धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 08 फरवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग🧾
शनिवार 08 फरवरी 2025
आप सभी सनातनियों को जया एकादशी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – माघ मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार माघ माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 08:16 PM तक उपरांत द्वादशी
📝 तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 06:07 PM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है।
⚜️ योग – वैधृति योग 02:04 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
प्रथम करण : वणिज – 08:48 ए एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 08:15 पी एम तक बव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:50 से 11:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 07:13 :57
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:30:16
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:21 ए एम से 06:13 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:47 ए एम से 07:05 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:57 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:26 पी एम से 03:10 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:03 पी एम से 06:30 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:06 पी एम से 07:24 पी एम
💧 अमृत काल : 09:31 ए एम से 11:05 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 09 से 01:01 ए एम, फरवरी 09
❄️ रवि योग : 07:05 ए एम से 06:07 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को काला कम्बल भेंट करें ।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ रवि योग/ जया (अजा) एकादशी व्रत (सर्वे), भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन जन्म दिवस, गोमांतक दल के सदस्य बाला देसाई जन्म दिवस, महान गजल गायक जगजीत सिंह जयन्ती, महिला क्रांतिकारियों कल्पना दत्त स्मृति दिवस, राजस्थान के भूरपूर्व मुख्यमंत्री टीका राम पालीवाल स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षित इंटरनेट दिवस, नारियल दिवस श्रीलंका, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस रूस
✍🏼 तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
🗼 Vastu tips
आप हल्दी या सिंदूर से स्वास्तिक का चिन्ह बना सकते हैं। अगर दिशा की बात करें तो इस काम के लिए उत्तर-पूर्व दिशा सबसे अच्छी है। आप स्वास्तिक का चिन्ह पूजा के स्थान पर या घर के मुख्य द्वार पर भी बना सकते हैं। ऐसा करने से देवी मां की कृपा से शुभ फल तो मिलते ही हैं, साथ ही वास्तु संबंधी समस्या के निगेटिव इफेक्ट से भी छुटकारा मिलता है। स्वास्तिक का चिन्ह घर में पॉजिटिविटी लाने वाला होता है।
स्वास्तिक बनाते समय इस बात का रखें ध्यान घर के मुख्य द्वार और मंदिर में स्वास्तिक बनाने से वास्तु दोष दूर होता है। इन दोनों जगहों पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं और उसके नीचे शुभ लाभ लिख दें। ऐसा करने से आपके घर में हमेशा सकरात्मकता बनी रहेगी। साथ देवी लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहेगी। ध्यान रखें कि स्वास्तिक का चिन्ह 9 उंगली लंबा और चौड़ा होना चाहिए।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पेशाब को रोकना बंद करें कई बार हम व्यस्तता में पेशाब रोक लेते हैं, लेकिन यह आदत गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। लंबे समय तक पेशाब रोकने से मूत्राशय पर दबाव बढ़ता है, जिससे संक्रमण और किडनी की समस्याएं हो सकती हैं। शरीर की ज़रूरत को नज़रअंदाज़ न करें।
टॉयलेट का उपयोग सही तरीके से करें अगर आप सार्वजनिक टॉयलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसकी सफाई को प्राथमिकता दें। गंदे टॉयलेट का उपयोग करने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में टॉयलेट सीट सैनिटाइज़र या डिस्पोज़ेबल सीट कवर का इस्तेमाल करें।
पानी का महत्व समझें पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पेशाब साफ और पतला रहता है। यह आपके मूत्राशय को संक्रमण मुक्त रखने में मदद करता है। डॉक्टर भी यही सलाह देते हैं कि दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।
