धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 19 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 19 अक्टूबर 2025
19 अक्टूबर 2025 दिन रविवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष कि त्रयोदशी उपरान्त चतुर्दशी तिथि है। आज मासिक शिवरात्रि व्रत भी है। धनवंतरी जयन्ती एवं कामेश्वरी जयन्ती भी है। आज नरक चतुर्दशी (चन्द्रोदय: रात्रि 04: 47 AM ) का पालन व्रत भी है। आज चंद्रोदय होने पर चतुर्दशी हो तभी जुते हुए खेत की मिट्टी लाकर अपामार्ग की टहनी के साथ रखें। अब इसके चारों तरफ एक लोटे में जल भरकर उसके ऊपर सीधे हाथ से साइड से परिक्रमा कीजिए। फिर पूरे शरीर में तेल मालिश के साथ साभ्यंग स्नान करें। इससे समस्त रोग निवृत्त हो जाएंगे। आज मैच लगन शाम को 05 : 39 PM पर हनुमान जयन्ती भी होगी। आप सभी सनातनियों को “भगवान श्री धन्वंतरी जयन्ती, कामेश्वरी जयन्ती, एवं मास शिवरात्रि के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें । रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_

☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 01:51 PM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 05:49 PM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता अर्यमन है
⚜️ योग – इन्द्र योग 02:04 AM तक, उसके बाद वैधृति योग
प्रथम करण : वणिज – 01:51 पी एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 02:45 ए एम, अक्टूबर 20 तक शकुनि
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:24:00
🌅 सूर्यास्तः- सायः 05:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:43 ए एम से 05:34 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:09 ए एम से 06:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:29 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:00 पी एम से 02:45 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:47 पी एम से 06:13 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:47 पी एम से 07:03 पी एम
💧 अमृत काल : 09:59 ए एम से 11:44 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 20
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
💦 अमृत सिद्धि योग : 05:49 पी एम से 06:25 ए एम, अक्टूबर 20
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ काली चौदस/ कामेश्वरी जयन्ती/ मासशिरात्रि/ प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी मातंगिनी हज़ारा जयन्ती, प्रसिद्ध संगीतकार आर. सी. बोराल जन्म दिवस, सामाजिक कार्यकर्ता निर्मला देशपांडे जन्म दिवस, मदर टेरेसा दिवस (अल्बानिया), राष्ट्रीय एलजीबीटी केंद्र जागरूकता दिवस, अंतर्राष्ट्रीय जिन दिवस, टॉनिक दिवस, राष्ट्रीय केंटुकी दिवस, जीवनी डॉ॰ सुब्रह्मण्याम चंद्रशेखर जन्म दिवस, राष्ट्रीय मासिक धर्म दिवस, नेशनल किस योर क्रश डे, विश्व बाल चिकित्सा हड्डी और जोड़ दिवस, राष्ट्रीय सीफूड बिस्क दिवस, स्वतंत्रता सेनानी सारंगधर दास जयन्ती
✍🏼 *तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है। 🌷 *Vastu tips* 🌹
व्यवसायिक लाभ और वित्तीय स्थिति सुधारें
*अगर आप अपनी व्यवसायिक यात्रा से अर्थ लाभ पाना चाहते हैं, अपनी वित्तीय स्थिति को बेहतर करना चाहते हैं, तो रविवार के दिन एक केसर की डिब्बी लेकर, उसे भगवान विष्णु के चरणों से लगाकर अपने पास रख लें और जब कभी आप किसी व्यवसायिक यात्रा से बाहर जायें, तो उस केसर से अपने माथे पर तिलक लगाकर जाए। *वहीं, अगर आप केसर ना ले सकें, तो आप एक डिब्बी में सुखी हल्दी ले लें। रविवार के दिन ऐसा करने से आपको व्यवसायिक यात्राओं से अर्थ लाभ जरूर मिलेगा। लिहाजा आपकी फाइनेंशियल कंडिशन बेहतर होगी।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
