
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 17 दिसम्बर 2025
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ *दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
*बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है। *बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल*
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – बुधवार पौष माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 02:32 AM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र विशाखा 05:11 PM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी – विशाखा नक्षत्र के स्वामी ग्रह बृहस्पति (गुरु) हैं, जो ज्ञान, धर्म और शुभता के प्रतीक हैं; वहीं इसके अधिपति देवता इंद्र और अग्नि हैं।
⚜️ योग – सुकर्मा योग 02:16 PM तक, उसके बाद धृति योग
⚡ प्रथम करण : गर – 01:15 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 02:32 ए एम, दिसम्बर 18 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:43:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:09:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:18 ए एम से 06:13 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:45 ए एम से 07:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:01 पी एम से 02:42 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:24 पी एम से 05:52 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:27 पी एम से 06:49 पी एम
💧 अमृत काल : 07:17 ए एम से 09:05 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:50 पी एम से 12:45 ए एम, दिसम्बर 18
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:11 पी एम से 07:08 ए एम, दिसम्बर 18
🌊 अमृत सिद्धि योग : 05:11 पी एम से 07:08 ए एम, दिसम्बर 18
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकले।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ राइट ब्रदर्स दिवस, भारतीय पेंशनरभोगी दिवस, कार्यक्रम राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी बलिदान दिवस, प्रसिद्ध नाटककार लक्ष्मी नारायण मिश्र जन्म दिवस, कर्नाटक के भूतपूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार जन्म दिवस, राजस्थान के भूतपूर्व मुख्यमंत्री हरी देव जोशी जन्म दिवस, भारतीय क्रांतिकारी सखाराम गणेश देउसकर जयन्ती, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी भोगराजू पट्टाभि सीतारामैया स्मृति दिवस, अमर शहीद क्रांतिकारी राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी स्मृति दिवस,भारत-पाक युद्ध समाप्त दिवस, राष्ट्रीय सेवानिवृत्ति दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
*बांस का पौधा सामान्य रूप से शांति और विकास का प्रतीक माना जाता है, लेकिन आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार नुकीले किनारों वाले बांस के प्लांट को ऑफिस डेस्क पर रखना अशुभ माना गया है। इससे सफलता रुक सकती है, निर्णय क्षमता कमजोर होती है और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। *ऑफिस डेस्क पर बिल्कुल न रखें कैक्टस कैक्टस के नुकीले कांटे नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। ऑफिस डेस्क पर इसे रखने से तनाव, गुस्सा और बाधाएं बढ़ सकती हैं। माना जाता है कि कैक्टस खराब किस्मत और अवरोध पैदा करता है, इसलिए इसे कार्यस्थल से दूर रखना बेहतर है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
*कान के मैल को साफ करने के लिए मैं जिस घरेलू उपाय को बताने जा रही हूं वह बहुत ही आसान और कम समय वाला है। *कान के मैल को साफ करने के लिए आप रात में सोने से पहले ड्रॉपर की मदद से एक या दो बूंद तेल वाली चक्की से खरीदा हुआ शुद्ध सरसों का तेल कान में डाल दें।
*ऐसा करने पर कान की मैल सुबह तक बिल्कुल मुलायम होकर अपने आप कान के छोर पर आ जाएगी। फिर आप उसे किसी कपड़े की मदद से बाहर निकाल लें। *कान की मैल निकालने के लिए सरसों तेल का इस्तेमाल काफी पुराने समय से किया जा रहा है और इसके कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं है इसलिए एक बार इसका इस्तेमाल जरूर करें।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
शुगर या मधुमेह क्यों होता है ?
