ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 02 दिसम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 02 दिसम्बर 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 *दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । *मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
*मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352_

☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – मंगलवार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 03:57 PM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अश्विनी 08:51 PM तक उपरांत भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है। इसके अतिरिक्त, इस नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार हैं, जो देवताओं के चिकित्सक माने जाते हैं।
⚜️ योग – वरीयान योग 09:08 PM तक, उसके बाद परिघ योग
प्रथम करण : बालव – 03:57 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 02:14 ए एम, दिसम्बर 03 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:35:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:07:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:09 ए एम से 06:03 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:36 ए एम से 06:57 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:50 ए एम से 12:31 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:55 पी एम से 02:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:21 पी एम से 05:48 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:45 पी एम
💧 अमृत काल : 02:23 पी एम से 03:49 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:44 पी एम से 12:38 ए एम, दिसम्बर 03
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:57 ए एम से 08:51 पी एम
🌊 अमृत सिद्धि योग : 06:57 ए एम से 08:51 पी एम
❄️ रवि योग : 08:51 पी एम से 01:22 ए एम, दिसम्बर 03
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ भोम प्रदोष/ दानद्वादशी (उड़ीसा)/ श्रीमद्भगवद्गीता गीता जयन्ती/ शिक्षाशास्त्री गुरुदास बनर्जी पुण्य तिथि, राजनीतिक सर नारायण गणेश चंदावरकर जन्म दिवस, अंतरराष्ट्रीय दास प्रथा उन्‍मूलन दिवस, अंतर्राष्ट्रीय कम्प्यूटर साक्षरता दिवस, अभिनेत्री प्रिति गंगोली स्मृति दिवस, निर्वाचन आयोग ओम प्रकाश रावत जन्म दिवस, राजधानी दिल्ली स्थापना दिवस, अंतर्राष्ट्रीय दासता उन्मूलन दिवस, स्वतंत्रता सेनानी लाल बहादुर शास्त्री की जयन्ती, साहित्यकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल जन्म दिवस, जनसेवक बाबा राघवदास जयन्ती, राष्ट्रीय विशेष शिक्षा दिवस, राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है। 🗼 *_Vastu tips* 🗽
आपको गलती से भी कभी नुकीली चीजें गिफ्ट के रूप में नहीं देनी चाहिए। कैंची, चाकू या कोई भी धारदार वस्तु अगर आप किसी को गिफ्ट के रूप में देते हैं तो वास्तु के अनुसार इससे आपके रिश्ते पर बुरा असर पड़ सकता है। इन चीजों को गिफ्ट में देने से रिश्ते टूटने की आशंका भी बहुत अधिक होती है।
*पर्स न दें गिफ्ट आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार पर्स या बटुआ आपको कभी किसी को गिफ्ट नहीं करना चाहिए। पर्स को गिफ्ट में देने से रिश्ता तो खराब होता है साथ ही आपकी आर्थिकर स्थिति पर भी बुरा असर पड़ सकता है। *घड़ी न दें गिफ्ट कई लोग घड़ियां गिफ्ट में देते हैं लेकिन वास्तु के अनुसार घड़ी को गिफ्ट करना अच्छा नहीं माना जाता। घड़ी को गिफ्ट करने से आपके और जिसे आपने घड़ी गिफ्ट की है उसके जीवन में नकारात्मकता पैदा हो सकती है। इसलिए गिफ्ट में घड़ी देने से आपको बचना चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सभी लोग पाद जरूर छोड़ते हैं चाहें वो स्त्री हो या पुरुष। पाद छोड़ना हमारे सेहत के लिए भी जरूरी है इससे हमारे शरीर से कुछ अनावश्यक गैस बाहर निकल जाती है। इसलिए शरीर से पाद का बाहर निकलना भी बहुत ही जरूरी है। आज हम आपको पाद छोड़ने के बारे में कुछ ऐसे तथ्य के बारे में बताएंगे जिसके बारे में जानकर आप भी काफी चौंक जाएंगे। तो आइये जानते हैं आचार्य श्री गोपी से।