असुर अथवा राक्षस या दैत्य और देव दोनों विपरीत गुण को दर्शाते है | दैत्य कोई दस बीस फीट लम्बा या अत्यधिक हष्ट पुष्ट व्यक्ति नहीं होता और देवता कोई चार हाथ वाला इंसान नहीं | सारा अवगुण और सद्गुणों का खल है |
*जिन इंसान में पांच विकार -काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार की भरमार है वे ही असुर है | मुख्य है काम विकार | इससे इंसान हैवान बन जाता है और कुकृत्य करता है | क्रोधी और अहंकारी व्यक्ति हिंसा, हत्या, मार पीट कर दूसरों को दुःख देता है | लोभ और मोह भी दूसरों का शोषण करने को बढ़ावा देता है | अतः ऐसा इंसान आज के युग में दैत्य है | *जिस इंसान के मन में सद्गुण है, प्रेम, शांति, सहयोग, सहनशीलता आदि है वे संत है |
*देवतएं वे इंसान है जिनका जन्म भी पवित्रता के द्वारा सतयुग और त्रेता युग में होता है | उनमें उपरोक्त सभी सद्गुणों के अतिरिक्त पवित्रता(संपूर्ण ब्रह्मचर्य ) की धरना भी होती है | इसीलिए उनके चेहरे पर प्रभामंडल का औरा दिखाया जाता है | 🩻 *आरोग्य संजीवनी* 🩸 कब्ज नाशक: यह मल को कोमल बनाकर उदर को स्वच्छ करता है। दीर्घकालीन कब्ज में अत्यंत प्रभावशाली है। *अम्लपित्त एवं गैस में राहत: पेट में जलन, गैस, खट्टी डकार और अपच जैसी समस्याओं में शीघ्र आराम प्रदान करता है।
*पित्त दोष का शमन: इसके घटक पित्त दोष को संतुलित कर त्वचा रोग, सिरदर्द और एसिडिटी को कम करते हैं। *भोजन पचाने में सहायक: यह अग्नि (पाचन शक्ति) को बढ़ाकर भोजन के पूर्ण पाचन में सहायता करता है।
*तनाव एवं सिरदर्द से मुक्ति: वात एवं पित्त दोष के कारण होने वाले सिरदर्द में लाभकारी है। 🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
जाप माला को प्राण प्रतिष्ठा करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जा सकता है:
*शुद्धीकरण: सबसे पहले, अपनी जाप माला को गंगा पानी और पंचामृत से धो लें ताकि उसमें किसी भी प्रकार की दूषित ऊर्जा से रहित हो जाए। *प्राण प्रतिष्ठा मंत्र: अपनी जाप माला को प्राण प्रतिष्ठा करने के लिए आप इसे शुद्ध आसन पर रखें और ध्यान में चले जाएँ। फिर उसे अपने दोनों हाथों के बीच में रखें और अपने दोनों हाथों को जोड़कर, प्राण प्रतिष्ठा मंत्र का जाप करें। आप अपने गुरु से या योग शास्त्र के जानकारीज्ञ से इस मंत्र की विशेष दिशा निर्देश प्राप्त कर सकते हैं।
*प्राण प्रतिष्ठा: मंत्र के जाप के बाद, आपको अपनी जाप माला को अपने मन और शरीर के साथ जोड़ना होगा। आपको उसे अपनी प्राण शक्ति से चारों ओर से धारित करना होगा और उसमें अपनी ऊर्जा को स्थापित करना होगा। इस प्रक्रिया के दौरान, आपको जाप माला के हर बीज को एक वार मंत्र जाप करने वाद चूमना चाहिए और इस तरह 108 बार जाप में 108 बार चूमना चाहिए। *संकल्प: आपको अपने मन में एक संकल्प बनाना होगा कि आपकी जाप माला अब प्राण प्रतिष्ठित हो गई है और आप उसे अपने इष्ट देवता के लिए प्रयोग करेंगे।
*_इस प्रक्रिया के बाद, आपकी जाप माला प्राण प्रतिष्ठित हो जाएगी और आप उसे ध्यान, पूजा या जाप के लिए उपयोग कर सकेंगे। यहां ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आप अपने गुरु या ध्यान प्रकार के विशेषज्ञ की सलाह और गाइडेंस का आदान-प्रदान करें जिससे आपको आपकी प्राण प्रतिष्ठित जाप माला की सही प्रक्रिया का पता चल सके।
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

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