
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 17 नवम्बर 2025
17 नवम्बर 2025 दिन सोमवार को मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष कि त्रियोदशी तिथि है। आज सोमवार का अत्यंत शुभ प्रदोष व्रत भी है। जिसको पुत्र नहीं हो उनके लिए आज का दिन बहुत ही शुभ है। और ऐसे शुभ योग तो जीवन में संयोग से ही प्राप्त हो पाता है। इसीलिए आज रुद्राभिषेक ने करवा सके तो शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढा़कर भगवान शिव की पूजा अर्चना करें। ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। आज शिवपूजन में सफेद चंदन में केसर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ने से घर में पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशांति दूर होती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है। जिन्हें पुत्र प्राप्ति की इच्छा हो वे लोग तो आज अवश्य इस उपाय को करें। क्योंकि आज प्रदोष भी है। आप सभी सनातनियों को “प्रदोष व्रत” की हार्दिक शुभकामनाऐं।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ *दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
*सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है। *सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
*जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है। *सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल*
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी पूर्ण रात्रि तक
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र चित्रा 05:01 AM तक उपरांत स्वाति
🪐 नक्षत्र स्वामी – चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं और इसके अधिष्ठाता देवता भगवान विश्वकर्मा हैं, मंगल इस नक्षत्र को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है।
⚜️ योग – प्रीति योग 07:22 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
⚡ प्रथम करण : गर – 05:58 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – पूर्ण रात्रि तक
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:23:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:10:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:59 ए एम से 05:52 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:25 ए एम से 06:45 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:45 ए एम से 12:27 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:27 पी एम से 05:53 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:27 पी एम से 06:47 पी एम
💧 अमृत काल : 09:52 पी एम से 11:39 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:40 पी एम से 12:33 ए एम, नवम्बर 18
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – सोम प्रदोष व्रत/ मण्डला काल प्रारम्भ/ अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस, राष्ट्रीय मिर्गी जागरूकता दिवस, विश्व समयपूर्व जन्म दिवस, महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय स्मृति दिवस, राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस, राष्ट्रीय मक्खन दिवस, राष्ट्रीय अपस्मार दिवस, भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान जन्म दिवस, अभिनेता जेमिनी गणेशन जन्म दिवस, मराठी लेखक रत्नाकर रामकृष्ण मटकरी जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय छात्र दिवस, राष्ट्रीय पैदल यात्रा दिवस, राष्ट्रीय अनफ्रेंड दिवस, पेट्रोलियम दिवस, लिटिल मरमेड दिवस, श्रीनिवास कुमार सिन्हा पुण्य तिथि, राष्ट्रीय पुस्तक दिवस (सप्ताह), नवजात शिशु दिवस (सप्ताह) ✍🏼 *तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार कभी भी रोटी गिनकर नहीं बनानी चाहिए। कहते हैं जिस घर में रोटी गिनकर बनाई जाती है वहां कभी बरकत नहीं होती। ऐसे घर में हमेशा पैसों की कमी बनी रहती है।
*अक्सर लोग करते हैं ये गलती अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं रोटी के लिए आटा गूंथते समय उस पर अपनी उंगलियों के निशान लगा देती हैं जो पिंड के समान दिखाई देते हैं। शास्त्र अनुसार ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए इससे दोष लगता है। *पहली और आखिरी रोटी का क्या करें पहले के समय में पहली रोटी गाय के लिए निकाली जाती थी। आज के दौर में कुछ ही लोग इस नियम को फॉलो करते होंगे लेकिन बाकी ऐसा नहीं करते हैं। लेकिन वास्तु और ज्योतिष शास्त्र अनुसार पहली रोटी गाय को और आखिरी रोटी कुत्ते को खिलानी चाहिए। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा सदैव बनी रहती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अरण्डी के बीजों की गिरी को पीसकर उसकी पुल्टिस बाँधने से अथवा आम की गुठली या नीम या अनार के पत्तों को पानी में पीसकर लगाने से फोड़े-फुन्सी में लाभ होता है।
*एक चुटकी कालेजीरे को मक्खन के साथ निगलने से या 1 से 3 ग्राम त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से तथा त्रिफला के पानी से घाव धोने से लाभ होता है। *सुहागे को पीसकर लगाने से रक्त बहना तुरंत बंद होता है तथा घाव शीघ्र भरता है।