*टाइप 1 :– यह मुख्य रूप से 14 से 25 वर्ष के उम्र के युवाओं में होता है।यह पैंक्रियाज के बीटा में इंफेक्शन के कारण होती है।जिससे इंसुलिन का उत्पादन रुक जाता है।ऐसे रोगियों को इंसुलिन बाह्य स्रोत से शरीर मे लेना पड़ता है। *टाइप 2 मधुमेह (type 2 डायबिटीज) :- इसका प्रमुख कारण शरीर का वजन अधिक होने के साथ व्यायाम नही करना हैं। इसे व्यस्क शुरुआत मधुमेह के नाम से भी जाना जाता है।
*गर्भावस्था मधुमेह :– यदि किसी गर्भवती महिला को शुगर है तो उसे प्रसव पूर्व बहुत सारी बीमारियों और तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है।गर्भावस्था में रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाने के कारण मधुमेह की बीमारी के लक्षण दिखने लगे जाते है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ग्लूकोस के अणुओं को कोशिकाओं तक ले जाने में इंसुलिन वाहक का कार्य करते है,और ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाने से इंसुलिन की मात्रा अपेक्षाकृत कम हो जाती है। *शुगर के लक्षण:-मधुमेह या शुगर हमे किन्ही 2 कारणों से हो सकता है, यदि हमारे वंशज में किसी को शुगर है तभी हमें हो सकता है अथवा हमारे जीवन शैली की अनियमितता।यदि हमारे पूर्वज जैसे दादा,दादी,या नाना नानी में किसी को शुगर है तो आने वाली पीढ़ियों में किसी संतान को भी शुगर होने के संभावनाएं बन जाती है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
दो ग्रहों की युति
सूर्य और चंद्रमा :-जन्म काल में सूर्य और चन्द्रमा की युति (हो तो अर्थात ये दोनों ग्रह किसी एक भी भाव में बैठे हों! ऐसा जातक अभिमानी दुष्ट क्रियाओं को करने में चतुर, कपटी, विनय रहित, पराक्रमी, क्षुद्र हृदय वाला, कार्य करने में दक्ष, स्त्री के वश में रहने वाला, विषयासक्त तथा पत्थर की वस्तुओं का क्रय–विक्रय करने वाला होता है।
*सूर्य और मंगल:- जन्म काल में सूर्य और मंगल की युति हो तो जातक तेजस्वी, श्रेष्ठ कर्म–धर्म तथा धन से रहित, सदैव क्लेश करने वाला, क्रोधी, पापबुद्धि, मिथ्यावादी मूर्ख, बलवान, परन्तु अपने बन्धु–बान्धवों से प्रेम रखने वाला होता है।
*सूर्य और बुध:- जन्म काल में सूर्य और बुध की युति हो तो जातक श्रेष्ठ बुद्धिमान, विद्वान–यशस्वी, राज्य द्वारा सम्मान प्राप्त, स्थिर धन वाला, सेवा कर्म करने में पटु, प्रियवादी, मंत्री तथा राजा की सेवा द्वारा धन कमाने वाला है। वेदज्ञ गीति–वाद्य तथा काव्य आदि कलाओं में कुशल होता है। *सूर्य और गुरु :-जन्म काल में सूर्य और गुरु की युति हो तो जातक धर्मात्मा, धनवान, शास्त्रज्ञ, लोक में प्रसिद्ध, मित्रवान, राजमान्य, राजा का मंत्री, पुरोहित कर्म करने में कुशल, चतुर तथा परोपकारी होता है।
*सूर्य और शुक्र:- जन्म काल में सूर्य और शुक्र की युति हो तो जातक बुद्धिमान, मनुष्यों में श्रेष्ठ, बलवान, नाट्यकार, संगीत–वाद्य तथा शस्त्र विद्या में कुशल, स्त्रियों का प्रिय, मित्रवान, क्षीण दृष्टि वाला, कार्यक्षम तथा स्त्री द्वारा धन प्राप्त करने वाला होता है। *सूर्य और शनि :-जन्म काल में सूर्य और शनि की युति हो तो जातक विद्वान, कार्यकुशल, श्रेष्ठ बुद्धि वाला, गुणवान, धातु का काम करने में कुशल, धर्म में प्रीति रखने वाला तथा वृद्ध के समान आचरण करने वाला होता है।
*चन्द्रमा और मंगल :-जन्म काल में चंद्रमा और मंगल की युति हो तो जातक मिट्टी, चमड़ा अथवा धातुओं के शिल्प में कुशल (कारीगर) धनी, युद्ध कुशल, प्रतापी, आचारहीन, कलह प्रेमी, माता से शत्रुता रखने वाला, व्यवसाय द्वारा जीविकोपार्जन करने वाला, रक्त विकार आदि रोगों से ग्रस्त रहता है। *चंद्रमा और बुध:- जन्म काल में चन्द्रमा और बुध की युति हो तो जातक धनी, गुणी, कवि, सुन्दर, हंसमुख, कुल धर्म का पालन करने वाला, स्त्री में आसक्त, बहुत बोलने वाला, प्रियवादी, दयालु हृदय परन्तु दुर्बल शरीर वाला होता है।
