
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 08 मार्च 2026_
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। *रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 09:11 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र स्वाति 01:31 PM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु हैं। इसके अधिष्ठाता देवता वायु (पवन देव) या सरस्वती हैं।
⚜️ योग : ध्रुव योग 07:03 AM तक, उसके बाद व्याघात योग
⚡ प्रथम करण : कौलव 08:11 AM तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल 09:11 PM तक, बाद गर
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:23:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:03:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 01 मिनट से 05 बजकर 50 मिनट तक
🌇 प्रातः सन्ध्या : शाम को 29:25 मिनट से सुबह 06:39 बजे तक
🔯 विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 17 मिनट तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 23 मिनट से लेकर 06 बजकर 47 मिनट तक
🌟 अभिजित मुहूर्त- 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक
💧 अमृत काल – 3:54 AM से 5:39 AM तक
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग – 8 मार्च को सूर्योदय से पहले
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम को 18:25 मिनट से शाम 19:38 बजें तक
🗣️ निशिता मुहूर्त : शाम को 24:07 मिनट से शाम 24:56 बजे तक
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – रंग पञ्चमी/ अंतर्राष्ट्रीय सेवा के लिए एयर इंडिया इंटरनेशनल स्थापना दिवस, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जन्म दिवस, प्रसिद्ध संगीतकार साहिर लुधियानवी जन्म दिवस, उपन्यासकार हरि नारायण आपटे जन्म दिवस, पंजाब के मुख्यमंत्री ‘गाँधी स्मारक निधि’ गोपी चन्द भार्गव जन्म दिवस, प्रसिद्ध नेता बाल गंगाधर खेर स्मृति दिवस, अभिनेत्रा फरदीन खान जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
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रंग पंचमी पर उपयोगी टिप्स और सावधानियां
रंग पंचमी को सुरक्षित और स्वास्थ्यकर तरीके से मनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:*
रंगों का सही चयन
प्राकृतिक रंग: केमिकल वाले रंगों से बचें। फूलों, फलों और पत्तियों से बने प्राकृतिक रंग का उपयोग करें।*
त्वचा की सुरक्षा: पूजा करने से पहले अपने शरीर पर नारियल का तेल लगा लें।* आंखों की सुरक्षा: रंगों को आंखों में न जाने दें। आंखों में कुछ लग जाए तो तुरंत ठंडे पानी से धोएं।*
पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी* जैविक रंग: पानी को प्रदूषित करने वाले रंगों का उपयोग न करें।*
पेड़-पौधों की देखभाल: सजावट के लिए पेड़ों को नुकसान न पहुंचाएं।* जानवरों का ख्याल: जानवरों के साथ खेलते समय सावधानी बरतें। 🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
रात को पानी पीना हो तो ….*
ठंडा पानी रात को नहीं पीना चाहिए | सूर्यास्त के बाद पानी न पियें तो अच्छा है, पियें तो भी गुनगुना | और सूर्योदय के पहले भी पानी गुनगुना ही पीना चाहिए, नहीं तो मंदाग्नि होगी |
🪵 आरोग्य संजीवनी ☘️
*पैरों की रिफ्लेक्सोलॉजी से शरीर में रक्त संचार बेहतर होने में मदद मिलती है। पैर के तलवे में मौजूद बिंदुओं पर हल्का दबाव देने से नसों को उत्तेजना मिलती है, जिससे थकान कम होती है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। यह तरीका तनाव, चिंता और मानसिक थकावट को कम करने में सहायक माना जाता है, क्योंकि यह मस्तिष्क से जुड़े बिंदुओं को सक्रिय करता है। *हृदय और फेफड़ों से जुड़े बिंदुओं पर काम करने से श्वसन प्रक्रिया और हृदय की कार्यक्षमता को सहयोग मिलता है। पेट, यकृत और आंतों से जुड़े क्षेत्रों की मालिश से पाचन तंत्र मजबूत होने, गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में आराम महसूस हो सकता है।
*गुर्दे और मूत्राशय से संबंधित बिंदु शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को समर्थन देते हैं। नियमित रूप से यह अभ्यास करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर, सिरदर्द और मांसपेशियों के दर्द में भी राहत मिल सकती है। यह एक पूरक (सहायक) प्राकृतिक विधि है, जिसे स्वस्थ जीवनशैली, सही आहार और डॉक्टर की सलाह के साथ अपनाना अधिक लाभकारी माना जाता है। 📚 *गुरु भक्ति योग* 📚 पुराणों में कल्पवास के नियम
धर्म शास्त्रों में कल्पवास के 21 नियम बताए गए हैं। इसमें शामिल हैः* असत्य (झूठ) न बोलना, 2. हर परिस्थिति में सत्य बोला, 3. घर-गृहस्थी की चिंता से मुक्त होना, 4. गंगा में सुबह, दोपहर व शाम को स्नान करना, 5. शिविर के बाहर तुलसी का बिरवा रोपना व जौ बोना, 6. तुलसी व जौ को प्रतिदिन जल अर्पित करना, 7. ब्रह्मचर्य का पालन करना, 8. खुद या पत्नी का बनाया सात्विक भोजन करना, 9. सत्संग में भाग लेना, 10. इंद्रियों में संयम रखना, 11. पितरों का पिंडदान करना, 12. हिंसा से दूर रहना, 13. विलासिता से दूर रहना, 14. परनिंदा न करना, 15. जमीन पर सोना, 16. भोर में जगना, 17. किसी भी परिस्थिति में मेला क्षेत्र न छोड़ना, 18. धार्मिक ग्रंथों व पुस्तकों का पाठ करना, 19. आपस में धार्मिक चर्चा करना, 20. प्रतिदिन संतों को भोजन कराकर दक्षिणा देना, 21. गृहस्थ आश्रम में लौटने के बाद कल्पवास के नियम का पालन करना। कल्पवास के चार सख्त नियम
कल्पवास के दौरान 21 नियम बताए गए हैं, लेकिन चार नियम ऐसे हैं जिनका सख्त तौर पर पालन अनिवार्य होता है।*
इसमें से पहला है पवित्र नदी के तट पर साधारण तंबू या झोपड़ी में निवास।* दूसरा है प्रतिदिन सूर्योदय से पहले सहित दिन में तीन बार स्नान।*
तीसरा दिन में केवल एक बार शुद्ध सात्विक भोजन, जिसमें मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज का त्याग हो।_*
चौथा है नियमित पूजा, ध्यान और भजन-कीर्तन के साथ संयमित जीवन।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।