*फोड़े से मवाद बहने पर *अरण्डी के तेल में आम के पत्तों की राख मिलाकर लगाने से लाभ होता है।
*थूहर के पत्तों पर अरण्डी का तेल लगाकर गर्म करके फोड़े पर उल्टा लगायें। इससे सब मवाद निकल जायेगा। घाव को भरने के लिए दो-तीन दिन सीधा लगायें। *पीठ का फोड़ा होने पर गेहूँ के आटे में नमक तथा पानी डालकर गर्म करके पुल्टिस बनाकर लगाने से फोड़ा पककर फूट जाता है।
🍂 आरोग्य संजीवनी 🍁
कचनार की छाल और गोरखमुंडी : वैसे यह दोनों जड़ी बूटी बेचने वाले से मिल जाती हैं पर यदि कचनार की छाल ताजी ले तो अधिक लाभदायक है। कचनार (Bauhinia purpurea) का पेड़ हर जगह आसानी से मिल जाता है।
*कचनार इसकी सबसे बड़ी पहचान है – सिरे पर से काटा हुआ पत्ता। इसकी शाखा की छाल ले। तने की न ले। उस शाखा (टहनी) की छाल ले जो 1 इंच से 2 इंच तक मोटी हो। बहुत पतली या मोटी टहनी की छाल न ले। गोरखमुंडी का पौधा आसानी से नहीं मिलता इसलिए इसे जड़ी बूटी बेचने वाले से खरीदे। *कैसे प्रयोग करे ?* *कचनार की ताजी छाल 25-30 ग्राम (सुखी छाल 15 ग्राम ) को मोटा मोटा कूट ले। 1 गिलास पानी मे उबाले। जब 2 मिनट उबल जाए तब इसमे 1 चम्मच गोरखमुंडी (मोटी कुटी या पीसी हुई ) डाले। इसे 1 मिनट तक उबलने दे। छान ले। हल्का गरम रह जाए तब पी ले। ध्यान दे यह कड़वा है परंतु चमत्कारी है।
*गांठ कैसी ही हो, प्रोस्टेट बढ़ी हुई हो, जांघ के पास की गांठ हो, काँख की गांठ हो गले के बाहर की गांठ हो , गर्भाशय की गांठ हो, स्त्री पुरुष के स्तनो मे गांठ हो या टॉन्सिल हो, गले मे थायराइड ग्लैण्ड बढ़ गई हो या (फैट की गांठ ) हो लाभ जरूर करती है। कभी भी असफल नहीं होती। अधिक लाभ के लिए दिन मे 2 बार ले। लंबे समय तक लेने से ही लाभ होगा। 20-25 दिन तक कोई लाभ नहीं होगा निराश होकर बीच मे न छोड़े। *गाँठ को घोलने में कचनार पेड़ की छाल बहुत अच्छा काम करती है. आयुर्वेद में कांचनार गुग्गुल इसी मक़सद के लिये दी जाती है जबकि ऐलोपैथी में ओप्रेशन के सिवाय कोई और चारा नहीं है।
*आकड़े के दूध में मिट्टी भिगोकर लेप करने से तथा निर्गुण्डी के 20 से 50 मि.ली. काढ़े में 1 से 5 मि.ली अरण्डी का तेल डालकर पीने से लाभ होता है। *गेहूँ के आटे में पापड़खार तथा पानी डालकर पुल्टिस बनाकर लगाने से न पकने वाली गाँठ पककर फूट जाती है तथा दर्द कम हो जाता है।
📚 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ एक बार राजा भोज के दरबार में एक सवाल उठा कि ऐसा कौन सा कुआं है जिसमें गिरने के बाद आदमी बाहर नहीं निकल पाता? इस प्रश्न का उत्तर कोई नहीं दे पाया। आखिर में राजा भोज ने मंत्री से कहा कि इस प्रश्न का उत्तर सात दिनों के अंदर लेकर आओ, वरना आपको अभी तक जो इनाम धन आदि दिया गया है,वापस ले लिए जायेंगे तथा इस नगरी को छोड़कर दूसरी जगह जाना होगा। *छः दिन बीत चुके थे। राज पंडित को जबाव नहीं मिला था। निराश होकर वह जंगल की तरफ गया। वहां उसकी भेंट एक गड़रिए से हुई। गड़रिए ने पूछा -आप तो राजपंडित हैं, राजा के दुलारे हो फिर चेहरे पर इतनी उदासी क्यों?
*यह गड़रिया मेरा क्या मार्गदर्शन करेगा? सोचकर पंडित ने कुछ नहीं कहा। इसपर गडरिए ने पुनः उदासी का कारण पूछते हुए कहा – पंडित जी हम भी सत्संगी हैं,हो सकता है आपके प्रश्न का जवाब मेरे पास हो, अतः नि:संकोच कहिए। राज पंडित ने प्रश्न बता दिया और कहा कि अगर कलतक प्रश्न का जवाब नहीं मिला तो राजा नगर से निकाल देगा। *गड़रिया बोला -मेरे पास पारस है उससे खूब सोना बनाओ। एक भोज क्या लाखों भोज तेरे पीछे घूमेंगे।बस,पारस देने से पहले मेरी एक शर्त माननी होगी कि तुझे मेरा चेला बनना पड़ेगा।
*राज पंडित के अंदर पहले तो अहंकार जागा कि दो कौड़ी के गड़रिए का चेला बनूं? लेकिन स्वार्थ पूर्ति हेतु चेला बनने के लिए तैयार हो गया। *गड़रिया बोला -पहले भेड़ का दूध पीओ फिर चेले बनो। राजपंडित ने कहा कि यदि ब्राह्मण भेड़ का दूध पीयेगा तो उसकी बुद्धि मारी जायेगी। मैं दूध नहीं पीऊंगा। तो जाओ, मैं पारस नहीं दूंगा – गड़रिया बोला।
*राज पंडित बोला – ठीक है,दूध पीने को तैयार हूं,आगे क्या करना है? *गड़रिया बोला-अब तो पहले मैं दूध को झूठा करूंगा फिर तुम्हें पीना पड़ेगा।
*राजपंडित ने कहा -तू तो हद करता है! ब्राह्मण को झूठा पिलायेगा? तो जाओ, गड़रिया बोला। राज पंडित बोला -मैं तैयार हूं झूठा दूध पीने को । *गड़रिया बोला-वह बात गयी।अब तो सामने जो मरे हुए इंसान की खोपड़ी का कंकाल पड़ा है, उसमें मैं दूध दोहूंगा, उसको झूठा करूंगा, कुत्ते को चटवाऊंगा फिर तुम्हें पिलाऊंगा।तब मिलेगा पारस। नहीं तो अपना रास्ता लीजिए। राजपंडित ने खूब विचार कर कहा-है तो बड़ा कठिन लेकिन मैं तैयार हूं।
*गड़रिया बोला-मिल गया जवाब। यही तो कुआं है लोभ का, तृष्णा का जिसमें आदमी गिरता जाता है और फिर कभी नहीं निकलता। जैसे कि तुम पारस को पाने के लिए इस लोभ रूपी कुएं में गिरते चले गए। ══════◄••ॐ••►═══════ ⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्। *आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।