🍁 आरोग्य संजीवनी ☘️
जुकाम : 10 मुनक्का, 10 कालीमिर्च और 5 बादाम को पानी में भिगोकर छील लें। फिर इन सबको एक साथ पीसकर 25 ग्राम मक्खन में मिलाकर रात को सोते समय खा लें। सुबह उठने पर दूध में पीपल, कालीमिर्च और सौंठ को डालकर उबालकर दूध को पी लें। ऐसा लगातार काफी समय तक करने से जुकाम पूरी तरह से ठीक हो जाता है। मुनक्के को गर्म पानी के साथ खाने से जुकाम में आराम हो जाता है।
ज्यादा जुकाम होने पर : 6 मुनक्का, 6 बादाम, 6 पिस्ता, 1 लौंग, 1 इलायची और 2 चम्मच खसखस को सुबह इतने पानी में डालकर भिगो दें कि ये सारी चीजें पूरी तरह से उसके अन्दर डूबी रहें। शाम को मुनक्का के बीज निकाल लें और बादाम को छील लें। इन सबको एक साथ पीसकर किसी गीले मोटे कपड़े में पोटली बनाकर तवे पर रखकर सेंक लें। रात को सोते समय इसे खा लें पर इसका पानी नही पियें। इससे जुकाम पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
🌷 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक दिन एक साधु नदी पर स्नान करने गया। वहां उन्होंने देखा कि बिच्छू पानी में तड़प रहा है।
बिच्छू तैर नहीं सकता और साधु जानता था कि अगर उसने बिच्छू को नहीं बचाया, तो वह डूब जाएगा, इसलिए सावधानी से बिच्छू को उठाकर, साधु ने उसे डूबने से बचाया और उसे धीरे से जमीन पर रखने ही वाला था कि बिच्छू ने उसकी उंगली काट ली . दर्द में साधु ने सहज रूप से अपना हाथ फेंका और बिच्छू उड़ता हुआ वापस नदी में चला गया
जैसे ही साधु को डंक से होश आया उसने बिच्छू को फिर से पानी से बाहर निकाल लिया।इससे पहले कि वह बिच्छू को ज़मीन पर सही सलामत खड़ा कर पाता, जीव ने उसे डंक मार दिया।
यह ड्रामा कई मिनट चला। एक शिकारी ने संत के रूप में ध्यान से देखा और जीव को पानी से बाहर निकाला, केवल उसे वापस फेंकने के लिए, क्योंकि वह प्रत्येक ताजा डंक से दर्द में मरोड़ रहा था।
अंत में, शिकारी ने साधु से कहा, “मुझे मेरी स्पष्टता के लिए क्षमा करें, लेकिन यह स्पष्ट है कि बिच्छू हर बार आपको डंक मारता रहेगा और हर बार जब आप इसे सुरक्षित स्थान पर ले जाएंगे।तुम हार क्यों नहीं मान लेते और उसे डूबने नहीं देते?” साधु ने उत्तर दिया, “मेरे प्यारे बच्चे बिच्छू ने मुझे द्वेष या बुरी नीयत से नहीं काटा है।
जैसे पानी का स्वभाव है मुझे भिगोना, वैसे ही बिच्छू का स्वभाव है डंक मारना।वह नहीं जानता कि मैं उसे सुरक्षित स्थान पर ले जा रहा हूं।यह सचेत समझ का एक स्तर है जो उसके मस्तिष्क की क्षमता से अधिक है।
लेकिन जैसे बिच्छू का स्वभाव होता है डंक मारना। इसलिए बचाना मेरा स्वभाव है।जैसे वह अपना स्वभाव नहीं छोड़ रहा है, वैसे ही मैं अपना स्वभाव क्यों छोड़ूं?
मेरा धर्म किसी भी प्रकार के प्राणी-मनुष्य या पशु की सहायता करना है।
मैं एक छोटे से बिच्छू को अपने उस दैवीय स्वभाव को क्यों छीनने दूं जिसे मैंने वर्षों की साधना से विकसित किया था?
············••●◆❁✿❁◆●••··············
⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, बेडरूम में यदि लाल या गुलाबी रंग की तस्वीर लगाई जाए तो पति-पत्नी के बीच प्यार और विश्वास बना रहता है। तकरार की गुंजाइश कम हो जाती है। इसके अलावा स्टडी रूम में हल्के भूरे या हल्के नीले रंग की तस्वीर लगाना अच्छा रहता है। इससे बच्चों का मन पढ़ाई में लगा रहता है और तस्वीर को देखकर उन्हें सुखद अहसास होता है, जबकि बच्चों के सोने के कमरे में नारंगी या बैंगनी रंग की तस्वीर लगानी चाहिए।
वास्तु के मुताबिक, घर के रसोईघर में सफेद या सुनहरे रंग की तस्वीर लगानी चाहिए। रसोई में इन रंगों की तस्वीर लगाने से घर में अन्न की कमी कभी नहीं होती और हमेशा मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है। वहीं घर के पूजा घर या मंदिर में गुलाबी या पीले रंग की तस्वीर लगानी चाहिए। इससे परिवार पर देवी-देवता के कृपा दृष्टि बनी रहती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
भारतीय घरों में खाने के बाद कुछ मीठा खाने का रिवाज है। इस मीठे के लिए ज्यादातर चावल की खीर बनाई जाती है। यह खाने में बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट होती है। लेकिन क्या आपने कभी रात की बची हुई बासी खीर खाई है? यकीन मानिए यह खाने में और भी ज्यादा टेस्टी लगती है और सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है। रात की बची खीर की फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें, फिर अगले दिन इसका लुफ्त उठाएं। ठंडी-ठंडी खीर रबड़ी की तरह स्वादिष्ट लगेगी और साथ ही आपकी गट हेल्थ के लिए भी काफी फायदेमंद होगी।