*एक आम मनुष्य दिन में 14 बार और पूरी जिंदगी में लगभग 4,02,000 बार पादता है। *फलियां खाने के बाद इंसान की पाद मारने की क्षमता तीन गुना बढ़ जाती है।
*आपको सुनकर काफी हैरानी होगी कि अंतरिक्ष मे लोग पाद नही सकते क्योंकि वहाँ पेट में द्रव्य से गैस को अलग करने के लिए गुरूत्वाकर्षण बल नही होता है। *चिंपैंजी एक ऐसा जानवर है जिसके पाद की आवाज सबसे तेज होती है और इसी कारण से फारेस्ट ऑफिसर इसे जंगल मे आसानी से ढूंढ लेते हैं।
*आपको जानकर ये काफी हैरानी होगी कि इंसान के मौत के 3 घण्टे बाद भी उसे पाद आ सकता है। *ये थे कुछ 5 ऐसी बातें जो वाकई में काफी हैरान करने वाली है।
🥝 आरोग्य संजीवनी 🍈
मधुमेह के लक्षण को कम करे चिलगोजा चिलगोजा खाने से मधुमेह बीमारी के कारण शरीर को होने वाला नुकसान काफी हद तक कम हो जाता है। चिलगोजा रक्त संचार को सही करता है और शरीर को मजबूत बनाता है। मधुमेह बीमारी के बाद भी शरीर में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आने देता है।चिलगोजा के फायदे मधुमेह रोगियों के लिए रामबाण है।
त्वचा के लिए चिलगोजा के फायदे
*त्वचा के लिए चिलगोजा के फायदे अनेक हैं क्योंकि चिलगोजा में मौजूद विटमिन-C त्वचा को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाता है और चेहरे पर निखार लाता है। इसमें एंटी एजिंग का गुण होता है जिससे चेहरे पर कसाव आता है और हम ज्यादा दिन तक जवान दिखते है। चिलगोजा में एंटीऑक्सीडेंट होता है जिससे त्वचा को नुकसान होने का डर कम हो जाता है। *आँखों के लिए चिलगोजा के फायदे*
*आँखों के लिए चिलगोजा के फायदे अनेक हैं क्योंकि चिलगोजा का सेवन हमारी आँखों के हित के लिए बहुत लाभकारी होता है। चिलगोजा खाने से रात में सही से न दिखाई देने वाली बीमारी कम होने लगती है। हमारी आँखो की एक बीमारी जिसमे हम रंगो को सही तरीके से नहीं पहचान पाते है उसमे यह मदद करता है। और आँखों की रोशनी को बढ़ाता है। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ नाडी दोष क्या है?
शादी करने वाले जोड़े के लिए, उनकी कुंडली या जन्म कुंडली में नाडियाँ अलग-अलग होनी चाहिए। उनकी कुंडली में एक ही प्रकार की नाडियाँ होना नाड़ी दोष का कारण बनती हैं, जिससे दांपत्य जीवन में परेशानी आ सकती है।
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ज्योतिष विद्वान कुंडली मिलान के समय नाड़ी दोष बनने पर ऐसे लड़के तथा लड़की का विवाह करने से मना कर देते हैं। गुण मिलान की प्रक्रिया में आठ कूटों का मिलान किया जाता है जिसके कारण इसे अष्टकूट मिलान भी कहा जाता है। ये अष्ट कूट हैं, वर्ण, वश्य, तारा, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी। इस लेख में हम नाड़ी के बारे में विस्तार से जान रहे हैं।
*हमारे ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार नाड़ी तीन प्रकार की होती हैं। ये हैं- आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी, अन्त्य नाड़ी। नाड़ी तीन प्रकार की होती है, आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी तथा अन्त्य नाड़ी। प्रत्येक व्यक्ति की जन्म कुंडली में चन्द्रमा की किसी नक्षत्र विशेष में उपस्थिति से उस व्यक्ति की नाड़ी का पता चलता है। नक्षत्र संख्या में कुल 27 होते हैं तथा इनमें से किन्हीं 9 विशेष नक्षत्रों में चन्द्रमा के स्थित होने से कुंडली धारक की कोई एक नाड़ी होती है। तीन नाड़ियों में आने वाले नक्षत्र इस तरह हैं। *ज्येष्ठा, मूल, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, शतभिषा, पूर्वा भाद्र और अश्विनी नक्षत्रों की गणना आदि या आद्य नाड़ी में की जाती है।
*पुष्य, मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, भरणी, घनिष्ठा, पूर्वाषाठा, पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा भाद्र नक्षत्रों की गणना मध्य नाड़ी में की जाती है। *स्वाति, विशाखा, कृतिका, रोहणी, अश्लेषा, मघा, उत्तराषाढ़ा, श्रावण और रेवती नक्षत्रों की गणना अन्त्य नाड़ी में की जाती है।
*ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब वर और कन्या दोनों के नक्षत्र एक नाड़ी में हों तब यह दोष लगता है। सभी दोषों में नाड़ी दोष को सबसे अशुभ माना जाता है क्योंकि इस दोष के लगने से सर्वाधिक गुणांक यानी 8 अंक की हानि होती है। इस दोष के लगने पर शादी की बात आगे बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जाती है। *आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार यदि वर-कन्या दोनों की नाड़ी आदि हो तो उनका विवाह होने पर वैवाहिक संबंध अधिक दिनों तक कायम नहीं रहता अर्थात उनमें अलगाव हो जाता है। अगर कुण्डली मिलने पर कन्या और वर दोनों की कुंडली में मध्य नाड़ी होने पर शादी की जाती है तो दोनों की मृत्यु हो सकती है, इसी क्रम में अगर वर वधू दोनों की कुंडली में अन्त्य नाड़ी होने पर विवाह करने से दोनों का जीवन दु:खमय होता है। इन स्थितियों से बचने के लिए ही तीनों समान नाड़ियों में विवाह की आज्ञा नहीं दी जाती है।
*महर्षि वशिष्ठ के अनुसार नाड़ी दोष होने पर यदि वर-कन्या के नक्षत्रों में नजदीक होने पर विवाह के एक वर्ष के भीतर कन्या की मृत्यु हो सकती है अथवा तीन वर्षों के अन्दर पति की मृत्यु होने से विधवा होने की संभावना रहती है। आयुर्वेद के अन्तर्गत आदि, मध्य और अन्त्य नाड़ियों को वात, पित्त एवं कफ की संज्ञा दी गई है। नाड़ी मानव के शारीरिक स्वस्थ्य को भी प्रभावित करती है। मान्यता है कि इस दोष के होने पर उनकी संतान मानसिक रूप से अविकसित एवं शारीरिक रूप से अस्वस्थ होते हैं। *यदि वर-वधू का जन्म नक्षत्र एक ही हो परंतु दोनों के चरण पृथक हों तो नाड़ी दोष नहीं लगता है।
*यदि वर-वधू की एक ही राशि हो तथा जन्म नक्षत्र भिन्ना हों तो नाड़ी दोष से व्यक्ति मुक्त माना जाता है। *वर-वधू का जन्म नक्षत्र एक हो परंतु राशियां भिन्ना-भिन्ना हों तो नाड़ी दोष नहीं लगता है।
*नाड़ी दोष का उपचार* *पीयूष धारा के अनुसार स्वर्ण दान, गऊ दान, वस्त्र दान, अन्नादान, स्वर्ण की सर्पाकृति बनाकर प्राण-प्रतिष्ठा तथा महामृत्युञ्जय जप करवाने से नाड़ी दोष शान्त हो जाता है।
*महत्वपूर्ण है नाड़ी मिलान*
आप सभी ज्योतिषाचार्य यह भली भांति जानते हैं की कुंडली मिलान के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की प्रक्रिया में बनने वाले दोषों में से नाड़ी दोष को सबसे अधिक अशुभ दोष माना जाता है तथा अनेक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली मिलान में नाड़ी दोष के बनने से बहुत निर्धनता होना, संतान न होना तथा वर अथवा वधू दोनों में से एक अथवा दोनों की मृत्यु हो जाना जैसी भारी मुसीबतें भी आ सकतीं है।
*गुण मिलान करते समय यदि वर और वधू की नाड़ी अलग-अलग हो तो उन्हें नाड़ी मिलान के 8 में से 8 अंक प्राप्त होते हैं, जैसे कि वर की आदि नाड़ी तथा वधू की नाड़ी मध्य अथवा अंत। किन्तु यदि वर और वधू की नाड़ी एक ही हो तो उन्हें नाड़ी मिलान के 8 में से 0 अंक प्राप्त होते हैं तथा इसे नाड़ी दोष का नाम दिया जाता है। नाड़ी दोष की प्रचलित धारणा के अनुसार वर-वधू दोनों की नाड़ी आदि होने की स्थिति में तलाक या अलगाव की प्रबल संभावना बनती है तथा वर-वधू दोनों की नाड़ी मध्य या अंत होने से वर-वधू में से किसी एक या दोनों की मृत्यु की प्रबल संभावना बनती है। नाड़ी दोष को निम्नलिखित स्थितियों में निरस्त माना जाता है *यदि वर-वधू दोनों का जन्म एक ही नक्षत्र के अलग-अलग चरणों में हुआ हो तो वर-वधू की नाड़ी एक होने के पश्चात भी नाड़ी दोष नहीं बनता।
*यदि वर-वधू दोनों की जन्म राशि एक ही हो किन्तु नक्षत्र अलग-अलग हों तो वर-वधू की नाड़ी एक होने के पश्चात भी नाड़ी दोष नहीं बनता। *यदि वर-वधू दोनों का जन्म नक्षत्र एक ही हो किन्तु जन्म राशियां अलग-अलग हों तो वर-वधू की नाड़ी एक होने के पश्चात भी नाड़ी दोष नहीं बनता।
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⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।।

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