धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 17 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 17 अप्रैल 2025
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 03:23 PM तक उपरांत पंचमी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – अनुराधा नक्षत्र – 05:55 ए एम तक ज्येष्ठा नक्षत्र।
🪐 नक्षत्र स्वामी – ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है और देवता इंद्र हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र को गंड मूल नक्षत्र भी कहा जाता है।
⚜️ योग – वरीयान योग 12:50 AM तक, उसके बाद परिघ योग
प्रथम करण : बालव – 03:23 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 04:18 ए एम, अप्रैल 18 तक तैतिल
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:41:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:19:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:25 ए एम से 05:09 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:47 ए एम से 05:54 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:47 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:22 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:47 पी एम से 07:09 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:48 पी एम से 07:55 पी एम
💧 अमृत काल : 10:39 पी एम से 12:25 ए एम, अप्रैल 18
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:58 पी एम से 12:42 ए एम, अप्रैल 18
सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:54 ए एम से 05:55 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को केसर भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ देवदर्शन/ भारत के प्रधान मंत्री चंद्रशेखर जयन्ती, राष्ट्रीय चीज़बॉल दिवस, राष्ट्रीय हाई फाइव दिवस , मालबेक दिवस, विश्व हीमोफीलिया दिवस, राष्ट्रीय किकबॉल दिवस, अंतर्राष्ट्रीय हाइकू कविता दिवस, निसारगदत्त महाराज जयन्ती, बिनोदानंद झा जन्म दिवस, थकाजी शिवशंकर पिल्लाई जन्म दिवस, बेनो जेफिन जयंती, महानतम खिलाड़ी मुथैया मुरलीधरन जन्म दिवस, विश्व हीमोफ़िलिया दिवस, फ़ायर सर्विस सप्ताह
✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु के अनुसार, रोजाना इस्तेमाल होने वाली दवाइयों को सिरहाने रखने से व्यक्ति पर बीमारी का प्रभाव बना रहता है साथ ही इससे मानसिक तनाव और चिंता बढ़ती है और यह स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है और वास्तु दोष को भी उत्पन्न कर सकता है।
जूते-चप्पल सिरहाने न रखें शास्त्रों के अनुसार, कभी भी जूते-चप्पल बिस्तर के पास नहीं रखने चाहिए। इन्हें सिरहाने रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलती है, शांति भंग होती है और सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इसके साथ ही जीवन में परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
⚖️ हार्मोन असंतुलन खासतौर पर महिलाओं में मोटापा पीरियड्स से जुड़ी गड़बड़ियों और प्रजनन क्षमता (Fertility) को प्रभावित करता है।
🧠 2. मानसिक और भावनात्मक समस्याएं आत्मग्लानि और हीनभावना बहुत से मोटे लोग अपने शरीर को लेकर शर्मिंदगी महसूस करते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास गिर जाता है।
🧍‍♀️ सामाजिक अलगाव लोग ताने मारते हैं, चिढ़ाते हैं, या मज़ाक उड़ाते हैं, जिससे मोटे व्यक्ति खुद को लोगों से अलग करने लगते हैं।
😔 डिप्रेशन और चिंता लगातार मज़ाक, असफल डाइटिंग और अकेलापन मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
🚫 3. रोजमर्रा की जीवनशैली में आने वाली परेशानियां🚶‍♂️ चलने-फिरने में दिक्कत सीढ़ियाँ चढ़ना, लंबा चलना या झुकना – इन सभी साधारण क्रियाओं में मोटे व्यक्ति को तकलीफ होती है।
✈️ यात्रा में दिक्कत बस, ट्रेन या हवाई जहाज की सीटें उनके लिए असुविधाजनक हो जाती हैं। कई बार उन्हें दूसरों के सामने शर्मिंदा भी होना पड़ता है।
🧥 कपड़े और फैशन बाजार में मनचाहे फैशन या डिजाइन में बड़े साइज के कपड़े आसानी से नहीं मिलते।
🍁 आरोग्य संजीवनी ☘️
घी और शहद: घी और शहद का मिश्रण बवासीर के इलाज में मदद कर सकता है। यह आंतों को बेहतर काम करने में मदद करता है और सूजन को कम करता है।
कैसे इस्तेमाल करें: एक चम्मच घी और एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट खाएं। इससे बवासीर के लक्षणों में सुधार हो सकता है।
फाइबर युक्त आहार: बवासीर को नियंत्रित करने के लिए अधिक फाइबर का सेवन करना महत्वपूर्ण है। यह कब्ज को रोकने में मदद करता है और मलत्याग को आसान बनाता है।
कैसे करें: साबुत अनाज, फल, सब्जियां और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन बढ़ाएं।
तिल के बीज बवासीर के उपचार में सहायक होते हैं क्योंकि इनमें फाइबर और अन्य पोषक तत्व होते हैं जो आंतों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
कैसे इस्तेमाल करें: तिल को पीसकर दिन में एक चम्मच शहद के साथ खाएं।
आंतों को साफ रखने के लिए पानी: पर्याप्त पानी पीने से कब्ज की समस्या कम होती है और मलत्याग में आसानी होती है, जिससे बवासीर की समस्या कम हो सकती है।
कैसे करें: दिन में 8-10 गिलास पानी पीने की आदत डालें।
📘 गुरु भक्ति योग_
🕯️
कर्म और भाग्य में से क्या ज्यादा मायने रखता है?
