय के बाकी हिस्से से भी मुझे निकाल दीजिए।” *और इस तरफ लक्ष्मी जी की ही पांच बहने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थी। उनकी तपस्या पूर्ण होने वाली थी जिसके कारण भगवान विष्णु को उन पांचों बहनों को की तपस्या का फल देने के लिए पाताल लोक जाना पड़ा।
*उन पांचों बहनों ने या वरदान मांगा कि भगवान विष्णु अपनी सारी स्मृति भूल कर उनके साथ पाताल लोक में ही रहे। माता लक्ष्मी द्वारा कहे गए उन कटुक शब्दों के कारण भगवान विष्णु ने उन पांचों बहनों को तथास्तु का वरदान दे दिया। *जिसके कारण पर अपनी सारी झूठी भूल गए और संसार से उनके पालनहार छीन गए। जब लक्ष्मी जी को उनकी गलती का एहसास हो तब वह महादेव के पास गई और महादेव, विष्णु को वापस ले जाने के लिए पाताल लोक आते हैं। यहां महादेव और भगवान विष्णु में महाप्रलय कारी युद्ध होता है।
*दोनों ही देव अपने-अपने स्त्रोत का प्रयोग करते हैं अंत में भगवान विष्णु अत्यधिक क्रोधित होकर अपना नारायणास्त्र, शिव पर चला देते हैं और महादेव अपना पशुपास्त्र, भगवान विष्णु पर चला देते हैं। *परिणाम यह होता है कि दोनों ही बंधक बन जाते हैं ऐसी स्थिति को देख उन पांचों बहनों ने भगवान विष्णु से अपना वरदान वापस मांगा और सृष्टि को सर्वनाश होने से बचा लिया। और इस संसार को उनके पालनहार अर्थात भगवान विष्णु वापस मिल गए।
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⚜️ *अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।। *मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।

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