Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 09 अगस्त 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 09 अगस्त 2025
🎗️ 09 अगस्त 2025 दिन शनिवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि पूर्णिमा तिथि है। आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पावन पर्व है। रक्षाबंधन के पर्व पर बहने अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती है। इस पर्व को बहुत ही पवित्र बंधन माना जाता है। ये पर्व भाई – बहन के सच्चे प्यार का प्रतिक भी होता है। इस रक्षाबंधन पर राखी बांधने के मूहूर्त के विषय को भी देख लेते है। इस रक्षाबंधन पर सौभाग्य योग भी बन रहा है और यह योग रक्षाबंधन के पर्व की महत्ता को बढ़ा देता है। सौभाग्य योग 09 अगस्त की सुबह से लेकर रात्रि 2.15 बजे तक रहेगा। आज सर्वार्थ सिद्धि योग भी सुबह 5.47 बजे से दोपहर 2.23 बजे तक रहेगा। और दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12.17 PM बजे से 12.53 PM बजे भी रहेगा। जिससे राखी बांधना सबसे शुभ रहेगा। आप सभी सनातनियों को “रक्षाबंधन के पावन पर्व एवं श्रावणी पूर्णिमा व्रत” की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में भी धन – धान्य एवं हर प्रकार के खुशियों का सदैव निवास हो ऐसी हमारी शुभकामना है।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌝 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 01:24 PM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथि स्वामी – पूर्णिमा तिथि पूर्णत्व की तिथि मानी जाती है. इस तिथि के स्वामी स्वयं चन्द्र देव हैं. इस दिन सूर्य और चन्द्रमा समसप्तक होते हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र श्रवण 02:23 PM तक उपरांत धनिष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – श्रवण नक्षत्र के स्वामी भगवान विष्णु हैं, और इसके अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु हैं।
⚜️ योग – सौभाग्य योग 02:15 AM तक, उसके बाद शोभन योग
⚡ प्रथम करण : बव – 01:24 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 12:50 ए एम, अगस्त 10 तक कौलव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:28:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:32:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:22 ए एम से 05:04 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:43 ए एम से 05:47 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:53 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:40 पी एम से 03:33 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:06 पी एम से 07:27 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:06 पी एम से 08:10 पी एम
💧 अमृत काल : 03:42 ए एम, अगस्त 10 से 05:16 ए एम, अगस्त 10
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, अगस्त 10 से 12:48 ए एम, अगस्त 10
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:47 ए एम से 02:23 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में नीले धागे वाली राखी चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रक्षाबंधन/श्रावणी उपाकर्म/सर्वार्थसिद्धि योग/पंचक प्रारंभ/ तैत्तिरीय श्रावणी/ हयग्रीवोत्सव/ शक्ल यजू: श्रावणी/ ऋक श्रावणी/ अगस्ति दर्शन/ झूलन यात्रा समाप्ति्/ अमरनाथ यात्रा/ पूर्णिमा समाप्ति दोपहर 01.24/ पंचक प्रारम्भ 26.10/ अगस्त क्रांति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस, भारतीय अभिनेता घट्टामनेनी महेश बाबू जन्म दिवस, राष्ट्रीय पुस्तक प्रेमी दिवस, राष्ट्रीय उपराष्ट्रपति दिवस, भारत छोड़ो आन्दोलन स्मृति दिवस, नागासाकी दिवस, सिंगापुर राष्ट्रीय दिवस, विश्व के स्वदेशी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस (World’s Indigenous Peoples Day)
✍🏼 तिथि विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🦄 Vastu tips 🐎
