ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 15 नवम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 15 नवम्बर 2025
15 नवम्बर 2025 दिन शनिवार को मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष कि एकादशी तिथि है। आज स्मार्त एवं वैष्णव का सभी के लिए उत्पन्ना एकादशी व्रत है। एकादशी व्रत सर्वश्रेष्ठ एवं सार्वाधिक पुण्यदायी माना गया है। इस एकादशी व्रत को प्रत्येक सनातनी व्यक्ति को अवश्य करना चाहिए। अगर व्रत नहीं कर सके किसी भी कारण तो कम से कम उसे चावल तो अवश्य ही नहीं खाना चाहिए। करण की एकादशी को व्रत न करने पर भी चावला न खाने अथवा रोटी मात्रा खाने से व्रत का आधा फल अवश्य ही मिल जाता है। आज यायीजययोग एवं परंयमघंटयोग भी है। आप सभी सनातनियों को “उत्पन्ना एकादशी व्रत” की हार्दिक शुभकामनाऐं।।
*
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए। *शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
*शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है । *शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
*शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है । 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_

🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 02:37 AM तक उपरांत द्वादशी
📝 तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 11:34 PM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य ग्रह है। तथा इसके अधिष्ठाता देवता अर्यमन हैं, जो सूर्य के ही एक रूप हैं।
⚜️ योग – विष्कम्भ – पूर्ण रात्रि तक
प्रथम करण : बव – 01:40 पी एम तक
द्वितीय करण: बालव – 02:37 ए एम, नवम्बर 16 तक कौलव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:22:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:12:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:58 ए एम से 05:51 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:24 ए एम से 06:44 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:44 ए एम से 12:27 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:27 पी एम से 05:54 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:27 पी एम से 06:47 पी एम
💧 अमृत काल : 03:42 पी एम से 05:27 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:33 ए एम, नवम्बर 16
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – उत्पत्ति एकादशी (सर्वे स्मार्त)/ आलंदी यात्रा/ महालय समाप्ति् रविदास जयन्ती/ गुरु नानक जयन्ती/ भगवान बिरसा मुंडा जयन्ती, झारखंड स्थापना दिवस, राष्ट्रीय परोपकार दिवस, जनजातीय गौरव दिवस, अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध विरोधी दिवस, नारायण दत्तात्रेय आप्टे शहीद दिवस, महात्मा गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोड से फांसी दिवस, शहीद गरुड़ कमांडों (अशोक चक्र से सम्मानित) ज्योति प्रकाश निराला जन्म दिवस, प्रसिद्ध भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा जन्म दिवस, राष्ट्रीय पुस्तक दिवस (सप्ताह), नवजात शिशु दिवस (सप्ताह) ✍🏼 *तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
🏘️ Vastu tips 🏚️
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार कभी भी रोटी गिनकर नहीं बनानी चाहिए। कहते हैं जिस घर में रोटी गिनकर बनाई जाती है वहां कभी बरकत नहीं होती। ऐसे घर में हमेशा पैसों की कमी बनी रहती है।
*अक्सर लोग करते हैं ये गलती अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं रोटी के लिए आटा गूंथते समय उस पर अपनी उंगलियों के निशान लगा देती हैं जो पिंड के समान दिखाई देते हैं। शास्त्र अनुसार ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए इससे दोष लगता है। *पहली और आखिरी रोटी का क्या करें? पहले के समय में पहली रोटी गाय के लिए निकाली जाती थी। आज के दौर में कुछ ही लोग इस नियम को फॉलो करते होंगे लेकिन बाकी ऐसा नहीं करते हैं। लेकिन वास्तु और ज्योतिष शास्त्र अनुसार पहली रोटी गाय को और आखिरी रोटी कुत्ते को खिलानी चाहिए। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा सदैव बनी रहती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता
