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Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 01 फरवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 01 फरवरी 2026
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌝 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – रविवार माघ माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 03:39 AM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथि स्वामी – पूर्णिमा तिथि पूर्णत्व की तिथि मानी जाती है. इस तिथि के स्वामी स्वयं चन्द्र देव हैं. इस दिन सूर्य और चन्द्रमा समसप्तक होते हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 11:57 PM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं। हालाँकि, इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता बृहस्पति (गुरु) हैं।
⚜️ योग – प्रीति योग 10:18 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
प्रथम करण : विष्टि 04:43 PM तक
द्वितीय करण : बव 03:39 AM तक, बाद बालव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:50:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:40:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:24 से 06:16 तक
🌇 प्रातः सन्ध्या : 29:50 पी एम बजे से 07:09 ए एम तक
🌟 अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:56 तक
🔯 विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:09 तक
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 18:00 पी एम से 19:19 पी एम तक
सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:09 ए एम से 23:58 पी एम तक
🌸 रवि पुष्य योग: पूरे दिन (रात्रि 01:44 तक) – यह योग अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि पुष्य योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ गुरु रविदास जयंती/ पूर्णिमा व्रत/ पूर्णिमा प्रारम्भ सुबह 05.52/ सत्य व्रत/ माघ पूर्णिमा/ रविदास जयंती/ माघस्नान समाप्त/ अग्निउत्सव (उड़ीसा)/ नई दिल्ली स्थापना दिवस, भारतीय तटरक्षक दिवस, विश्व कैंसर दिवस, राष्ट्रीय डार्क चॉकलेट दिवस, राष्ट्रीय उठने का दिवस, राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रीय बाहर खेलने का दिवस, नाश्ते में आइसक्रीम खाने का दिवस, राष्ट्रीय टेक्सास दिवस, राष्ट्रीय बेक्ड अलास्का दिवस, राष्ट्रीय सर्प दिवस, भारतीय मूल की पहली अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला स्मृति दिवस, भारतीय सर्वेक्षक नैन सिंह रावत स्मृति दिवस, अभिनेता जैकी श्रॉफ़ जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर अजय जडेजा जन्म दिवस, क्रांतिकारी रामहरख सिंह सहगल स्मृति दिवस, वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)
✍🏼 तिथि विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है
🗼 Vastu tips
वास्तु शास्त्र की माने तो ध्वनि तरंगें आसपास की ऊर्जा को सक्रिय करती हैं। विंड चाइम और घंटियों की मधुर ध्वनि घर की रुकी हुई नकारात्मक ऊर्जा को तोड़कर सकारात्मक माहौल बनाती है। यही कारण है कि मंदिरों और मुख्य द्वार पर लगी घंटियों का विशेष महत्व माना गया है।
*विंड चाइम की सही दिशा क्यों है जरूरी विंड चाइम की दिशा गलत होने पर इसका असर उल्टा भी हो सकता है। सही दिशा में लगी विंड चाइम जीवन में अवसर, शांति और तरक्की लाती है, जबकि गलत दिशा मानसिक अशांति का कारण बन सकती है। *किस दिशा में लगाएं कौन-सी विंड चाइम अगर आप पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में विंड चाइम लगाना चाहते हैं, तो धातु से बनी विंड चाइम शुभ मानी जाती है। यह दिशा बच्चों के करियर, सौभाग्य और नए अवसरों को मजबूत करती है।
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
ये 5 चीजें हमेशा गुप्त रखें:
*आपका अगला कदम : लोगों को परिणाम दिखाएं, अपनी योजना नहीं। *आपकी कमाई : अगर कम बताओगे तो लोग इज्जत नहीं करेंगे, ज्यादा बताओगे तो उधार मांगेंगे।
*घर के झगड़े: दुनिया मजे लेती है, सुलझाती नहीं है। *आपकी लव लाइफ: नजर लगते देर नहीं लगती।
*आपकी कमजोरी: लोग इसका इस्तेमाल आपके खिलाफ ही करेंगे। *याद रखें: खुली किताब न बनें। जो लोग कम बोलते हैं, उनका प्रभाव ज्यादा होता है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
पैरों की बिवाइयां (एड़िया फटने) के कुछ घरेलू इलाज👇