*चन्द्रमा और गुरु:- यदि जन्म काल में चन्द्रमा और गुरु की युति हो तो जातक देवता एवं ब्राह्मणों का भक्त, भाई–बहनों से स्नेह रखने वाला, दृढ़ मैत्री का निर्वाह करने वाला, सुशील, धनी, विनम्र, परोपकारी, धर्मात्मा तथा गुप्त–मन्त्र वाला होता है। *चन्द्रमा और शुक्र:- यदि जन्म काल में चन्द्रमा और शुक्र की युति हो तो जातक किसी वस्तु की बिक्री करने के कार्य में कुशल, शूद्रों के समान आचरण करने वाला, झगड़ालू, अल्प वस्त्राभूषणों वाला, अनेक प्रकार के व्यसनों में लिप्त, अनेक प्रकार की कार्यविधियों का जानकार तथा सुगंधित वस्तुओं में रुचि रखने वाला होता है।
*चन्द्रमा और शनि :-जन्म काल में चन्द्रमा और शनि की युति हो तो जातक व्यवसाय द्वारा आजीविका का उपार्जन करने वाला, पर स्त्रियों से प्रेम करने वाला, आचारहीन, पुरुषार्थहीन, हाथी घोड़ों को पालने वाला, वृद्धा स्त्री में आसक्त, अल्प सन्ततिवान तथा वेश्या द्वारा धन प्राप्त करने वाला होता है। *मंगल और बुध :-जन्म काल में मंगल–बुध की युति हो तो जातक धनहीन, कुरूप, कृपण, सोने अथवा लोहे का व्यवसाय करने वाला, विधवा स्त्री से विवाह करने वाला, मल्लयुद्ध में कुशल, अनेक स्त्रियों से प्रेम करने वाला तथा अनेक प्रकार की औषधियों का सेवन करने वाला होता है।
*मंगल और गुरु:- जन्म काल में मंगल और गुरु की युति हो तो जातक शिल्प–शास्त्रज्ञ, घोड़ों से प्रीति रखने वाला, बोलने में चतुर मेधावी, मनुष्य समाज में प्रधान पद पाने वाला, मंत्रज्ञ, शास्त्रज्ञ, शस्त्रज्ञ, अर्थ–साधन करने में निपुण, चतुर, शीलवान्, सेना का अधिकारी अथवा कोई अन्य उच्च पद प्राप्त करने वाला होता है। *मंगल और शुक्र:- जन्म काल में मंगल और शुक्र की युति हो तो जातक गणितज्ञ, गुणी, मिथ्यावादी, जुआरी, शठ पर स्त्रीगामी, प्रपंची, पापी, अभिमानी, सबसे शत्रुता रखने वाला, भोगी परन्तु जन समाज में सम्मान प्राप्त करने वाला होता है।
*मंगल और शनि :-जन्म काल में मंगल और शनि की युति हो तो जातक उचित बोलने वाला, अपने धर्म को छोड़कर पराये धर्म को अपनाने वाला, जादू एवं इन्द्रजाल आदि विद्याओं का ज्ञाता, कलह प्रिय, विष तथा मदिरा बनाने एवं बेचने में तत्पर, चोर, मिथ्यावादी, अल्प धन वाला, झगड़ालू, शस्त्र और शास्त्र का ज्ञाता, मित्रों से रहित, सुख से रहित तथा अपयश प्राप्त करने वाला होता है। *बुध और गुरु:- जन्म काल में बुध और गुरु की युति हो तो जातक नृत्य वाद्य में कुशल, धैर्यवान, सुखी, पण्डित, नीतिज्ञ, विनयी, धैर्यवान, उदार, श्रेष्ठ, गुणों से युक्त तथा सुगन्धित वस्तुओं से प्रेम रखने वाला होता है।
*बुध और शुक्र :-जन्म काल में बुध–शुक्र की युति हो तो जातक शिल्प कला में कुशल, वेदज्ञ, संगीतज्ञ, नीतिज्ञ, धनी, प्रियवादी, हास्य प्रिय, सुखी, प्रतापी, चतुर, सदैव आनन्दित रहने वाला, श्रेष्ठ स्वरूप वाला तथा अनेक मनुष्यों का स्वामी होता है। *बुध और शनि :-जन्म काल में बुध और शनि की युति हो तो जातक कलह प्रिय, चंचल चित्तवृत्ति वाला, संगीत, काव्य आदि में कुशल, भ्रमणशील, उद्योगहीन, उचित बात बोलने वाला तथा दुर्बल शरीर वाला होता है।
*गुरु और शुक्र :-जन्म काल में गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक धन, मित्र, पुत्र, स्त्री आदि के सुख से युक्त, विद्वान, बुद्धिमान, गुणवान, धर्मात्मा, विद्या द्वारा जीविकोपार्जन करने वाला, सुन्दरी स्त्री का पति, शास्त्र तथा पंडित जनों से शास्त्रार्थ करने वाला, बड़ा सुखी और यशस्वी होता है। *गुरु और शनि :-जन्म काल में गुरु और शनि की युति हो तो जातक शूरवीर, यशस्वी, जन्म समूह का प्रधान, सेनापति, धनवान, सम्पूर्ण कलाओं में कुशल तथा स्त्री द्वारा मनोवांछित फल को प्राप्त करने वाला होता है।
*शुक्र और शनि:- जन्म काल में शुक्र और शनि की युति हो तो जातक शिल्प लेख, (मकान आदि पर चित्रकारी करने या पत्थर आदि की वस्तुएं बनाने में कुशल) चंचल बुद्धि वाला, दारुण संग्राम करने वाला, आनन्द से युक्त, पशुओं को पालने वाला लकड़ी चीरने में कुशल, लवण तथा अम्ल रस का प्रेमी तथा उन्मत्त प्रकृति का होता हैं। •••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤••• ⚜️ *त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
*_आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।