*असीम ऊर्जा और तेज: ज्योतिष और आचार्य (पुजारियों) की मान्यताओं के अनुसार, जब किसी नई मूर्ति की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ की जाती है, तो वैदिक मंत्रों और अनुष्ठानों के माध्यम से उस मूर्ति में दिव्य ऊर्जा (प्राण शक्ति) का संचार होता है। *शीशे का टूटना: यह माना जाता है कि मूर्ति में संचारित यह ऊर्जा (या ‘तेज’) इतनी प्रचंड और शक्तिशाली होती है कि जब प्राण प्रतिष्ठा के दौरान मूर्ति की आँखों से पट्टी हटाई जाती है और उसका पहला प्रतिबिंब सामने रखे गए शीशे पर पड़ता है, तो वह साधारण शीशा उस असीम ऊर्जा को सहन नहीं कर पाता और टूटकर बिखर जाता है।
*उद्देश्य: इस प्रक्रिया को ‘चक्षु उन्मिलन’ कहा जाता है। शीशा दिखाने का एक कारण यह भी बताया जाता है कि मूर्ति में भगवान का तेज आ गया है या नहीं, इसकी परीक्षा हो जाती है। यह भी मान्यता है कि पहली झलक स्वयं भगवान ही शीशे में देखते हैं, ताकि किसी और की ‘नजर’ न लगे। 🍃 *आरोग्य संजीवनी* ☘️ आराम के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं 👇
*
गुनगुना पानी पिएं – इससे पाचन में मदद मिलेगी और भारीपन कम होगा।
*हींग और अजवाइन का पानी – एक चुटकी हींग और आधा चम्मच अजवाइन को गुनगुने पानी में उबालकर पिएं, गैस और भारीपन दोनों में राहत मिलेगी। *नींबू पानी या छाछ में काला नमक डालकर पिएं – इससे भी पेट हल्का महसूस होगा।
*थोड़ा टहलें – खाने के बाद हल्की वॉक करने से पाचन सुधरता है। *भारी या मीठा खाना कुछ समय के लिए न खाएं – हल्का खाना जैसे दलिया, खिचड़ी या सूप लें।
*अगर अगले 24 घंटे में आराम नहीं मिलता या तेज़ दर्द/उल्टी जैसा कुछ महसूस हो, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें। 📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
*एक जंगल में एक संत अपनी कुटिया में रहते थे। एक किरात (शिकारी), जब भी वहाँ से निकलता संत को प्रणाम ज़रूर करता था। एक दिन शिकारी संत से बोला की मैं तो मृग का शिकार करता हूँ, आप किसका शिकार करने जंगल में बैठे हैं? संत बोले- श्री कृष्ण का, और रोने लगे। तब शिकारी बोला अरे, बाबा रोते क्यों हो ? मुझे बताओ वो दिखता कैसा है? मैं पकड़ के लाऊंगा उसको। संत ने भगवान का स्वरुप बताया, कि वो सांवला है, मोर पंख लगाता है, बांसुरी बजाता है। किरात बोला- बाबा जब तक आपका शिकार पकड़ नहीं लाता, पानी तक नही पियूँगा। फिर वो एक जगह जाल बिछा कर बैठ गया। 3 दिन बीत गए प्रतीक्षा करते भगवान को दया आ गयी वो बांसुरी बजाते आ गए, खुद ही जाल में फंस गए। शिकारी चिल्लाने लगा शिकार मिल गया, शिकार मिल गया। अच्छा बच्चे.. 3 दिन भूखा प्यासा रखा, अब मिले हो? कृष्ण को शिकार की भांति अपने कंधे पे डाला और संत के पास ले गया। बाबा आपका शिकार लाया हुँ, बाबा ने जब ये दृश्य देखा तो क्या देखते हैं शिकारी के कंधे पे श्री कृष्ण हैं और जाल में से मुस्कुरा रहे हैं। संत चरणों में गिर पड़े फिर ठाकुर से बोले- मैंने बचपन से घर बार छोडा आप नही मिले और इसे ३ दिन में मिल गए ऐसा क्यों..? भगवान बोले- इसने तुम्हारा आश्रय लिया इसलिए इसे 3 दिन में दर्शन हो गए। अर्थात भगवान पहले उस पर कृपा करते हैं जो उनके दासों के चरण पकड़े होता है, शिकारी को पता भी नहीं था की भगवान कौन हैं। पर संत को रोज़ प्रणाम करता था। संत प्रणाम और दर्शन का फल ये है कि 3 दिन में ही ठाकुर मिल गए,।कबीर दास जी कहते हैं। “संत मिलन को जाईये तजि ममता अभिमान।
ज्यो ज्यो पग आगे बढे कोटिन्ह यज्ञ समान।।”
*जब आप माया व अभिमान से मुक्त होकर संतों की ओर बढ़ते हैं, तो आपके द्वारा उठाया गया हर कदम कोटि यज्ञों के बराबर पुण्य प्रदान करता है।जब हम विनम्र होकर संत-महात्माओं के पास जाते हैं, तो उनका सत्संग और आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे हमारे सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। *ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय,
वंदे कृष्णं जगद्गुरुम्,🙏
══════◄••❀••►═════
⚜️ *एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।। *यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।

Related Articles

Back to top button