
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 17 फरवरी 2026
17 फरवरी 2026 दिन मंगलवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष कि अमावस्या तिथि है। आज भौभवासरिय अमावस्या हैं एवं आज स्नान-दान एवं श्राद्ध आदि की अमावस्या हैं। आज मंगलवार को भौमवती अमावस्या हैं। इसके विषय में लिखा है :- अमायाञ्च यदावारो भवेद् भूमि सुतस्यवै। गंगायाम् यदि लभ्यते कोटि सूर्यग्रहै समा। पापवारान्विते दर्शे दुर्भिक्षं च प्रजा भयम् । अर्थात पापवार (मंगलवार) की अमावस्या के वजह से दुर्भिक्ष एवं प्रजा में भय का योग बनता है। यदि गंगा स्नान किया जाए तो भय से मुक्ति संभव होता है। आप सभी स्नातनियों को “भौमवती अमावस्या एवं द्वापर युग दिवस” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 *दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । *मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
*मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352_
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – फाल्गुन मास
🌚 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – मंगलवार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 05:30 PM तक उपरांत प्रतिपदा
🖍️ तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र धनिष्ठा 09:16 PM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं। जिसके देवता अष्ट वसु (प्रकाश के देवता) हैं। वहीं राशि स्वामी शनि है।
⚜️ योग – परिघ योग 12:28 AM तक, उसके बाद शिव योग
⚡ प्रथम करण : नाग 05:31 PM तक
✨ द्वितीय करण : किस्तुघन 05:18 AM तक, बाद बव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:40:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:52:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 5 बजकर 35 मिनट से 6 बजकर 25 मिनट तक रहेगा।
🏙️ प्रातः सन्ध्या- 29:41 शाम को 06:58 बजे तक
🌟 अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 37 मिनट से 01 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।
✡️ विजय मुहूर्त 14:28 मिनट से 15:13 बजे तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 18:10 बजे से 18:36 बजें तक
🎆 सायाह्न सन्ध्या 18:13 से 19:29
💧 अमृत काल : सुबह 10:39 से 12:17 दोपहर तक
🗣️ निशिता मुहूर्त : शाम 24:09 मिनट से शाम 25:00 तक
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – सूर्य ग्रहण वलयाकार/ दर्श अमावस्या/ अन्वाधान/ फाल्गुन अमावस्या/ द्वापर युग दिवस/ पञ्चक/ आडल योग/ देवपितृकार्य अमावस्या/ शिव खप्पर पूजा, मन्वादि, पंचक प्रारम्भ दिन 9-06 से, राष्ट्रीय यादृच्छिक दयालुता दिवस, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर पुण्य तिथि, भारतीय क्रांतिकारी वासुदेव बलवंत फड़के स्मृति दिवस, भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी रानी गाइदिनल्यू स्मृति दिवस, राष्ट्रीय पत्ता गोभी दिवस, अमर शहीद वीर बुधु भगत जयन्ती, गुजरात के भूतपूर्व मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल स्मृति दिवस, तेलंगाना के प्रथम मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव जन्म दिवस, जानेमाने भारतीय फ़िल्म निर्देशक रवि टंडन जन्म दिवस, बांग्ला भाषा के प्रसिद्ध कवि जीवनानन्द दास जन्म दिवस, प्रसिद्ध क्रांतिकारी तथा ‘लरका विद्रोह’ के आरम्भकर्ता बुधु भगत जयन्ती, उत्पादकता सप्ताह ✍🏼 *तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
ज्योतिष में सोमवार का दिन चंद्र ग्रह और मोती के लिए सबसे शुभ माना गया है। पहनने से पहले रत्न की शुद्धि जरूर करें। इसके लिए.. गंगाजल, दूध, शहद का इस्तेमाल किया जाता है। मोती को थोड़ा समय इन तरल पदार्थों में रखकर शुद्ध माना जाता है। इसके बाद इसे पूजा-अर्चना के साथ धारण करना चाहिए।
*किस धातु में पहनें मोती को चांदी में जड़वाना सबसे शुभ माना गया है। चांदी स्वयं मानसिक शांति को बढ़ाती है और चंद्र ग्रह की ऊर्जा को सक्रिय करती है। इसलिए चांदी में जड़ा मोती पहनने से इसका असर अधिक तेजी से दिखाई देता है। *मोती किस राशि और उंगली में पहनना चाहिए*
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार कर्क, मीन, वृश्चिक, मेष राशि के जातक मोती को कनिष्ठिका (छोटी उंगली) में पहनना शुभ माना गया है। अगर कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो या बार-बार तनाव और गुस्सा की समस्या हो तो यह रत्न और भी ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है। हर रत्न की ऊर्जा बहुत शक्तिशाली होती है। इसलिए इसे धारण करने से पहले अपनी कुंडली जरूर दिखानी चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
*जहां घोड़े पी रहे हैं वहीं पिएं क्योंकि वे कभी भी दूषित पानी नहीं पीएंगे।
*अपना बिस्तर वहीं लगाएं जहां बिल्ली सोती है, उसे शांति पसंद है। *जिस भी फल को कीड़ा ने छुआ है लेकिन उसमें घुसा नहीं है, वह हमेशा पके फल की तलाश में रहता है।
*और जहाँ छछूँदर खोदे, वहाँ अपना पेड़ लगाओ, क्योंकि वह उपजाऊ भूमि है। *अपना घर बनाओ जहाँ साँप अपने आप को गर्म करने के लिए बैठता है, क्योंकि वह स्थिर भूमि है जो गिरती नहीं है।