आपके तथा ईश्वर के बीच की दूरी कितनी हो सकती है?
मनुष्य का सबसे बड़ा प्रश्न यही रहा है — “ईश्वर कैसे हैं?” वे साकार हैं या निराकार? क्या वे किसी विशेष रूप में हैं या सर्वव्यापक सत्ता? शास्त्रों के अनुसार, ईश्वर निराकार, अव्यक्त, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी हैं, परंतु जब कोई भक्त उन्हें सच्चे हृदय से पुकारता है, तो ईश्वर उस भक्त की भावना के अनुरूप किसी सगुण रूप में प्रकट हो जाते हैं। यही भक्ति की पराकाष्ठा है, और यही ईश्वर की सबसे करुणामयी लीला।
शास्त्रों की दृष्टि से — ईश्वर का स्वरूप
वेदों और उपनिषदों में वर्णन है:
“एकोहम बहुस्याम” — मैं एक था, अनेक बन गया।
“न तस्य प्रतिमा अस्ति” — उस ईश्वर की कोई मूर्ति नहीं है।
“सच्चिदानंद रूपाय” — वह सत्य, चेतना और आनंदस्वरूप है।
भगवद गीता (अध्याय 4, श्लोक 11) में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं:
“ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।”
जो जैसे मेरी शरण आता है, मैं उसी रूप में उसकी सेवा करता हूँ। इससे स्पष्ट होता है कि ईश्वर का स्वरूप निश्चित नहीं है, वे निराकार हैं। परंतु भक्त की भावना उनके लिए मार्ग बनाती है, जिससे वे साकार रूप में प्रकट होते हैं।
भावना के अनुरूप दर्शन की घटनाएँ संत तुलसीदास और श्रीराम के दर्शन तुलसीदास जी का जीवन रामभक्ति की साक्षात मिसाल है। जब उन्होंने रामचरितमानस की रचना की और राम नाम का अखंड जप किया, तो एक दिन उन्हें काशी में श्रीराम और लक्ष्मण दो छोटे ब्राह्मण बालकों के रूप में दर्शन देने आए। यही सच्ची भक्ति की शक्ति है — जहाँ निराकार ईश्वर भी साकार होकर भक्त के सामने आते हैं।
संत मीरा बाई और श्रीकृष्ण मीरा बाई ने श्रीकृष्ण को ही अपना पति, आराध्य और जीवन का परम लक्ष्य माना। समाज के विरोध, परिवार के तिरस्कार और विष का प्याला पीने के बाद भी उन्होंने कृष्ण को नहीं छोड़ा। अंततः श्रीकृष्ण ने उन्हें दर्शन दिए और अंत में उन्हें अपने धाम ले गए।
रामकृष्ण परमहंस और माँ काली रामकृष्ण परमहंस बचपन से ही माँ काली की भक्ति में लीन थे। जब उन्होंने यह संकल्प किया कि यदि माँ काली साक्षात दर्शन नहीं देंगी, तो वे प्राण त्याग देंगे — तभी माँ काली ने अपने सगुण रूप में उन्हें दर्शन दिए। वे कहा करते थे, “जैसे कोई रूप बनाओ, माँ उसी में प्रकट हो जाती हैं।”
भाव की प्रधानता:
संत कबीर ने कहा —
“भाव बिना भव निस्तरै, प्रेम बिना प्रभु दूर।”
भाव के बिना संसार सागर पार नहीं होता, और प्रेम के बिना ईश्वर मिलते नहीं।
ईश्वर को पाने का मार्ग ज्ञान नहीं, तर्क नहीं, बल्कि “भावना” है। भक्त जिस भी रूप में, जिस भी प्रेम से ईश्वर को पुकारता है — वह भाव ईश्वर को खींच लाता है।
साकार और निराकार — एक ही ईश्वर के दो आयाम साकार और निराकार कोई विरोधाभास नहीं, बल्कि एक ही परमात्मा के दो पहलू हैं।
निराकार — मूलस्वरूप, जो सबमें व्याप्त है।
साकार — वह रूप, जिसमें भक्त अपने आराध्य को अनुभव करता है।
जैसे:
सूर्य का प्रकाश सर्वत्र हैं (निराकार),
लेकिन जब हम उसे चित्र या प्रतिमा में देखते हैं, तो वह हमारे ध्यान का केंद्र बनता है (साकार)।
ईश्वर को रूप से नहीं, रूप के पार अनुभव किया जाता है। पर भक्त की भावना ही वह शक्ति है, जो निराकार को साकार बना देती है।
इसलिए कहा गया है “जैसी भावना, वैसा भगवान।”
ईश्वर हर रूप में भक्त के साथ होते हैं — राम बनकर, कृष्ण बनकर, शिव, देवी, या किसी संत रूप में — बस उस भक्त की सच्ची भावना और आस्था होनी चाहिए।
यदि आप सच्चे हृदय से, निर्मल भाव से ईश्वर को पुकारेंगे — तो वह निराकार सत्ता आपके मन के मंदिर में किसी साकार रूप में अवश्य प्रकट होगी।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।

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