किस दिशा में लगानी चाहिए सात भागते घोड़ों की तस्वीर? आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार सात भागते घोड़ों की तस्वीर के लिए दक्षिण दिशा सबसे अच्छी होती है। यदि दक्षिण दिशा में कोई दीवार नहीं है, तो अपने इसके उत्तर या पूर्व दिशा में भी लगा सकते हैं। ध्यान रहे कि घर या ऑफिस में ये तस्वीर इस तरह से लगाएं जिससे घोड़ों का चेहरा अंदर की तरफ रहे। इस तस्वीर को लगाने के लिए घर का ड्राइंग रूम सबसे उत्तम स्थान माना जाता है। कमरे में इसे नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा कमरे के गेट के सामने भी ये तस्वीर नहीं लगानी चाहिए। पेंटिंग में दिखाई दे रहे घोड़ों पर कोई जंजीर, पट्टा या रस्सी नहीं होनी चाहिए वो स्वतंत्र होने चाहिए।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
एक घरेलू नुस्खा है जो अक्सर गले की खराश के लिए इस्तेमाल होता है:
गले की खराश के लिए:
एक गिलास गुनगुना पानी लें।
उसमें आधा चम्मच नमक मिलाएं।*
अच्छी तरह मिलाएं और इस पानी से दिन में दो-तीन बार गरारे करें।
आप लोगों ने अक्सर सुना होगा कि नमक के पानी से गरारे करने से गले की खराश और सूजन में आराम मिलता है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
✅ आयुर्वेदिक उपाय:
उपाय 1: त्रिफला चूर्ण
👉 त्रिफला चूर्ण + शहद
विधि: रात को सोते समय 1 चमच त्रिफला चूर्ण, आधा चम्मच शुद्ध शहद में मिलाकर लें।
यह शरीर को डिटॉक्स करता है और आम (toxins) को बाहर निकालता है।
उपाय 2: लहसुन का रस + शहद
👉 लहसुन में anti-lipoma गुण होते हैं
विधि: 2–3 लहसुन की कलियां कूटकर उसमें 1 चमच शुद्ध शहद मिलाकर खाली पेट सेवन करें।
ये उपाय गांठों के साइज़ को कम करने में मदद करता है।
▪️ उपाय 3: गोमूत्र अर्क + त्रिकटु चूर्ण
👉 आयुर्वेदिक शोधों में lipoma के लिए उपयोगी बताया गया है
▪️ विधि: 10 ml गोमूत्र अर्क + 1/2 चमच त्रिकटु चूर्ण – सुबह खाली पेट लें।
👨🏻⚕️ (डॉक्टर की सलाह से करें)
बाहरी उपाय: ताम्र भस्म लेप
👉 ताम्र भस्म (Copper Ash) को शहद में मिलाकर गांठ पर लेप करें
👉🏼 विधि: ताम्र भस्म 1 चुटकी + शुद्ध शहद मिलाकर गांठ पर दिन में 1 बार लगाएं।
ये गांठ को अंदर से तोड़ने में सहायक है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
जैसा कि शनिदेव भगवान कृष्ण के परम भक्त माने जाते हैं। गरुण एवं नारद पुराण में कोकिलावन की चर्चा मिलती है। श्रीकृष्ण जी के जन्म समय में देवगणों का नंदगांव में आगमन हुआ था। जन्म महोत्सव का सब ने मिल जुलकर अति आनन्द लिया। अपने आराध्य देव के दर्शन की लालसा लेकर शनिदेव भी वहां चले आये। परंतु माँ यशोदा की तीव्र दृष्टि से अपने को नहीं बचा पाये। यशोदा ने शनिदेव को पहचान लिया और बालक के समीप पहुँचने ही नहीं दिया। इस कारण से उन्हें अपने आराध्य का दर्शन प्राप्त नहीं हुआ। शनिदेव की वक्र दृष्टि के कारण उन्हें गोकुल में नहीं जाने दिया गया। अतः उनके अंतर्मन में अत्यधिक क्षोभ उत्पन्न हुआ। उन्होंने नंदगाँव के समीप जंगल में तपस्या करनी आरम्भ की। शनि के तप से प्रसन्न हो भगवान श्री कृष्ण जी ने शनिदेव जी को कोयल का रूप धारण कर दर्शन दिए। श्रीकृष्ण जी प्रगट होकर बोले कि हे शनिदेव आप न्याय का कार्य करते हैं, दुष्टों को दंड देकर आप सर्वदा सज्जन वृंद की रक्षा करते हैं। आप हमारे गोकुल में निवास करें और इसका निरन्तर रक्षण करें। प्राणियों पर कदाचित वक्र दृष्टि ना डालें निरंतर यहीं बने रहें। आज के बाद यह स्थल कोकिला वन के नाम से पुकारा जाएगा। कोयल के मधुर स्वर कान में गूंजें सो आपका धाम कोकिलावन प्रसिद्ध होगा। उसी समय से शनि देवता निरंतर कोकिलावन में उपस्थित हैं।
◆ स्थान:-कहते हैं कोकिला वन (कोल वन) नंद गाँव से 3 मील उत्तर और जावत गांव से 1 मील पश्चिम में स्थित है,।शनि की पीड़ा, ढैय्या एवं साढ़ेसाती से यहाँ मुक्ति मिलनी निश्चित है। जो भक्तजन यहां पर आकर तीन मील की परिक्रमा लगाते हैं, शनिदेव के साथ भगवान बालकृष्ण के दर्शन का लाभ भी पा जाते हैं।ज्योतिष शास्त्रों में कहा गया है माघ महीने में भगवान कृष्ण की उपासना करने से शनि शांत होते हैं। माघ महीने में गंगा स्नान और दान भी जरूर करें। ऐसा करने से शनिदेव को आप प्रसन्न कर सकते हैं, जिससे जीवन में सुख-शांति का वास होगा।इस तरह भगवान श्रीकृष्ण और शनि देव दोनों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं!
ऊँ श्री बालकृष्णाय नमः,
ऊँ शं शनैश्चराय नमः,
जय शनिदेव,🙏
◄┉┉┉┉┉┉༺✦ᱪ✦༻┉┉┉┉┉┉►
⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।।
पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।