बासी दही भी है और हेल्दी एक या दो दिन के लिए जमाने रखी हुई दही भी बासी होने पर और ज्यादा फायदेमंद हो जाती है। इसमें फर्मेंटेशन का प्रॉसेस तेज हो जाता है और गुड बैक्टीरिया की ग्रोथ होने लगती है। इस तरह की दही गट हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद होती है। पाचन में सुधार करने के साथ-साथ इम्यूनिटी बूस्ट करने में भी मदद करती है। बासी होने के चलते दही में कई विटामिन की मात्रा काफी बढ़ जाती है जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। जिन लोगों को दूध या दही नहीं पचता, उनके लिए बासी दही एक बेहतर विकल्प हो सकती है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
आयुर्वेदिक उपयोग:
त्वचा की चमक बढ़ाने के लिए: अपराजिता के पुष्प और पत्तों से तैयार उबटन का प्रयोग करने से चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़तीं। इसका नियमित उपयोग त्वचा को युवा बनाए रखता है और चेहरे पर अद्भुत चमक लाता है।
पेशाब की पथरी के इलाज में: अपराजिता के पुष्पों को उबालकर उसका काढ़ा पीने से पेशाब की नली में फंसी पथरी बाहर निकल जाती है। यह उपाय अत्यधिक प्रभावी माना गया है।
जलन से राहत: गर्मियों में पेशाब में जलन की समस्या होने पर अपराजिता के पत्तों को पीसकर पेट के निचले हिस्से पर लगाने से जलन में तुरंत राहत मिलती है।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व: अपराजिता को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है।
प्राचीन काल में योद्धा अपनी शिखा में इस पौधे की जड़ बांधकर युद्ध में अपराजित रहने का संकल्प लेते थे। यह माना जाता था कि इससे शत्रु पर विजय अवश्य प्राप्त होती है।
तांत्रिक साधनाओं में भी इस पौधे का विशेष महत्व है। इसका उपयोग कई मंत्र-तंत्र सिद्धियों में किया जाता है।
📖 गुरु भक्ति योग 📖
नारद एक शरारती और झगड़ालू के रूप में इतने प्रसिद्ध हैं, कि भारत में, एक शरारती व्यक्ति जो हमेशा चुगली करने में प्रसन्न होता है और अफवाह फैलाने में लिप्त होता है, प्रतीकात्मक रूप से ‘नारद’ के रूप में फटकारा जाता है।
नारद को देवताओं और राक्षसों दोनों को एक-दूसरे के बारे में रहस्य बताने की आदत थी। देवताओं और राक्षसों ने अंततः एक दूसरे से घृणा की। नारद के कर्मों ने अक्सर देवताओं, राक्षसों और पुरुषों के बीच परेशानी और घर्षण पैदा किया और इस तरह के घर्षण के कारण अक्सर अंत में युद्ध होता था। इसलिए कुख्यात शरारत करने वाले नारद ने कलहा-प्रिया या झगड़ों के प्रेमी का नाम हासिल किया।
ऐसे व्यक्ति को हम संत कैसे कह सकते हैं? क्या यह सही है कि उसने गपशप फैलाकर लोगों को एक दूसरे के विरुद्ध खड़ा किया? लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि नारद का इरादा एक अच्छे कारण का समर्थन करना था। उनकी निरंतर इच्छा थी कि बुरे लोगों को उनके कर्मों के लिए दंडित किया जाए, अभिमानी जल्द ही सबक सीखे और अच्छे लोग हमेशा खुशी से रहें।
“नारायण, नारायण” का जप करते हुए, दिव्य ऋषि नारद तीनों लोकों में अफवाहें फैलाते हुए चले गए, जिससे दरार पैदा हो गई।
वैकुंठ (भगवान विष्णु के निवास) में , वह अपनी प्रफुल्लित करने वाली कहानियों से भगवान का मनोरंजन करेगा। “मैंने इंद्र को अहिल्या की सुंदरता का वर्णन तब तक किया जब तक कि वह उस विवाहित महिला के लिए वासना करने लगे … दक्ष ने शिव से घृणा की जब मैंने बताया कि शिव ने उनका उपहास कैसे किया … मैंने श्रीदेवी को भूदेवी से ईर्ष्या की … मैंने कंस के मन में मृत्यु का भय डाल दिया … मैंने रावण की प्रशंसा की विश्वास है कि वह सभी देवताओं से बड़ा था …”
“आप ऐसा क्यों करते हैं, नारद?” विष्णु से पूछा।_
*_”क्या करें?”
“इतनी परेशानी का कारण”
मैं कुछ नहीं करता। मैं केवल आप में उनके विश्वास की परीक्षा लेता हूँ। यदि वे आपके सच्चे भक्त होते, तो क्या उनमें से कोई कामी, क्रोधी, लोभी, ईर्ष्यालु, भयभीत या अभिमानी होता?
विष्णु हंस पड़े और अपने सबसे प्रिय भक्त नारद को आशीर्वाद दिया, जो “नारायण, नारायण” का जप करते रहे।
◄┉┉┉┉┉┉༺✦ᱪ✦༻┉┉┉┉┉┉►
⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।

Related Articles

Back to top button