*उस जगह पर पानी को खोजने के लिए खुदाई करें जहां पक्षी गर्मी से छिपते हैं। पक्षी जहां भी खड़े होते हैं, पानी छिप जाता है। *और सो जाओ और एक ही समय में पक्षियों के साथ जागो – यही सफलता की खोज है।
🍷 *आरोग्य संजीवनी* 🥃
*ताम्बे का पानी – प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें । *किडनी – भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
*गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है । *अस्थमा , मधुमेह , कैंसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।
*परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं । *पथरी – अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है ।
RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है ।
*सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें । *पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
महाभारत में एक प्रसंग आता है जब राजा धृतराष्ट्र महात्मा विदुर से मनुष्य की आयु कम होने का कारण पूछते हैं। तब विदुर मनुष्य की आयु कम करने वाले 6 दोषों के बारे में धृतराष्ट्र को बताते हैं। महाभारत के अनुसार यमराज ने ही श्राप के कारण मनुष्य बनकर विदुर के रूप में जन्म लिया था। महात्मा विदुर ने धृतराष्ट्र को मनुष्यों की उम्र कम होने को जो 6 दोष बताए थे, वह इस प्रकार हैं।
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धृतराष्ट्र महात्मा विदुर से पूछते हैं:-👉 जब सभी वेदों में पुरुष को 100 वर्ष की आयु वाला बताया गया है, तो वह किस कारण से अपनी पूर्ण आयु नहीं जी पाता।🙄❓
*विदुर जी कहते हैं:-👉 अत्यंत अभिमान, अधिक बोलना, त्याग का अभाव, क्रोध, स्वार्थ, मित्रद्रोह- ये 6 तीखी तलवारें मनुष्य की आयु को कम करती हैं। ये ही मनुष्यों का वध करती हैं।
*अभिमान यानी घमंड ऊंचे पद वाले, अपनी प्रशंसा सुनने वाले, स्वयं को बलवान समझने वाले तथा स्वयं को बुद्धिमान, त्यागी, महात्मा मानने वाले लोग अभिमान का शिकार हो जाते हैं। जिस व्यक्ति में यह दोष आ जाता है वह दूसरे लोगों को अपने से निचले स्तर का मानने लगता है और अवसर आने पर उनका अपमान करने से भी नहीं चूकता। घमंड करने वाले के कई शत्रु भी हो जाते हैं। अंत में घमंड ही उस व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है।
*अधिक बोलने वाला जो व्यक्ति अधिक बोलता है तथा व्यर्थ की बातें करता है, वह सत्य का पूरी तरह से पालन नहीं करता और ऐसी बातें भी कर बैठता है, जिनका परिणाम बुरा होता है। ऐसा व्यक्ति बुद्धिमानों को प्रिय नहीं होता तथा दूसरों पर उसकी बातों का प्रभाव भी नहीं पड़ सकता। इसलिए अधिक शब्दों का प्रयोग न करके वाणी को संयमित रखना चाहिए, क्योंकि असंयमित वाणी से भी आयु कम होती है।
*मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु क्रोध है। क्रोधी होने पर मनुष्य उस समय किए गए अपने कर्मों के परिणाम को भूल जाता है, जिससे उसका पतन होता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार शरीर अंत से पूर्व जिसने क्रोध को पूरी तरह से जीत लिया, वह मनुष्य इस लोक में योगी और सुखी है। क्रोध को नरक का द्वार भी कहा गया है, जिसका अर्थ है क्रोधी मनुष्य को नरक में जाने के लिए अन्य मार्ग की आवश्यकता ही नहीं पड़ती, क्रोध अकेला ही उसे नरक में ले जाता है। क्रोध के दुष्परिणामों से भी आयु कम होती है।
*त्याग का अभाव होने के कारण ही रावण, दुर्योधन और कंस आदि का पतन हुआ। सांसारिक सुख मनुष्य की आयु को काटते हैं और उनका त्याग आयु में वृद्धि करता है। मनुष्य को इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए कि हम इस संसार से कुछ लेने नहीं बल्कि दूसरों को सुख देने के लिए आए हैं। जिन लोगों के मन में त्याग की भावना नहीं होती, उनकी मृत्यु शीघ्र ही हो जाती है।
*स्वार्थ यानी लालच ही अधर्म का मूल कारण है। दुनिया में होने वाले अनेक युद्धों का कारण स्वार्थ (भूमि, धन या स्त्री) ही है। स्वार्थी मनुष्य अपना काम साधने के लिए बड़े से बड़ा पाप करने में भी शर्म का अनुभव नहीं करते। वर्तमान परिदृश्य में देखा जाए तो स्वार्थ के कारण ही आज पूरी दुनिया में पाप कर्म बढ़ रहे हैं और चारो ओर अशांति छाई हुई है। जिसके मन में स्वार्थ होता है, उसकी आयु कम हो जाती है
*मित्रद्रोही यानी अपने मित्र को धोखा देने वाले पुरुष को शास्त्रों में अधम कहा गया है। मनुष्य जीवन में मित्रों का बहुत महत्व है। मित्रता से एक नई शक्ति का निर्माण होता है, जिससे शत्रुओं को भी भय होता है। पतन की ओर जाते हुए कई पुरुषों का उत्थान मित्रों ने किया है। मित्रद्रोही मनुष्य का जीवन नरक के समान होता है। मित्रद्रोही नामक दोष से बचने के लिए त्याग और दूसरों का हित करना परम आवश्यक है
*महात्मा विदुरजी ने आयु को काटने वाले जो 6 दोष बतलाए हैं, वे सभी प्राय: एक-दूसरे पर ही निर्भर है। इसलिए इन दोषों से बचना चाहिए।
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⚜️ *अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है। *ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।।