रात्रि में सोने से पहले पैरों को हल्के गर्म पानी में साधारण नमक (दो गिलास पानी में एक चम्मच नमक या कच्ची फिटकरी का बारीक पाउडर) डालकर उसने पैरों को 5 से10 मिनट तक डुबोकर, सेंक करें। उसके बाद खुरदरे तौलिए से रगड़ कर मृत त्वचा को निकालकर पैर साफ कर ले।
*25 ग्राम देसी मोम (शहद के छत्ते का प्राकृतिक मोम) और 50 ग्राम तिल के तेल को मिलाकर गर्म करें, अच्छी तरह मिल जाने पर इस मिश्रण को किसी चौड़े मुख्य शीशी में भरकर रख लें उपरोक्त विधि से पैरों को साफ करने के पश्चात, इस मिश्रण को फटी बिवाईयों में भर लें 1 सप्ताह में फायदा नजर आएगा। *उपरोक्त तरीके से पैर साफ करने के बाद फटी त्वचा तथा बिवाईयों पर रोज सोने से पहले दो-तीन मिनट तक अरंड के तेल की मालिश करें। शरीर के किसी भी भाग की त्वचा फटने से सभी बिवाईयों पर एरंड के तेल की मालिश करने से शीघ्र लाभ होता है।
*पांव की उंगलियों में निकलने वाले गिट्टों (corns) पर रोज प्रात: और रात्रि सोते समय अरंड के तेल से धीरे-धीरे दो-तीन मिनट मालिश करते रहें ताकि तेल उसमें शोषित हो जाए ऐसा करने से तीन चार सप्ताह में गिट्टे बिल्कुल समाप्त हो जाते हैं। *पैरों पर जैतून, अरंडी, बादाम के तेल की मालिश ज्यादा और शीघ्र फायदा करती है उसके बाद आप जुराब पहन सकते हैं
*सरसों के तेल में मोम डालकर पिघला लें, फिर थोड़ा कपूर डालें, फिर थोड़ा गर्म करके ठंडा होने पर रोज अपनी एड़ियों पर लगाएं, जल्दी ही फायदा होगा। 📚 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
01 फरवरी 2026 माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान है। इस दिन गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों के घाट पर भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं और और पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं। हालांकि कई लोग ऐसे भी होते हैं जिनके घर के आसपास नदियां नहीं होती और कई लोग अन्य कारणों से भी पवित्र नदियों तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में आज आपको आचार्य श्री गोपी राम बताएंगे कि बिना नदियों में पवित्र स्नान किए भी कैसे शुभ फल प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके लिए आपको नीचे दिए गए कार्य घर पर ही संपन्न करने चाहिए।
👉🏼 माघ पूर्णिमा के दिन घर पर करें ये उपाय
*घर पर स्नान के दौरान करें ये काम- माघ पूर्णिमा के दिन आपको घर पर स्नान करते समय कुछ बूंदें गंगाजल की पानी में मिलानी चाहिए। अगर गंगाजल न हो तो नहाते समय ‘गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिंधु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।।’ मंत्र का जप आपको करना चाहिए। ऐसा करने से गंगा में डुबकी लगाने जितना पुण्य फल आपको प्राप्त होता है। *घर पर करें तुलसी पूजन- पूर्णिमा तिथि के दिन तुलसी का पूजन करना बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए जो लोग पवित्र नदियों में स्नान नहीं कर पा रहे हैं उन्हें तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना चाहिए और तुलसी की परिक्रमा करनी चाहिए।
*श्री सत्यनारायण की कथा का करें पाठ- सत्यनारायण की कथा का पाठ भी आप माघ पूर्णिमा के दिन घर पर कर सकते हैं। इस कथा का पाठ करना आपके पारिवारिक जीवन में सुख शांति लाता है और साथ ही आपको भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। *मंत्रों का जप- माघ पूर्णिमा के दिन आपको एकांत स्थल पर बैठकर देवी गंगा, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और भोलेनाथ, अपने इष्ट देव और पितरों के मंत्र का जप करने से भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
*दान- माघ पूर्णिमा के दिन दान का भी बड़ा महत्व है इसलिए आपको इस दिन दान भी अवश्य करना चाहिए। इस दिन तिल, गुड़, घी, कंबल, अन्न और धन का दान आपको करना चाहिए। इन चीजों का दान करने से देवी-देवता आप पर कृपा बरसाते हैं और पितृ भी प्रसन्न होते हैं। *चंद्र पूजन- माघ पूर्णिमा के दिन आपको घर पर ही चंद्र पूजन करना चाहिए। चंद्र पूजन के लिए रात्रि का समय सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान चंद्रमा को जल का अर्घ्य देना चाहिए और चंद्र मंत्रों का जप करना चाहिए।
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⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।।
*_पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।।

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